वर्ष 35 / अंक - 41 / शिक्षकों को शिक्षा सुधार आंदोलन में बड़ी भूमिका निभ...

शिक्षकों को शिक्षा सुधार आंदोलन में बड़ी भूमिका निभानी होगी – का. दीपंकर भट्टाचार्य

शिक्षकों को शिक्षा सुधार आंदोलन में बड़ी भूमिका निभानी होगी – का. दीपंकर भट्टाचार्य

विगत 4 अक्टूबर, 2026 को पटना के आइएमए हाॅल में ‘शिक्षा बचाओ, देश बचाओ’ विषय पर आयोजित सेमिनार को मुख्य वक्ता के बतौर संबोधित करते हुए भाकपा(माले) महासचिव काॅमरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि शिक्षकों और कर्मचारियों को अपनी सामाजिक भूमिका निभानी होगी. शिक्षा के व्यापारीकरण, निजीकरण और केंद्रीयकरण के जरिए शिक्षा व्यवस्था और समाज में वैचारिक बदलाव की कोशिशों पर गंभीर बहस जरूरी है.

उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षा की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय है. नीतीश कुमार सरकार ने शिक्षा सुधार आयोग के माध्यम से समान स्कूल प्रणाली की दिशा में पहल की थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. इसी प्रकार भूमि सुधार आयोग की रिपोर्ट को भी लागू नहीं किया गया. बिहार में जिन क्षेत्रों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है, उनमें शिक्षा भी प्रमुख है.

कहा कि शिक्षा के सवाल को केवल शिक्षकों की सेवा-शर्तों तक सीमित नहीं किया जा सकता. मीडिया, सिनेमा और शिक्षण संस्थानों में वैचारिक हस्तक्षेप के जरिए समाज की सोच को प्रभावित करने की कोशिशों के खिलाफ भी शिक्षकों को अपनी भूमिका निभानी होगी.

उन्होंने नागरिकता कानून के खिलाफ चले आंदोलन, किसान आंदोलन, मजदूरों के हालिया आंदोलन और पेपर लीक के खिलाफ जेन जी आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि आज बिहार में स्कूली छात्रों के बीच ‘स्कूल ठीक करो’ जैसे सवाल उठ रहे हैं. जेनरेशन अल्फा के इन छात्र आंदोलनों में शिक्षकों को भी भागीदार बनना चाहिए.

उन्होंने कहा कि बिहार में एसआइआर के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर किए गए. चुनाव आयोग ने इस कार्य में शिक्षकों को भी लगाया था. अब शिक्षकों को मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों के नाम फिर से जुड़वाने की लोकतांत्रिक मुहिम में भी अपनी भूमिका निभानी चाहिए.

कहा कि बाबासाहेब डाॅ. भीमराव अंबेडकर ने जाति व्यवस्था के उन्मूलन के साथ महिलाओं के अधिकार और शिक्षा पर भी जोर देते हुए शिक्षित होने, संगठित होने और संघर्ष करने का आह्वान किया था. उनसे भी पहले ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा की मशाल जलाई थी. यह उनके जन्म की द्विशतवार्षिकी से जुड़ा महत्वपूर्ण वर्ष है साथ ही यह महार सत्याग्रह तथा मनुस्मृति दहन की शताब्दी का भी वर्ष है. इसलिए पूरे साल शिक्षा, सामाजिक बराबरी और फुले-आंबेडकर की विचारधारा के सवालों पर व्यापक अभियान चलाने की जरूरत है.

सेमिनार के उद्घाटनकर्ता डीयू के प्रो. राजीव कुंवर ने कहा कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, लेकिन नई शिक्षा नीति 2020 के जरिए शिक्षा के बढ़ते केंद्रीयकरण की प्रक्रिया सामने आई है. बिहार में ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति के तहत शिक्षकों को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की कोशिश हो रही है जिससे शिक्षक समुदाय की एकता प्रभावित हो रही है. शिक्षक आंदोलन को मजबूत करने के लिए हमें एकताबद्ध होकर शिक्षा को व्यापक जनआंदोलन का मुद्दा बनाना होगा.

पालीगंज विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि बिहार के शिक्षक ‘सरकारी’ तो बन गए हैं, लेकिन उन्हें अभी भी सरकारी वेतनमान और समुचित अधिकार नहीं मिल रहा है. राज्य के जिन विद्यालयों को ‘उत्क्रमित’ विद्यालय घोषित किया गया था, वास्तव में वे ‘उत्पीड़ित’ विद्यालय हैं. नई शिक्षा नीति शिक्षा तक गरीब तबके के बच्चों की पहुंच को खत्म कर रही है. शिक्षकों के अधिकार और शिक्षा की रक्षा के लिए सभी शिक्षक संगठनों को एक मंच पर आना होगा.

विधान पार्षद शशि यादव ने कहा कि जेन जी और जेन अल्फा छात्रों द्वारा उठाए जा रहे शिक्षा संबंधी सवालों को व्यापक सामाजिक समर्थन मिलना चाहिए.

कार्यक्रम में वक्ताओं ने शिक्षा को संविधान प्रदत्त अधिकार, शिक्षकों के सम्मानजनक सेवा अधिकार, समान एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते निजीकरण और केंद्रीयकरण के सवालों पर व्यापक शिक्षक-छात्र एकता और जनअभियान की जरूरत पर जोर दिया.

बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (गोपगुट) से संबद्ध के प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले अयोजित सेमिनार में महासंघ के सम्मानित अध्यक्ष रामबली प्रसाद व महासचिव प्रेमचंद सिन्हा, प्राथमिक शिक्षक संघ (गोप गुट) के राज्य अध्यक्ष प्रदीप राय व राज्य सचिव नागेन्द्र सिंह समेत बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और शिक्षा आंदोलन से जुड़े लोग उपस्थित थे.

10 October, 2026