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लोगों के मताधिकार छीने जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका

लोगों के मताधिकार छीने जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका

26 जून को कोलकाता प्रेस क्लब में हुई एक प्रेस वार्ता में, भाकपा(माले) ने एक जनहित याचिका के जरिए – जिसमें उन लाखों लोगों के मताधिकार को बहाल करने की मांग की गई है, जिनके नाम के एसआइआर के दौरान मतदाता सूची से विलोपित या स्थगित कर दिए गए हैं – कलकत्ता हाईकोर्ट जाने के अपने फैसले की घोषणा की. मताधिकार वापस पाने की मांग करने वालों के 20,000 हस्ताक्षर युक्त आवेदनों को जुलाई माह में एक प्रतिनिधिमंडल के जरिए मुख्य न्यायाधीश को भी सौंपा जाएगा.

बिहार के बाद, मोदी सरकार ने लोगों के मताधिकार छीनने की एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश के तहत विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के जरिए एसआइआर कराया. इससे लगभग 91 लाख मतदाता प्रभावित हुए हैं, जिनमें से लगभग 66 लाख मतदाताओं को या तो मतदान सूची से हटा दिया गया है या ‘तार्किक गड़बड़ी’ के बहाने स्थगित रखा गया है. हालांकि, विवादित मतदाताओं के दावों की जांच के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट की देखरेख में 19 ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं, लेकिन प्रभावित लोगों को इन ट्रिब्यूनलों की जगह या उनके वोटिंग अधिकार वापस पाने के प्रक्रिया के बारे में बताने का कोई खास प्रयास नहीं किया जा रहा.

भाकपा(माले) ने सभी योग्य मतदाताओं के मताधिकार को तुरत बहाल करने के लिए एक पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया अपनाने की मांग करते हुए कहा कि मतदान के अधिकार पर हमला, नागरिकता पर ही शक पैदा करने और उससे वंचित करने के बढ़ते खतरे से जुड़ा हुआ है. इसलिए, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का बचाव करना संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के बचाव से जुड़ा हुआ है.

प्रेस वार्ता को पार्टी के महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य, राज्य सचिव का. अभिजीत मजूमदार, राज्य कमेटी सदस्य का. रूमा अहेरी और अजय बसाक, वरिष्ठ अधिवक्ता रघुनाथ चक्रवर्ती, और एसआइआर के दौरान मताधिकार खो चुके या ‘विचाराधीन’ रखे गए वोटरों ने संबोधित किया.

का. दीपंकर ने कहा कि अमित शाह के शैतानी 3 डी (डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट) डिजाइन के हिसाब से, एसआइआर की प्रक्रिया में जिन लोगों के मताधिकार चले गए हैं, उन्हें अब राज्य जहां चाहे और जैसे चाहे डिपोर्ट कर सकता है. डिपोर्टेशन के अलावा, डिलीट किए गए वोटर पहले से ही अपने अधिकार खो चुके हैं और उन्हें कभी न खत्म होने वाली परेशानी का सामना करना पड़ रहा है चाहे यह मुफ्त राशन पाने जैसे लाभों से वंचित करना हो या पासपोर्ट रिन्यू करने से मना करना. अब समय आ गया है कि हम सब अपनी आंखों के सामने चल रहे इस बड़े नागरिक और मानवीय संकट के प्रति सचेत हों.

04 July, 2026