वर्ष 35 / अंक - 02 / दलित गरीबों के घरों पर बुलडोजर एक्शन के खिलाफ राज्...

दलित गरीबों के घरों पर बुलडोजर एक्शन के खिलाफ राज्यव्यापी प्रतिवाद

दलित गरीबों के घरों पर बुलडोजर एक्शन के खिलाफ राज्यव्यापी प्रतिवाद

शीतलहरी के बीच दलित गरीबों के घरों पर चलाए जा रहे बुलडोजर एक्शन के खिलाफ अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) एवं अन्य खेत मजदूर संगठनों के आह्वान पर 5 और 6 जनवरी को बिहार में राज्यव्यापी प्रतिवाद हुआ. इस दौरान बिहार के 200 से अधिक अंचलों में जुझारू प्रदर्शन कर बुलडोजर कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई.

भाकपा(माले) से संबद्ध खेग्रामस एवं मनरेगा मजदूर सभा के हजारों कार्यकर्ताओं ने इन प्रदर्शनों में भाग लिया.

पटना जिले के बिक्रम अंचल में आंदोलन की अगुवाई करते हुए खेग्रामस के राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा ने कहा कि आजादी के बाद बिहार पहला राज्य था जिसने वर्ष 1948 में पीपीएच एक्ट बनाकर दर-रैयत और मजदूरों को आवासीय भूमि का अधिकार देने का प्रावधान किया था. बावजूद इसके राज्य में आज भी लगभग 30 प्रतिशत आबादी आवासीय भूमिहीन है, जो इस बात का प्रमाण है कि गरीबों से जुड़े कानूनों को कभी ईमानदारी से लागू नहीं किया गया. उन्होंने मांग की कि जहां-जहां लोग वर्षों से बसे हुए हैं, उनका समुचित सर्वे कराया जाए और उन्हें पर्चा/पट्टा दिया जाए. विकास परियोजनाओं के नाम पर विस्थापित परिवारों के लिए पंचायतों और शहरी वार्डों में मजदूर कॉलोनियां बसाई जाएं. इस मांग पर आगामी बजट सत्र में गांव के दलित गरीबों का जुझारू विधानसभा घेराव किया जाएगा. इस दौरान मनरेगा को पूरी तरह लागू करने और चार श्रम संहिताओं (4 लेबर कोड) को रद्द करने की मांग भी उठी.

सिवान जिले के दरौली अंचल में आंदोलन का नेतृत्व करते हुए खेग्रामस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक सत्यदेव राम ने कहा कि सरकार अडानी-अंबानी जैसे कॉरपोरेट घरानों को जमीन देने के लिए गरीबों को उजाड़ रही है. इस मुद्दे पर सदन में मुख्यमंत्री को घेरा जा चुका है और अब सड़कों पर घेराबंदी की जाएगी. भाजपा को भूमिसुधार सौंप देने से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नहीं बच पाएंगे.

खेग्रामस के राज्य सचिव शत्रुघ्न सहनी ने बताया कि पूरे राज्य के अधिकांश आंचलों में जुझारू प्रदर्शन हुए हैं. सरकार को दलित गरीबों के घर उजाड़ने की कार्रवाई पर तुरंत रोक लगानी होगी. बुलडोजर अभियान ने पैसे देकर महिलाओं का वोट खरीदने की सच्चाई को उजागर कर दिया है. कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी रही.

पालीगंज और दुल्हिन बाजार में आंदोलन की अगुवाई युवा विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि दशकों से बसी दलित बस्तियों को नियमित नहीं किया जाना न्याय और विकास – दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. उन्होंने मुसहर/भुईयां बस्तियों सहित सभी दलित बस्तियों को नियमित करने की मांग की. गोपाल रविदास, बिरेंद्र गुप्ता, उपेंद्र पासवान, प्रदीप कुमार सहित अन्य नेताओं ने राज्यव्यापी प्रदर्शनों का नेतृत्व किया.



10 January, 2026