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भाकपा(माले)
वर्ष 19, अंक 8 20-26, फरवरी, 2010

भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (माले) (लिबरेशन) का केन्द्रीय हिन्दी मुखपत्र
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संपादकीय

महंगाई: आम आदमी के भोजन और आजीविका पर हमला

खाद्य-वस्तुओं की कीमतों में रिकार्ड तोड़ बढ़ोत्तरी के बीच संप्रग सरकार घड़ियाली आंसू बहाये जा रही है. इससे भी बदतर बात यह है कि कीमतों पर लगाम लगाने के नाम पर सरकार बढ़ती कीमतों का बहाना बनाकर बड़ी पूंजी को और भी ज्यादा छूटें देने की कोशिश कर रही है......पूरी खबर

पटना में छात्र-आक्रोश का विस्फोट


नितीश के शासन में एक बार फिर छात्र-आक्रोश का विस्फोट हुआ. पिछली बार महाराष्ट्र की घटना को लेकर, जिसमें राहुल राज की हत्या हुई थी, आक्रोश फूटा था और इस बार कोचिंग संस्थानों के काले धंधे के खिलाफ फूटा. पिछले 8 फरवरी को जो आक्रोश फूटा उसने 9 फरवरी को दावानल का रूप ले लिया. छात्रों ने कोचिंग संस्थानों को जमकर निशाना बनाया.....पूरी खबर

खनिज संसाधनों की कारपोरेट लूट बंद करो!
खनिजों, तेल व गैस का राष्ट्रीकरण करो!

खनन क्षेत्र के द्वार खुले निजी लूट के लिये
जैसा कि एनपीसी की रिपोर्ट (बाॅक्स देखें) में दिखाया गया है, भारत की आजादी की पूर्व वेला में निजी खिलाडि़यों द्वारा मुनाफे और निर्यात के लिये खनन को औपनिवेशिक शोषण के प्रतीक के बतौर देखा गया था और राष्ट्रीय अर्थतंत्र की ओर बदलाव में एक मुख्य तत्व के बतौर खनन के राष्ट्रीयकरण की सिफारिश की गई थी.......पूरी खबर

हत्या के विरोध में बाराचट्टी में संकल्प सभा

चंदूराम

माओवादियों ने विगत 3 जनवरी 2010 को भाकपा(माले) के बाराचट्टी प्रखंड कमेटी के सदस्य कामरेड अर्जुन पटेल की हत्या कर दी थी. उन पर पुलिस की मुखबिरी का झूठा आरोप मढ़ा गया था. इस हत्या से उनके गांव सेवई समेत पूरे बाराचट्टी में आतंक छाया था, लेकिन जनता एवं पार्टी कतारों में माओवादियों के खिलाफ काफी रोष था......पूरी खबर

पटना में पार्टी की पंचायत-संबंधी पहलकदमियां
पंचायतों को भूस्वामियों और प्रशासन का विपक्ष बनना होगा

कुणाल

पंचायतें पार्टी के लिए विवाद, बदनामी और चुनौती का विषय बनी हुई हैं. बहस में सारा दोष पंचायत प्रतिनिधि, खासकर मुखिया पर मढ़ दिया जाता है और सारा प्रयास उन्हें नियंत्रित करने पर केंद्रित हो जाता रहा है, जबकि इसके उलट, पार्टी का कहना रहा है कि समस्या की जड़ स्थानीय पार्टी संगठन की स्वतंत्र पहलकदमी का खो जाना और पार्टी का मुखिया केंद्रित हो जाना है......पूरी खबर

पांचवां गोरखपुर फिल्म समारोह

जन संस्कृति मंच (जसम) और गोरखपुर फिल्म सोसाइटी के तत्वावधान में विगत 4 फरवरी 2010 को रंगकर्मी शशिभूषण परिसर (स्थानीय गोकुल अतिथि भवन) में चार-दिवसीय फिल्म समारोह (4-7 फरवरी 2010) आरम्भ हुआ. यह समारोह आंध्र प्रदेश के समर्पित मानवाधिकार कार्यकर्ता के. बालगोपाल और मराठी साहित्यकार-फिल्मकार दिलीप चित्रे की याद में समर्पित था......पूरी खबर

गोरख पंाडेय के गांव में

प्रणय कृष्ण

जन संस्कृति मंच के संस्थापक महासचिव, जनकवि और सिद्धांतकार गोरख पांडेय 29 जनवरी 1989 के दिन हमारे बीच नहीं रहे थे. इस वर्ष 19 जनवरी 2010 के दिन उनके गांव ‘पण्डित का मुडे़रा’ में तमाम बौद्धिक, कवि व संस्कृतिकर्मी उन्हें याद करने के लिए इकट्ठा हुए. ‘पंडित का मुड़ेरा’ गांव देवरिया जनपद के देसही देवरिया ब्लाॅक में स्थित है......पूरी खबर