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डबल ईंजन सरकारों ने धराली हादसा में मृतक प्रवासी बिहारी मजदूरों की अभी तक कोई सुध नहीं ली है

धराली हादसा में अब तक 11 प्रवासी बिहारी मजदूरों के लापता होने की पुष्टि हुई है. वे सभी पश्चिम चंपारण जिले के निवासी हैं

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धराली हादसा में अब तक 11 प्रवासी बिहारी मजदूरों के लापता होने की पुष्टि हुई है. वे सभी पश्चिम चंपारण जिले के निवासी हैं. सिकटा के भाकपा(माले) विधायक का. वीरेन्द्र गुप्ता ने 10 अगस्त 2025 को मोगलहिया गांव पहुचे जहां के कुल सात लोग इस हादसे का शिकार हुए हैं. उन्होंने परिजनों से मुलाकात की, उन्हें सांत्वना दी और और हर तरह की मदद पहुंचाने का भरोसा दिलाया.

सिकटा प्रखंड स्थित यह मोगलहिया गांव (पंचायत – सुनरगांवा, थाना – गोपालपुर) दलित-पिछड़ा बहुल गांव है. इस गांव की बड़ी आबादी भूमिहीन है और ज्यादातर लोग मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. पूरे चंपारण जिले में जे दैनिक मजदूरी है वह वह अब भी बहुत कम है. अतीत में तो वह और भी कम रही है. लोग अच्दी मजदूरी की चाहत में भरी तादाद में पलायन करते हैं.

इनमें से तीन लोग एक ही परिवार के हैं. ये हैं – देवराज शर्मा (उम्र-53 वर्ष, पिता का नाम - दुःखी शर्मा) और उनके दो बेटे अनिल कुमार (उम्र-22 वर्ष) और सुशील कुमार (उम्र-19 वर्ष). ये सभी बढ़ई मजूर थे जो सात सौ रूपये दैनिक मजदूरी पर इसी जिले के चनपटिया प्रखंड मोहद्दी सुगार गांव के रहने वाले ठेकेदार लालबाबू शर्मा के मातहत काम कर रहे थे. बड़े बेटे अनिल कुमार की अगले साल मार्च महीने में शादी होनेवाली थी. अब परिवार में देवराज शर्मा के तीन छोटे बच्चे और उनकी मां है.

उनके भतीजे अखिलेश शर्मा ने बताया कि एक झरने के किनारे इन लोगों का डेरा था. खैरटिया गांव (प्रखंड लौरिया, पश्चिम चंपारण) के निवासी श्याम शर्मा और नेपाल के निवासी आनंद शर्मा भी उन्हीं के साथ रहते थे. यह संयोग ही था कि जब यह हादसा हुआ वे लोग काम पर निकल चुके थे. हादसे की खबर परिजनों को उनके ही जरिए ही मिली.

मोगलहिया गांव के ही रहनेवाले संदीप साह (19 वर्ष, पिता का नाम – इंद्रजीत साह) एक निर्माण मजदूर थे. वे साढ़े पांच सौ रूपये की दैनिक मजदूरी पर काम करते थे. वे अपने मां-बाप की इकलौती संतान थे और रोजगार की तलाश में करीब डेढ़ महीने पहले ही वहां गये थे.

संदीप मुखिया (19 वर्ष, पिता का नाम – हरिलाल मुखिया) भी निर्माण मजदूर थे और वे भी डेढ़ महीना पहले ही वहां पहुंचे थे. गुड्डू दास (24 वर्ष, पिता का नाम - रीपिट दास) भी इसी तरह से वहां पहुंचे थे.

राकेश कुमार (22 वर्ष, पिता का नाम – परशुराम ठाकुर) विवाहित थे. उनकी पत्नी का नाम है ममता देवी. वे डेढ़ साल की एक बच्ची के पिता भी हैं.

बृजेश यादव (23 वर्ष, पिता का नाम – रामाश्रय यादव) के भी दो बच्चे हैं. बेटे खेसारी की उम्र 2 वर्ष और बेटी जूही की 1 वर्ष है. उनकी पत्नी का नाम प्रतिमा देवी है.

इस हादसे में अपनी जान गंवाने वाले नरेश शर्मा (49 वर्ष, पिता का नाम – दिवंगत चचंल शर्मा) इसी जिले के घोघा घाट, चनपटिया प्रखंड के रहने वाले थे. वे इसी साल फरवरी महीने में वहां गए थे. वे पांच बच्चों (2 बेटों, 3 बेटियों) के पिता भी हैं.

ब्रजेश यादव के भाई लालबाबू यादव, नरेश शर्मा के भतीजा धर्मेन्द्र शर्मा, गुड्डू दास के चाचा मंजय दास, संदीप मुखिया के भाई प्रदीप मुखिया और देवराज शर्मा के भतीजे अखिलेश शर्मा ने बताया कि इतने दिनों बाद भी इन लोगों का न मिलने या घरवालों से संपर्क न साधने के बाद भी क्या इस बात में संदेह है कि वे अब इस दुनिया में नहीं हैं? ये सभी लोग मलबे के नीचे दब कर अपनी जान गंवा चुके हैं. मृतकों के पास घर की जमीन के अलावा कोई जमीन नहीं थी और वे मेहनत-मजूरी कर ही अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे. उनके असामयिक मुत्यु से उनकी पत्नी और बच्चों का जीवन अंधेरे में डूब गया है. उतराखंड व बिहार – दोनों ही राज्यों में भाजपा की सरकार है और केंद्र में भी उसकी ही सरकार है. इन डबल ईंजन सरकारों अभी तक उनके परिजनों की कोई सुध क्यों नहीं ली है?

5 अगस्त 2025 को उत्तराखंड सरकार ने जो सूची बनाई है उसमें ये सब अभी भी लापता के बतौर ही दर्ज हैं. इस सूची में पश्चिम चंपारण जिले के ही रामधार कुशवाहा (पिता का नाम – किशुन कुशवाहा) और कृष्णा राम (पिता का नाम – मुदल राम) के नाम भी दर्ज हैं.


16 August, 2025