वर्ष 35 / अंक - 41 / पटना की मुसहर बस्ती पर बर्बर पुलिसिया दमन की निंदा

पटना की मुसहर बस्ती पर बर्बर पुलिसिया दमन की निंदा

पटना की मुसहर बस्ती पर बर्बर पुलिसिया दमन की निंदा

विगत 4 अक्तूबर को पटना जिले के पिपरा थाना अंतर्गत बेहरावा-चकिया मुसहर टोली में शराब पकड़ने और जांच के नाम पर पुलिस द्वारा मुसहर समुदाय के लोगों पर बर्बर दमन ढाया है. पुलिस कार्रवाई के दौरान दो लोगों की मौत और 32 महिलाओं समेत कुल 42 लोगों को जेल भेजे जाने की घटना बेहद शर्मनाक और अमानवीय है.

बीती रात पुलिस की छापेमारी के दौरान पुलिस के डर से 60 वर्षीय रामू मांझी और 16 वर्षीय आकाश मांझी पुनपुन नदी में कूद गए. आरोप है कि पुलिस ने दोनों को नदी से बाहर निकलने का मौका नहीं दिया, जिसके कारण दोनों की मौत हो गई. पुलिस बर्बरता से परेशान होकर एक युवक ने आत्महत्या कर ली.

पुलिस पर महिलाओं के साथ बदसलूकी, उनकी साड़ी खींचने, जातिसूचक गालियां देने और गलत तरीके से छूने के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं. यह पुलिसिया कार्रवाई सिर्फ दमनकारी ही नहीं, बल्कि महिलाओं और दलित समुदाय की गरिमा पर भी हमला है.

पुलिस ने इस कार्रवाई में कुल 39 लोगों को जेल भेजा है, जिनमें 32 महिलाएं हैं. इनमें कई युवा लड़कियां भी शामिल हैं. कई ऐसी महिलाओं को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जिनकी गोद में छोटे बच्चे और दुधमुंहे शिशु हैं. बच्चों से उनकी माताओं को अलग करना बेहद अमानवीय और संवेदनहीन कार्रवाई है.

ग्रामीणों से मिलने पहुंचीं भाकपा(माले) की विधान पार्षद कामरेड शशि यादव ने बताया कि मुसहर समुदाय बिहार के सबसे गरीब और वंचित समुदायों में से एक है. लंबे समय से इस समुदाय के अनेक परिवार शराब बनाने को अपनी जीविका का साधन बनाने के लिए मजबूर रहे हैं. शराबबंदी लागू होने के बाद से सरकार को इस समुदाय के परिवारों के लिए वैकल्पिक रोजगार और सम्मानजनक जीवन की व्यवस्था करनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय लगातार पुलिसिया दमन किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि बिहार में भाजपा की सरकार है और सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री हैं. अपराध पर नियंत्रण करने में सरकार पूरी तरह विफल है. बलात्कारियों और हत्यारों को पकड़ने में पुलिस नाकाम है, शराब माफियाओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं. लेकिन गरीब मुसहर समुदाय की महिलाओं और नौजवानों को पकड़कर जेल भेजने में पुलिस पूरी ताकत लगा रही है. भाजपा सरकार की नीति साफ ह – माफियाओं को संरक्षण और गरीबों पर दमन. उन्होंने कहा कि बेहरावा चकिया की घटना इसी दोहरे चरित्र को उजागर करती है.

भाकपा(माले) ने मांग की है कि गिरफ्तार सभी निर्दाेष लोगों को अविलंब रिहा किया जाए, 32 महिलाओं समेत गिरफ्तार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा की जाए, रामू मांझी और आकाश मांझी की मौत की न्यायिक/स्वतंत्र जांच कराई जाए, दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए और महिलाओं के साथ बदसलूकी, जातिसूचक गाली-गलौज के आरोपों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, छोटे बच्चों और दुधमुंहे शिशुओं की माताओं को जेल भेजने की कार्रवाई तत्काल वापस ली जाए और मुसहर समुदाय के परिवारों के लिए सम्मानजनक वैकल्पिक रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था की जाए.


भाकपा(माले) और खेग्रामस की जांच टीम पहुंची

10 अक्तूबर को भाकपा(माले) और योग्रामस की एक उच्चस्तरीय बेहरामा-चकिया पहुंची. इस जांच टीम में खेग्रामस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यदेव राम, राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा, राष्ट्रीय सचिव गोपाल रविदास व राज्य सचिव शत्रुघ्न सहनी के साथ ही भाकपा(माले) पोलित ब्यूरो सदस्या व पटना जिला सचिव अमर शामिल थे.

पूर्व विधायक सम्यदेव राम व गोपाल रविदास विधान पार्षद शशि यादव – ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से मुलाकात कर पिपरा थाना प्रभारी समेत तमाम पुलिस कर्मियों पर तत्काल कारवाई करने, मामले की विस्तृत जांच कर आत्महत्या करने वाले युवक के परिजनों द्वारा दिये गए आवेदन के तहत मुकदमा दर्ज करने तथा जेल में बंद तमाम महिलाओं को अविलंब बिना शर्त रिहा करने की मांग की है.

10 October, 2026