उत्तर प्रदेश के आदिवासी अंचलों, खासकर मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली के नौगढ़ में, आदिवासियों व अन्य परंपरागत वन निवासियों के भूमि और वन अधिकारों पर सरकार, वन विभाग और भूमि व वन माफिया गठजोड़ हमलावर है. इन इलाकों के आदिवासी गरीबों पर दमनकारी बुलडोजर कार्रवाई चल रही है. भाकपा(माले) लगातार इस दमनकारी बुल्डोजर के विरुद्ध तथा आदिवासियों-गरीबों के भूमि और वन अधिकारों के लिए चल रहे संघर्षों का नेतृत्व कर रही है. इन्हीं वजहों से भाकपा(माले) नेता सरकार व प्रशासन के निशाने पर रहते रहे हैं.
भाकपा(माले) उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव कॉमरेड सुधाकर यादव और स्टेट स्टैंडिंग कमेटी सदस्य व मिर्जापुर की जिला सचिव कॉमरेड जीरा भारती को 3 जनवरी 2026 को दोपहर बाद लगभग साढ़े तीन बजे मिर्जापुर जिले के अदलहाट में मिर्जापुर पुलिस की एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) ने गिरफ्तार कर लिया. दोनों नेता वाराणसी में एक दिवंगत पार्टी सदस्य के अंतिम संस्कार से लौट रहे थे.
गिरफ्तारी के समय और गिरफ्तार करने के बाद पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा महिला नेता कॉमरेड जीरा भारती के साथ की गई मारपीट के कारण उन्हें चोटें भी आईं. गिरफ्तारी के समय मिर्जापुर जिले के डीएम, एसपी और अन्य अधिकारी फोन ही नहीं रिसीव कर रहे थे, जिससे उन लोगों को गिरफ्तारी के बाद कहां ले जाया गया है, पता ही नहीं चल पा रहा था. लगभग 24 घंटे तक गैर जानकारी की स्थिति रही.
भाकपा(माले) नेताओं की गिरफ्तारी लालगंज थाने के तेंदुआ खुर्द गांव में बुल्डोजर कार्रवाई का ग्रामीणों द्वारा किए गए प्रतिरोध मामले में वन विभाग की ओर से दर्ज मुकदमे में की गई. उक्त मामले में कॉमरेड जीरा भारती को तो नामजद किया गया है, लेकिन राज्य सचिव कॉमरेड सुधाकर यादव का नाम एफआईआर में नहीं है. एफआईआर में दर्ज पचास अज्ञात लोगों में भाकपा(माले) राज्य सचिव को भी प्रशासन द्वारा फंसा दिया गया. दोनों ही नेता घटनास्थल पर नहीं थे, लेकिन आदिवासियों व गरीबों को उजाड़ने की कार्रवाई के विरुद्ध चल रहे आंदोलनों का नेतृत्व करने की वजह से इन्हें टारगेट किया गया है. एफआईआर भी उनकी गिरफ्तारी के 15 मिनट बाद दर्ज की गई.
दूसरे दिन स्टेट कमेटी की एक टीम, जिसमें केन्द्रीय कमेटी सदस्य ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा, स्टेट स्टैंडिंग कमिटी सदस्य ओमप्रकाश सिंह, रामप्यारे राम और अनिल पासवान थे, मिर्जापुर पहुंची. दूसरे दिन भी डीएम और एसपी पार्टी नेताओं से मिलने व बात करने से बचते रहे, काफी प्रयास के बाद इन अधिकारियों ने बताया कि दोनों नेताओं को गिरफ्तारी के दिन ही देर शाम तक जेल भेज दिया गया था. भाकपा(माले) टीम ने तेंदुआ खुर्द गांव का भी दौरा किया और ग्रामीणों से बातचीत की. नेताओं ने जेल में जाकर पार्टी नेताओं एवं बंद गांववासियों से भी मुलाकात की. वहां कॉमरेड जीरा भारती ने बताया कि जेल में भी उनको टारगेट किया जा रहा है और उत्पीड़न किया जा रहा है, जिसके संबंध में जेल अधिकारियों से बात की गई.
मिर्जापुर जिले के लालगंज थाने के तेंदुआ खुर्द गांव में कोल, धरिकार समाज के लोग चार पीढ़ियों से आबाद हैं और खेतीबाड़ी करके जीवन यापन करते हैं. वहां कई ग्रामीणों को आवासीय पट्टा भी मिला हुआ है. कोल आदिवासी हैं, लेकिन लगातार मांग करने के बावजूद उत्तर प्रदेश में उन्हें जनजाति (एसटी) का दर्जा नहीं दिया जा रहा है. वन विभाग लम्बे समय से उन्हें उनके घरों व खेतों से बेदखल करने की कोशिश कर रहा है और सरकार व प्रशासन इस कृत्य में वन विभाग के साथ खड़ा रहता है.
लगभग डेढ़ माह पूर्व वन विभाग के अधिकारियों ने तेंदुआ खुर्द गांव में जाकर आदिवासियों व गरीबों के खेतों, जिनमें गेंहू व सरसों की फसल बोई गई है, में जेसीबी से गड्डा खोदना शुरू किया. ग्रामीणों ने विरोध किया और भाकपा(माले) मिर्जापुर की जिला सचिव कॉमरेड जीरा भारती ने मौके पर पहुंचकर उसे रोक दिया. उस समय तो वन अधिकारी वापस चले गए, लेकिन जब उन्होंने पुनः प्रयास किया तो दिसंबर महीने के मध्य में लालगंज तहसील पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया. ध्रने पर राजस्व विभाग व प्रशासन के साथ वन अधिकारी पहुंचे. पार्टी नेताओं व धरनारत ग्रामीणों से बातचीत किए. वन अधिकारी, राजस्व अधिकारियों ने कहा कि 15 दिनों में राजस्व विभाग और वन विभाग के बीच तेंदुआ खुर्द के ग्रामीणों की जमीनों को लेकर विवाद खत्म कर दिया जाएगा और राजस्व विभाग लिख कर दे देगा कि आदिवासी गरीब जिन जमीनों पर काबिज हैं, वह राजस्व विभाग की है न कि वन विभाग की. इस समझौते के साथ बुल्डोजर कार्रवाई पर रोक लगा दी गई.
02 जनवरी 2026 को मंडलायुक्त विध्यांचल (मिर्जापुर) के कार्यालय पर तेंदुआ खुर्द, मतवार व अन्य गांवों में जारी बुल्डोजर कार्रवाई के विरुद्ध भाकपा(माले) ने प्रदर्शन किया. एडिशनल कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि बुल्डोजर नहीं चलेगा. लेकिन 2-3 जनवरी 2026 की रात में लगभग दो बजे वन विभाग के अधिकारी लगभग डेढ़ सौ लोगों व सात जेसीबी के साथ पहुंचे. उसमें कुछ दबंग व लम्पट किस्म के व्यक्ति भी शामिल थे. फॉरेस्ट गार्ड एवं उसके साथ पहुंचे लोगों ने घरों में घुसकर महिलाओं को घसीटना शुरू किया. एक महिला का हाथ तोड़ दिया तो दूसरी महिला की छाती पर गम्भीर चोटें आईं. 15-16 वर्ष की एक लड़की की जांघों पर गम्भीर चोट पहुंचाया और दूसरी को उठाकर जमीन पर पटक दिया. इससे अफरा-तफरी मची और जब ग्रामीणों ने संगठित होकर प्रतिरोध किया, तो वन अधिकारी व उनके लंपट वापस भागे.
इसी मामले में वन विभाग की तहरीर पर पुलिस द्वारा उपरोक्त एफआईआर संख्या 04/2026 (दिनांक 03-01-2026, थाना लालगंज, जिला मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश) दर्ज की गई है. इसमें लगाई गई धाराएं हैं : 221, 352, 351(3), 324(5), 121(1), 132, 191(2), 191(3), 109(1) बीएनएस व धारा 5 व 26 वन अधिनियम एवं 7-सीएल एक्ट. लगाई गई गम्भीर अपराधिक धाराओं में, हत्या के प्रयास की धारा भी है. चूंकि राज्य सचिव नामजद नहीं थे और उनके विरुद्ध कोई मामला नहीं बन पा रहा था, तो पुलिस ने दौरान विवेचना आपराधिक षड्यंत्र करने की धारा 61(2) बीएनएस जोड़ दी.
पार्टी ने इस दमनकारी बुल्डोजर कार्रवाई एवं पार्टी नेताओं व गरीब ग्रामीणों की गिरफ्तारी के विरुद्ध 6 जनवरी 2026 को राज्यव्यापी प्रतिवाद किया, जिसमें अन्य प्रमुख वामपंथी दलों (सीपीआई, सीपीएम व फारवर्ड ब्लॉक) ने भी जगह-जगह भागीदारी की.
दरअसल मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली के आदिवासी अंचलों में आदिवासियों व अन्य परंपरागत वन निवासियों को अपने भूमि अधिकार एवं वनाधिकार बचाने के लिए दोतरफा संघर्ष करना पड़ रहा है. एक तरफ बाहर से आए गैर आदिवासी दबंगों, माफियाओं द्वारा आदिवासियों की पुश्तैनी जमीनों, वनोपज व खनिज संपदा पर एक-एक करके कब्जा किया जा रहा है तो दूसरी ओर शासन-प्रशासन व वन विभाग लगातार आदिवासियों-गरीबों को उजाड़ने के अभियान में लगा हुआ है. सरकार, प्रशासन और वन विभाग द्वारा भूमाफियाओं और वन माफियाओं को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है.
पीछे मुड़कर देखें तो अभी कुछ वर्ष पहले ही सोनभद्र के उम्भा (घोरावल) में भूमाफियाओं ने आदिवासियों की जमीनों को कब्जा करने की कोशिश की थी. प्रतिरोध करने पर आदिवासियों का जनसंहार किया था जिसमें लगभग दर्जन भर आदिवासी मारे गए थे. इधर सोनभद्र में पावर प्लांट के नाम पर बड़े पैमाने पर आदिवासियों को उजाड़ने और उनकी पुश्तैनी जमीनों पर कॉरपोरेट घरानों को कब्जा कराने की कार्रवाई हो रही है. लम्बे संघर्षों के बाद सोनभद्र के आदिवासी क्षेत्रों में सर्वे सेटिलमेंट योजना आई थी, किन्तु उसके जरिए आदिवासियों का नाम उनके द्वारा इस्तेमाल की जा रही जमीन पर दर्ज करने की बजाय भूमाफियाओं ने सरकारी अमले को प्रभाव में लेकर उनकी तमाम जमीनें अपने नाम करा लीं और उस पर कब्जे को लेकर हिंसक झड़पें होती रहती हैं.
अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी अधिनियम (वनाधिकार कानून) आदिवासियों व अन्य वन निवासियों को उनकी जमीनों का पट्टा दिलाने की योजना की बजाय उन्हें उजाड़ने की योजना बन गई है. तीनों ही जिलों में इसके तहत दाखिल आवेदनों में से अधिकांश को खारिज कर दिया गया है और आदिवासियों को उनकी पुश्तैनी जमीनों पर अवैध अतिक्रमणकारी घोषित कर उनके ऊपर बुल्डोजर कार्रवाई की जा रही है. समग्रता में कहें, तो देश के आदिवासी अंचलों की तरह ही उत्तर प्रदेश के इन इलाकों में भी जंगल, जमीन और खनिज संपदा पर कॉरपोरेट घरानों की गिद्ध दृष्टि लगी हुई है. सरकार व उसका प्रशासन वन अधिकारियों से मिलकर लूट की इस परियोजना में कॉरपोरेट घरानों व भूमि व वन माफियाओं की मदद कर रहा है.
चंदौली के नौगढ़ में भी लगातार आंदोलन चल रहा है और विगत 9 जनवरी 2026 को वहां आक्रोशपूर्ण लाठी मार्च भी किया गया. तेंदुआ खुर्द गांव में की जा रही बुल्डोजर कार्रवाई उसी की एक कड़ी है, जिसके विरुद्ध प्रतिरोध के चलते भाकपा(माले) उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव कॉमरेड सुधाकर यादव और मिर्जापुर की जिला सचिव कॉमरेड जीरा भारती व पांच ग्रामीण जेल में बंद हैं.
सांसद सुदामा प्रसाद का मिर्जापुर दौरा
11-12 जनवरी को आरा से भाकपा(माले) सांसद कॉमरेड सुदामा प्रसाद ने मिर्जापुर जाकर प्रभावित गांवों का दौरा किया, दमन के शिकार आदिवासियों और ग्रामवासियों से मुलाकात की. उन्होंने जेल जाकर बंद पार्टी नेताओं व ग्रामीणों से भी मुलाकात की. भाकपा(माले) सांसद ने जिलाधिकारी मिर्जापुर को शिकायत व मांग पत्र देकर अपना विरोध दर्ज कराया.
सांसद ने मांग की कि जेल में बंद भाकपा(माले) नेताओं व ग्रामीणों को बिना शर्त रिहा कर फर्जी मुकदमा (एफआईआर संख्या 04/2026) वापस लिया जाए, गरीबों की जमीनों व वन अधिकारों पर वन विभाग व प्रशासन बुलडोजर चलाना बंद करे, जो जहां पर जोत रहा हो, उस जमीन पर गरीबों को अधिकार दिया जाए, महिला नेता जीरा भारती से मारपीट करने वाले पुरूष पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, तेंदुआ खुर्द में महिलाओं पर हमला करने वाले वनकर्मियों व लंपट तत्वों पर मुकदमा दर्ज किया जाए और भूमाफियाओं के अवैध कब्जे की जमीनें मुक्त कराई जाएं.
दौरे के अंत में सांसद ने प्रेसवार्ता कर कहा कि उन्हें ग्रामीणों ने बताया कि जंगल विभाग और भू माफियाओं ने मिलीभगत कर कत्था व चंदन का सारा जंगल कटवा कर अवैध लूट का अड्डा बना दिया. वन विभाग हर जमीन को चाहे वह सीलिंग की हो, राजस्व विभाग या पट्टे की हो, अपना बताकर उजाड़ रहा है. पट्टा रद्द बताकर मतवार, नदना गांवों में दबंग कब्जा करके भूमि लूट का अभियान चला रहे हैं. भूमाफियाओं का गांवों में सैकड़ों एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है. उन्हें नहीं हटा रहे.
सांसद ने कहा कि बुलडोजर कार्रवाई से प्रभावित गांवों के दौरे की अनुमति देने को लेकर प्रशासन ने परेशान किया. भाकपा(माले) की मिर्जापुर जिला कमेटी के सदस्य भक्तप्रकाश श्रीवास्तव सहित कई नेताओं को उनके दौरे के दिन हाउस अरेस्ट कर दिया गया. वन विभाग वालों ने पेशे से पत्रकार मंजय वर्मा की भी जमीन खोद दी, उनकी बेटियों और घर की महिलाओं को मारा-पीटा. कुछ दिन पहले भी, भाकपा(माले) जिला सचिव जीरा भारती से मिर्जापुर शहर में राह चलते नगर सीओ ने बदसलूकी की थी. भाकपा(माले) राज्य स्थायी समिति के एक अन्य सदस्य सुरेश कोल पर हाथ चलाया था. विपक्ष और खासकर वामपंथी नेताओं के साथ बदसलूकी आम परिघटना बन गई है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी पर दर्ज 23 मुकदमें वापस हो सकते हैं, तो माले नेताओं को रिहाई क्यों नहीं मिल रही है?
सूचना के बावजूद प्रोटोकॉल को धता बताते हुए डीएम मिर्जापुर की ओर से मुलाकात का समय न देने को सांसद ने गरीब जनता का अपमान बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में तानाशाही की सरकार चल रही है.
आगामी प्रतिवाद कार्यक्रम
पार्टी ने राजधानी लखनऊ में 15 जनवरी को दमन-विरोधी कन्वेंशन और 28 जनवरी को मिर्जापुर में दमनकारी बुलडोजर राज के विरुद्ध एवं आदिवासियों-गरीबों के भूमि व वन अधिकारों के लिए बड़ी प्रतिरोध सभा करने का एलान किया है.
– ओमप्रकाश सिंह
लखनऊ कन्वेंशन : बुलडोजर राज के खिलाफ एकजुट संघर्ष का आह्वान
मिर्जापुर जिले में गरीबों-आदिवासियों की पुश्तैनी जमीनों पर बुलडोजर कार्रवाई कर बेदखल करने की कोशिश की जा रही है. उनके भूमि व वनाधिकार के आंदोलन पर दमन हुआ और आंदोलन के नेताओं को फर्जी मुकदमे लगाकर जेल भेजा गया. तेंदुआ खुर्द गांव में बुलडोजर चलना कोई अलग-थलग घटना नहीं है. बुलडोजर पूरे प्रदेश में गरीबों के खिलाफ चल रहा है. मुस्लिमों के धार्मिक-शैक्षिक संस्थाओं, मजारों पर भी बुलडोजर चल रहा है. बुलडोजर राज के खिलाफ सभी लोकतांत्रिक शक्तियों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा.
यह बात 15 जनवरी. 2025 को उत्तर प्रदेश की राजधनी लखनऊ में हजरतगंज स्थित यूपी प्रेस क्लब के सभागार में दमन-विरोधी कन्वेंशन की अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और भाकपा(माले) के वरिष्ठ नेता जयप्रकाश नारायण ने कही. भूमि व वनाधिकार के लिए बुलडोजर राज के खिलाफ कन्वेंशन का आयोजन भाकपा(माले) की राज्य इकाई ने किया था.
कन्वेंशन को मुख्य वक्ता के रुप में संबोधित करते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और दलित बुद्धिजीवी रविकांत चंदन ने कहा कि जिन शब्दावलियों के जरिए सांप्रदायिक फासीवाद अपने को छुपाने की कोशिश कर रहा उसे अब जनता जान चुकी है. तमाम विषमताओं के बावजूद जनता अपने सवालों पर एकजुट हो रही है. सरकारी संस्थाओं का दुरूपयोग करके यह प्रतिरोध की हर आवाज को दबाना चाह रही है. इसके खिलाफ व्यापक जनता को हमें जागरूक करना होगा.
भाकपा(माले) के पोलित ब्यूरो सदस्य रामजी राय ने कहा कि मोदी-योगी सरकार विकास की बात करते हुए विनाश का विकास कर रही है. जंगल-पहाड़ की रक्षा करने वाले आदिवासी व पहाड़ी समुदायों का विनाश पर्यावरण व जलवायु संरक्षण के लिए भी खतरा है.
ऐपवा प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने कहा कि संविधान बचाने के लिए संघर्षरत शक्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई हो रही है. जिन लोगों ने आजादी के आन्दोलन में भागेदारी नहीं की, मोदी उनकी मूर्तियां स्थापित कर रहे हैं. योगी सरकार तराई में संक्रमणीय किसानों की भूमि छीन रही है.
जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कौशल किशोर ने कहा कि जन आंदोलनों को अपराध और विकास-विरोध के रूप में पेश किया जाता है. उन्होंने सांस्कृतिक और वैचारिक प्रतिरोध की जरूरत पर जोर दिया.
कन्वेंशन को भाकपा राज्य काउंसिल के सदस्य परमानंद और फॉरवर्ड ब्लॉक की राज्य सचिव डॉ. आरती ने भी संबोधित किया. संचालन भाकपा(माले) के लखनऊ जिला प्रभारी रमेश सेंगर ने किया. कन्वेंशन में लखनऊ के अलावा सीतापुर, लखीमपुर खीरी, कानपुर, जालौन, अयोध्या, बस्ती, गोंडा, उन्नाव, हरदोई व हमीरपुर जिलों से आये लोगों ने भाग लिया.
कन्वेंशन से चार प्रस्ताव पारित किए गए. एक प्रस्ताव में वन व भूमाफिया को संरक्षण और गरीबों पर बुल्डोजर नीति का विरोध किया गया और वनाधिकार कानून पर अमल करने और जंगल, जमीन व वनोपज पर आदिवासियों-वनवासियों को अधिकार देने की मांग की गई. प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में ग्राम समाज, बंजर, परती की भूमि पर आबाद गरीबों को उजाड़ने की कार्रवाई तत्काल रोकने, ऐसी जमीनों को उन्हें विनियमित करने और नागरिकों के आश्रय व आजीविका के अधिकार की रक्षा करने की भी मांग की गई. अल्पसंख्यकों की धार्मिक व शैक्षिक संस्थाओं, मजारों आदि पर बुल्डोजर कार्रवाई का विरोध किया गया.
दूसरे प्रस्ताव में भाकपा(माले) के प्रदेश राज्य सचिव सुधाकर यादव और मिर्जापुर जिला सचिव जीरा भारती को, गरीबों-आदिवासियों के भूमि व वनाधिकार की रक्षा के लिए आंदोलन का नेतृत्व करने के कारण, हत्या के प्रयास जैसी संगीन आपराधिक धाराओं में फर्जी मुकदमा दर्ज कर मिर्जापुर जेल भेजने को प्रदेश सरकार की अलोकतांत्रिक व दमनकारी कार्रवाई बताते हुए कड़े शब्दों में निंदा की गई.
प्रस्ताव में मिर्जापुर के लालगंज थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 04/2026, दिनांक 3-1-2026, जिसमें भाकपा(माले) नेताओं और ग्रामीणों की गिरफ्तारियां हुईं, को निरस्त करने और सभी की रिहाई की मांग की गई.
तीसरे प्रस्ताव में मिर्जापुर में तेंदुआ खुर्द गांव में 2/3 जनवरी की रात दो बजे सैंकड़ों वनकर्मियों द्वारा जेसीबी के साथ हमला करने और घरों में घुसकर महिलाओं से बदसलूकी व मारपीट करने की घटना में घायल महिलाओं व ग्रामीणों की तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर वनकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई. इसी के साथ, महिला नेता व जिला सचिव जीरा भारती को गत तीन जनवरी को गिरफ्तार करने के बाद उन्हें मारने-पीटने व अपमानित करने वाले पुरूष पुलिसकर्मियों को दंडित करने की मांग भी की गई.
चौथे व अंतिम प्रस्ताव में मिर्जापुर में भाकपा(माले) व वाम दलों के नेताओं-कार्यकर्ताओं को उनके घरों पर पुलिस भेजकर कई दिनों तक नजरबंद (हाउस अरेस्ट) करने, कार्यकर्ताओं के परिवार वालों को परेशान करने और भय व आतंक का माहौल बनाने को लोकतंत्र का हरण और तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई बताया गया. प्रस्ताव में नजरबंदियों पर रोक लगाने, व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता का सम्मान करने और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक गतिविधियों के लिए सामान्य माहौल बनाने की मांग की गई.