वर्ष 35 / अंक - 02 / हरियाणा के सभी जिलों में खेत एवं ग्रामीण मजदूर संग...

हरियाणा के सभी जिलों में खेत एवं ग्रामीण मजदूर संगठनों ने राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन

हरियाणा के सभी जिलों में खेत एवं ग्रामीण मजदूर संगठनों ने राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन

6 जनवरी 2026 को अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन, भारतीय खेत मजदूर यूनियन, ऑल इंडिया एग्रीकल्चरल एंड रूरल लेबरर्स एसोसिएशन सहित अन्य वामपंथी खेत एवं ग्रामीण मजदूर संगठनों के देशव्यापी आह्वान पर प्रतिनिधिमंडलों ने हरियाणा के सभी जिलों में उपायुक्तों एवं तहसीलदारों के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपा.

संगठनों के नेताओं ने संयुक्त प्रेस बयान जारी कर केंद्र सरकार की मजदूर-विरोधी, किसान-विरोधी एवं जन-विरोधी नीतियों के खिलाफ गहरा आक्रोश व्यक्त किया.

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) ने ग्रामीण गरीबों को संकट के समय राहत प्रदान कर अपनी उपयोगिता सिद्ध की है, किंतु केंद्र सरकार ने इसे मजबूत बनाने के बजाय ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबीजीआरएएमजी)’ जैसी योजना थोपकर मांग-आधारित सार्वभौमिक रोजगार गारंटी को समाप्त कर दिया है.  यह ग्रामीण मजदूरों के वैधानिक अधिकार पर सीधा प्रहार है. इसी क्रम में, 44 श्रम कानूनों को 4 श्रम कोडों में समेटकर मजदूरों के अधिकारों का हनन किया गया है, जिससे शोषण, असुरक्षित रोजगार और ठेका प्रथा बढ़ेगी. बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 से बिजली दरें बढ़ेंगी और सब्सिडी कम होगी, जिससे गरीब किसान-मजदूर प्रभावित होंगे. ड्राफ्ट सीड्स बिल 2025 कॉरपोरेट्स को बीज बाजार पर कब्जा देने का माध्यम बनेगा, किसानों की बीज स्वतंत्रता छीनेगा. जबरन भूमि अधिग्रहण, विस्थापन और अरावली पहाड़ियों में खनन से पर्यावरण विनाश हो रहा है, जो हरियाणा की जल सुरक्षा एवं जैव विविधता के लिए घातक है.

ये नीतियां संविधान के अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार) का उल्लंघन हैं और पूंजीपतियों-कॉरपोरेट्स के हित में मेहनतकश जनता को बेरोजगारी, महंगाई एवं गरीबी के दलदल में धकेल रही हैं.

साथ ही, संगठनों ने अमेरिकी साम्राज्यवाद की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि 3 जनवरी 2026 को अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर सैन्य हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो एवं उनकी पत्नी का अपहरण 19वीं सदी के औपनिवेशिक शोषण की पुनरावृत्ति है. यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन है.

भगत सिंह की इंकलाब की परिभाषा याद करते हुए नेताओं ने कहा – ‘एक राष्ट्र का दूसरे पर शोषण बंद हो, एक व्यक्ति का दूसरे पर शोषण बंद हो. भारत की साम्राज्यवाद-विरोधी परंपरा को जीवित रखते हुए हम इस घिनौनी कार्रवाई का विरोध करते हैं और विश्व भर में विरोध की आवाज बुलंद करने का आह्वान करते हैं.’

ज्ञापन की प्रमुख मांगें :

1. मनरेगा को मूल स्वरूप में बहाल करें, वीबीजीआरएएमजी को तत्काल रद्द करें.
2. मनरेगा में 200 दिन का काम एवं न्यूनतम 600 रूपये दिहाड़ी सुनिश्चित करें.
3. श्रमिक-विरोधी 4 श्रम कोड रद्द कर पुराने 4 श्रम कानून बहाल करें.
4. बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 एवं ड्राफ्ट सीड्स बिल 2025 वापस लें.
5. जबरन भूमि अधिग्रहण एवं विस्थापन रोका जाए.
6. अरावली पहाड़ियों में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएं, पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करें.

यह कार्यक्रम पूरे हरियाणा में सफलतापूर्वक आयोजित हुआ. संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा.


10 January, 2026