वर्ष 35 / अंक - 27 / भ्रष्ट मोदी हुकूमत की निरंकुशता को शिकस्त दें !

भ्रष्ट मोदी हुकूमत की निरंकुशता को शिकस्त दें !

भ्रष्ट मोदी हुकूमत की निरंकुशता को शिकस्त दें !

संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले मोदी सरकार अपनी संख्या बढ़ाने और येन-केन-प्रकारेण दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की जी-तोड़ कोशिश कर रही है. मकसद बिल्कुल साफ है. सरकार अपनी सत्ता सुरक्षित करने तथा भारतीय लोकतंत्र पर अपनी गिरफ्त और मजबूत करने के लिए कई कदम उठाना चाहती है. चालाकी से लाया गया परिसीमन बिल, ‘एक देश-एक चुनाव’ का एजेंडा और शायद लोगों का मताधिकार छीनने के एसआइआर अभियान पर मुहर लगाने के लिए देशव्यापी एनसीआर – ऐसे कई कदम उठाए जाने की तैयारी है. विपक्ष की ताकत कम करने और सरकार की संख्या बढ़ाने के लिए ‘आप’, एआइटीसी और एसएस (यूबीटी) जैसी तीन पार्टियों के संसदीय गुटों पर भाजपा ने लगभग कब्जा जमा लिया है.

लेकिन एक तरफ जहां सरकार अपने ‘ऑपरेशन कमल’ अभियान में जी-जान से लगी हुई है, वहीं देश में शासन का बुरा हाल बन गया  है. उन तीन बड़े भ्रष्टाचार के मामलों पर गौर करें जिन्होंने पूरे देश में हलचल मचा रखी है. बार-बार पेपर लीक होने से छात्र आत्महत्या कर रहे हैं और युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है, मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री और उनके परिवार द्वारा उज्जैन में और उसके आसपास जमीन हथियाने का सिलसिला और फिर अयोध्या में राम मंदिर – जिसे मोदी सरकार और संघ ब्रिगेड सच्चे हिंदुओं की आस्था का प्रतीक बताती है – से जुड़ा जमीन और चंदे का घोटाला. ये सब ऐसी व्यवस्था के संकेत हैं जो किसी भी तरह की जवाबदेही की परवाह नहीं करती है और मानती है कि कुछ भी किया जा सकता है. ये ऐसे घोटाले हैं जो इस कहावत को सच साबित करते हैं कि ‘असीमित सत्ता इंसान को पूरी तरह भ्रष्ट कर देती है’.

2014 में नरेंद्र मोदी इस बहु-प्रचारित वादे के साथ सत्ता में आए थे कि ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’. लेकिन आज सरकार का लगभग हर विभाग और हर परियोजना भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के चौंकाने वाले आरोपों से घिरा हुआ है. और सरकार या तो चुप रहती है या समय-समय पर ऐसे भ्रष्टाचारों का बेशर्मी से बचाव करती है. कुछ दिन पहले हमने मीडिया में खबरें देखीं कि कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को खीरे की वाणिज्यिक खेती के प्रोजेक्ट के लिए नेशनल हाॅर्टिकल्चर बोर्ड (राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, एनएचबी) से 99 लाख रुपये से ज्यादा की सब्सिडी मिली. बतौर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी एनएचबी के पदेन उपाध्यक्ष हैं, जो सब्सिडी का प्रबंधन करता है. चौधरी को इसमें हितों का कोई टकराव नहीं दिखता और वे इसे ‘किसान के लिए सब्सिडी’ बताकर इसका बचाव करते हैं!

उज्जैन से सामने आ रही जानकारी और भी ज्यादा चौंकाने वाली है. मध्य प्रदेश के भाजपा मुख्य मंत्री मोहन यादव पिछले दो दशकों से से भी अधिक समय से उज्जैन में और उसके आस-पास जमीन विकास परियोजनाओं की कमान संभाले हुए हैं. 2004 से 2010 तक वे उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रहे. अगले तीन सालों तक वे मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम के प्रमुख रहे. 2013 से वे उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं और 13 दिसंबर 2023 से मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री हैं.

इस अंतिम दौर में उनके परिवार ने और उनके विस्तारित परिवार के सदस्यों की भू-संपत्ति (रियल इस्टेट) कंपनियों ने कम से कम 137 प्लाॅट खरीदे हैं, जिनका कुल रकबा 168 एकड़ है. ये प्लाॅट ज्यादातर उज्जैन और उसके आस-पास नई सड़क परियोजनाओं के समीप हैं अथवा उन इलाकों में हैं जिन्हें उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के तहत कृषि भूमि से आवासीय भूमि में बदलने के लिए चिह्नित किया गया है.

ध्यान देने वाली बात है कि अयोध्या की तरह उज्जैन भी तेजी से धार्मिक पर्यटन केंद्र के तौर पर उभर रहा है और यहां 27 मार्च से 27 मई 2028 तक दो महीने का लंबा महाकुंभ आयोजित होने वाला है. इसके चलते उज्जैन के आस-पास भू-संपत्ति में जबरदस्त उछाल आया है और जमीन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. सही समय और सही जगहों पर जमीन खरीदने की मुहिम से मोहन यादव के परिवार को कितना भारी फायदा हुआ है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी पांच किस्तों वाली जांच रिपोर्ट में किए गए खुलासों पर मुख्य मंत्री ने तो चुप्पी साध रखी है, लेकिन उनके परिवार वाले इसे ‘वैध कारोबार’ बताते हुए इसका बचाव कर रहे हैं: उनका कहना है कि यह कारोबार मोहन यादव के मंत्री बनने से पहले का है, वहीं भाजपा इस घोटाले के खुलासे को ‘सनातन-विरोधी साजिश’ बता रही है!

अयोध्या (राम मंदिर) में चंदा चोरी घोटाले से सरकार इनकार नहीं कर सकी, इसलिए राम मंदिर ट्रस्ट में नियुक्त आरएसएस के बड़े पदाधिकारियों को बचाने की कोशिशें हो रही हैं. इसके लिए एक नियंत्रित जांच की जा रही है जिसमें सारा दोष कुछ आम कर्मचारियों पर मढ़ा जा रहा है. और यहां भी, भ्रष्ट मंदिर ट्रस्ट को भंग करने और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग को राम के खिलाफ बगावत का नाम दिया जा रहा है! लेकिन अब इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि संघ ब्रिगेड के लिए अयोध्या धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि वोट बटोरने और पैसा कमाने का जरिया है. अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा ही था जिसने 1984 में सिर्फ दो सांसदों वाली पार्टी को 1998 में सत्ता तक पहुंचा दिया, और बाद के दशकों में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भ्रष्टाचार-विरोधी लहर के सहारे पार्टी ने अपनी सत्ता को और मजबूत किया. आज अयोध्या के भगवा गढ़ में ही भाजपा के भ्रष्टाचार की पोल बुरी तरह खुल गई है.

देश इस भ्रष्टाचार को खत्म करने की मांग कर रहा है. जंतर-मंतर पर पूरे भारत से आए छात्र 20 जून से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. 28 जून से शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और आइसा नेता नेहा, दानिश, मनीष, दीपक, आमीन और हृषिकेश ने इस धरने को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में बदल दिया है. घमंडी मोदी सरकार का कहना है कि वह इस्तीफे की संस्कृति में विश्वास नहीं रखती. भ्रष्ट सरकार विपक्षी दलों को तोड़ने, सांसदों और विधायकों को खरीदने, नागरिकों का मताधिकार छीनने और असहमति जताने वालों की आवाज दबाकर सत्ता में बने रहने के लिए बेताब है. भ्रष्टाचार-विरोधी प्रदर्शनों को इस भ्रष्ट सरकार को जवाबदेह ठहराना होगा और इस तानाशाही को हराना होगा. जो सरकार भारत के युवाओं का भविष्य बर्बाद करती है, भारत के मजदूरों और किसानों को लूटती है और करोड़ों आस्थावान भारतीयों की श्रद्धा के साथ खिलवाड़ करती है, उसे घुटनों पर लाना ही होगा.

04 July, 2026