वर्ष 35 / अंक - 27 / का. नंदकिशोर प्रसाद (जमुना जी) को लाल सलाम!

का. नंदकिशोर प्रसाद (जमुना जी) को लाल सलाम!

का. नंदकिशोर प्रसाद (जमुना जी) को लाल सलाम!

भाकपा (माले) के वरिष्ठ नेता, पूर्व बिहार राज्य सचिव तथा लंबे समय तक पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य रहे काॅमरेड नंदकिशोर प्रसाद (जमुना जी) का 19 जून 2026 की रात्रि में पटना के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया. वे 27 मई को हुई सांस की गंभीर शिकायत और ब्रेन हेमरेज  के बाद उत्पन्न जटिलताओं के कारण उपचाराधीन थे. चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई और अंततः उन्हें बचाया नहीं जा सका. आगामी 9 अगस्त को वे 79 वर्ष के होने वाले थे.

काॅमरेड नंदकिशोर प्रसाद का जन्म 9 अगस्त 1947 को तत्कालीन शाहाबाद जिले (वर्तमान रोहतास) में हुआ था. आरा के जैन काॅलेज में अध्ययन के दौरान देश में नक्सलबाड़ी विद्रोह की गूंज और भोजपुर के एकवारी क्षेत्र में दलितों, गरीबों तथा पिछड़ों के उभरते संघर्षों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया. मास्टर जगदीश, रामनरेश राम और रामेश्वर यादव जैसे नेताओं के नेतृत्व में चल रहे आंदोलनों ने उनके जीवन की दिशा तय की.

14 अप्रैल 1969 को आरा के रमना मैदान में आयोजित ऐतिहासिक ‘हरिजनिस्तान बनाओ’ रैली की तैयारी में उन्होंने लताफत हुसैन, प्रभुलाल पासवान और अन्य साथियों के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन शोषितों, वंचितों और मेहनतकश जनता की मुक्ति के संघर्ष को समर्पित कर दिया.

काॅमरेड नंदकिशेर प्रसाद बिहार में भाकपा (माले) की संस्थापक पीढ़ी के प्रमुख नेताओं में से थे. उन्होंने का. जौहर, का. विनोद मिश्र और का. रामनरेश राम के नेतृत्व में भोजपुर के किसान आंदोलन को संगठित किया, दलित-भूमिहीन बस्तियों में रहकर काम किया और बाद में पटना ग्रामीण क्षेत्र में पार्टी के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 4 मार्च 1977 को मसौढ़ी में पार्टी के वरिष्ठ नेता काॅमरेड पवन शर्मा और एक अन्य साथी के साथ उन्हें पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया. जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने भोजपुर के जगदीशपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में संगठन निर्माण का कार्य जारी रखा.

पार्टी के शुद्धीकरण आंदोलन के बाद उन्हें 1983 में उत्तर-पश्चिम बिहार में संगठन की जिम्मेदारी सौंपी गई. उन्होंने लंबे समय तक चंपारण, सिवान, गोपालगंज, सारण और आसपास के जिलों में पार्टी कामकाज का संचालन किया और आगे चलकर वे इन जिलों को लेकर गठित उत्तर-पश्चिम बिहार आंचलिक कमिटी के लंबे समय तक सचिव रहे. 1980 और 1990 के दशकों में इस पूरे क्षेत्र में दलित-गरीबों के राजनीतिक उभार, जनसंघर्षों के विस्तार और पार्टी के जनाधार निर्माण में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही. उनके नेतृत्व में सिवान भाकपा (माले) आंदोलन का एक मजबूत केंद्र बनकर उभरा. 1995 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने सिवान जिले की दो सीटों – दरौली और मैरवा पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की.

उन्होंने अपराध, सामंती वर्चस्व और जनविरोधी ताकतों के खिलाफ संघर्षों का नेतृत्व किया. इसी दौर के अपराध-विरोधी आंदोलन में जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष काॅमरेड चंद्रशेखर व युवा नेता काॅमरेड श्याम नारायण यादव सहित दर्जनों पार्टी नेताओं ने अपनी शहादत दी.

1997 में वाराणसी में आयोजित पार्टी की छठी कांग्रेस में वे केंद्रीय कमिटी में चुने गए और उसके बाद पोलित ब्यूरो में शामिल किए गए. उन्होंने पटना में हुए पार्टी के सातवें महाधिवेशन (25-30 नवंबर 2002) के आयोजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. उसके बाद से उन्होंने पटना ग्रामीण जिले के सचिव के रूप में कार्य किया तथा दलितों, गरीबों और मेहनतकशों पर हो रहे हमलों के खिलाफ संघर्षों का नेतृत्व किया. तमाम दमन और कठिन परिस्थितियों के बावजूद 2005 के विधानसभा चुनाव में भाकपा (माले) ने पालीगंज सीट पर जीत हासिल की.

वर्ष 2006 में वे भाकपा (माले) के बिहार राज्य सचिव निर्वाचित हुए और 2012 तक इस पद पर रहे. उनके कार्यकाल में पार्टी ने कई महत्वपूर्ण जनसंघर्षों को आगे बढ़ाया. वर्ष 2010 के विधानसभा चुनावों के बाद जब पार्टी के सामने कठिन परिस्थितियां पैदा हुईं और बिहार विधानसभा में उसका प्रतिनिधित्व नहीं रहा, तब काॅमरेड नंदकिशोर प्रसाद ने धैर्य, दृढ़ता और राजनीतिक स्पष्टता के साथ पार्टी को उस चुनौतीपूर्ण दौर से उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. राज्य सचिव पद छोड़ने के बाद भी वे मानसा में आयोजित पार्टी के दसवें महाधिवेशन (23-28 मार्च 2018) तक केंद्रीय कमिटी के सदस्य बने रहे और शाहाबाद में पार्टी कामकाज की देखरेख करते रहे. वे जीवन के अंतिम दिनों तक पार्टी गतिविधियों से जुड़े रहे.

पिछले कुछ वर्षों से उनका स्वास्थ्य लगातार कमजोर हो रहा था. कोविड काल के बाद उनकी सक्रियता सीमित हो गई थी. लेकिन, पार्टी और जनआंदोलनों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता कभी कम नहीं हुई. वे मानसिक रूप से हमेशा पार्टी के साथ जुड़े रहे और महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग लेते रहे. 16 से 18 मई 2026 को दरभंगा में आयोजित भाकपा (माले) के 12 वें राज्य सम्मेलन में भी उन्होंने भाग लिया था और तब तक बिहार राज्य कमिटी के सदस्य भी रहे. सम्मेलन के कुछ ही दिनों बाद वे गंभीर रूप से बीमार पड़ गए.

काॅमरेड नंदकिशोर प्रसाद का पूरा परिवार कम्युनिस्ट आंदोलन के प्रति समर्पित रहा है. उनकी पत्नी काॅमरेड बिंदु सिन्हा ने उनके राजनीतिक जीवन के हर उतार-चढ़ाव में उनका साथ दिया. वे अपने पीछे पुत्र सौरभ कुमार व पुत्री साक्षी कुमारी (रोमी) सहित अन्य परिजनों और उनका भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं.

काॅमरेड जमुना जी का स्नेहिल, सरल, अनुशासित और संघर्षशील व्यक्तित्व हजारों कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है. उनका जीवन जनपक्षधर राजनीति, सामाजिक न्याय, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और क्रांतिकारी परिवर्तन के संघर्ष को समर्पित था.

उनका निधन केवल भाकपा (माले) के लिए ही नहीं, बल्कि फासीवाद, अन्याय, शोषण और दमन के खिलाफ जारी जनसंघर्षों के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है. उनकी क्रांतिकारी विरासत, जनता के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और संघर्षपूर्ण जीवन आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा.

भाकपा (माले) राज्य कमिटी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करती है तथा उनके शोक संतप्त परिजनों, मित्रों, शुभचिंतकों के प्रति गहरी  संवेदना व्यक्त करती है.

काॅमरेड नंदकिशोर प्रसाद (जमुना जी) अमर रहें! काॅमरेड नंदकिशोर प्रसाद को लाल सलाम! उनके सपनों का समाज बनाने का संघर्ष जारी रहेगा!

04 July, 2026