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जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल : शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक लड़ने का संकल्प

जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल : शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक लड़ने का संकल्प

दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 3 जुलाई को लगातार छठे दिन भी जारी रही. छात्रों और युवा कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार की शिक्षा नीतियों के खिलाफ अपना संघर्ष तेज कर दिया है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के कार्यकर्ताओं ने काॅकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ एकजुटता दिखाते हुए यह भूख हड़ताल शुरू की है. यह भूख हड़ताल मोदी सरकार की छात्रा-विरोधी शिक्षा नीतियों, खासकर नेशनल एजुकेशन पाॅलिसी (NEP) 2020 और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के खिलाफ विरोध का एक मजबूत प्रदर्शन बनकर सामने आई है. CJP के सात दिनों के लगातार विरोध के बाद, सोनम वांगचुक ने 28 जून को अपना अनिश्चितकालीन उपवास शुरू किया. उनके साथ उपवास में छह छात्रा नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हैं: आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा, जेएनएसयू की सहसचिव दानिश, आइसा के उत्तर प्रदेश राज्य अध्यक्ष मनीष, आइसा के दिल्ली यूनिवर्सिटी उपाध्यक्ष दीपक,  जेएनयू के छात्र कार्यकर्ता ऋषिकेश, और AUD छात्र परिषद के पूर्व परिषद सदस्य आमीन. उन्होंने ऐलान किया है कि वे तब तक अपना उपवास जारी रखेंगे जब तक शिक्षा के क्षेत्र में बार-बार आ रहे संकटों के लिए सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता, शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते, NTA खत्म नहीं किया जाता और NEP 2020 को रद्द नहीं किया जाता.

चिलचिलाती गर्मी में हड़ताल जैसे ही अपने तीसरे दिन में पहुंची, भूख हड़ताल करने वालों की शारीरिक हालत बिगड़ने के संकेत दिखने लगे. विरोध स्थल पर किए गए मेडिकल जांच में कई लोगों का ब्लड प्रेशर गिरना, डिहाइड्रेशन, शारीरिक थकावट और शरीर का वजन लगातार कम होना बताया गया, जो अनिश्चितकालीन उपवास के गंभीर तनाव को दिखाता है. बिगड़ती सेहत की स्थिति के बावजूद, भूख हड़ताल करने वालों ने फिर से कहा कि वे अपने संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे. वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण 30 जून को प्रतिवाद स्थल पर गए और भूख हड़ताल करने वालों के साथ एकजुटता दिखाई. अनशन पर बैठे आइसा कार्यकर्ताओं से बात करते हुए, उन्होंने कहा कि लोकतंत्र  की रक्षा करने और तानाशाही सरकार से जवाबदेही की मांग करने के लिए बहुत हिम्मत और त्याग की जरूरत है. एक गैर-जिम्मेदार और तानाशाही शासन के खिलाफ उनका संघर्ष देश भर की लोकतांत्रिक ताकतों के लिए प्रेरणा दे रहा है.

इस आंदोलन को उन छात्रों, शिक्षकों, युवाओं और लोकतांत्रिक जमातों का लगातार समर्थन मिल रहा है, जो सार्वजनिक शिक्षा में बढ़ते संकट के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को जवाबदेह ठहराने की मांगों के पीछे एकजुट हुए हैं. इस प्रतिवाद ने नई शिक्षा नीति 2020, NTA और शिक्षा व्यवस्था  के बढ़ते केन्द्रीकरण और व्यवसायीकरण के जरिए सुलभ, समान और लोकतांत्रिक शिक्षा पर भाजपा सरकार के सुनियोजित हमले को कड़ी चुनौती दी है.

इससे पहले, 25 जून को, अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) समेत महिला संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जंतर-मंतर प्रतिवाद स्थल का दौरा किया और भ्रष्टाचार और सार्वजनिक शिक्षा को योजनाबद्ध तरीके से खत्म करने के खिलाफ छात्रों और युवाओं के संघर्ष के साथ एकजुटता दिखाई. ऐपवा की राष्ट्रीय सचिव काॅमरेड श्वेता राज ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के उस हालिया बयान की कड़ी निंदा की जिसमें उन्होंने विरोध कर रहे छात्रों को ‘देशद्रोहियों की बी-टीम’ कहा. कहा कि देश की राष्ट्रीय राजधानी के एक स्कूल में 3 साल की बच्ची के साथ रेप हुआ, फिर भी धर्मेंद्र प्रधान ने एक भी बयान जारी नहीं किया. आज कई छात्र पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं; उनकी संस्थागत हत्या की जा रही है, और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस पर चुप हैं. भाजपा के राज में छात्रों की संस्थागत हत्या जारी है, जो बहुत शर्मनाक है. ऐपवा ने सीजेपी नेता अभिजीत दीपके और आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष काॅमरेड नेहा को सावित्रीबाई फुले की तस्वीरें भेंट की.

21 जून को, ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) की नेता और जेएनएसयू की पूर्व अध्यक्ष काॅमरेड सुचेता डे ने भी बार-बार परीक्षा लीक और भारत के युवाओं के साथ धोखाधड़ी करनेवाले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के साथ एकजुटता दिखाई. अपने बुनियादी अधिकारों के लिए मानेसर और नोएडा में मजदूरों के हाल के संघर्षों का जिक्र करते हुए, उन्होंने जोर दिया कि छात्रा भी न्याय, जवाबदेही और अपने भविष्य के लिए लड़ रहे हैं.

पहली जुलाई को भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य भी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र-युवा आंदोलन के समर्थन में पहुंचे. भाकपा(माले) के दिल्ली राज्य सचिव का. रवि राय और अगिआंव (बिहार) के पूर्व विधायक मनोज मंजिल भी उनके साथ थे. उन्होंने उनके संघर्ष के प्रति एकजुटता जताते हुए कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था गहरे संकट से गुजर रही है और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक तथा शैक्षणिक अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए. और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा देना चाहिए.

अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय नेताओं – ईयवरी प्रसाद कुशवाहा, महानंद सिंह (पूर्व विधायक, अरवल बिहार) आदि ने भी अनशनकारियों से मुलाकात कर एकजुटता प्रकट की. भूख हड़ताल के समर्थन में उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार समेत देश के विभिन्न हिस्सों में भाकपा(माले), आइसा व आरवाइए कार्यकर्ताओं ने लगातार कार्यक्रम आयोजित किए हैं.




04 July, 2026