वर्ष 35 / अंक - 40 / राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ी मछलियों को बचाय...

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ी मछलियों को बचाया गया

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ी मछलियों को बचाया गया

– लाल बहादुर सिंह

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय बंसल और अनिल मिश्रा को साफ पाक बचा लिया गया है. दरअसल प्रधानमंत्री द्वारा गठित राम मंदिर ट्रस्ट का पूरा संचालन आरएसएस के हाथ में था जो चंपत राय और अनिल मिश्रा के द्वारा संपादित किया जा रहा था और मोदी के चहेते अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा इसके सर्वेसर्वा थे. इतना बड़ा घोटाला जो लम्बे समय से चल रहा था, वह इन ताकतवर लोगों की गैर जानकारी में संभव नहीं था. इसीलिए संघ और सरकार इसकी जवाबदेही से बच नहीं सकते.

दरअसल चंदा और बहुमूल्य आभूषणों की चोरी के साथ-साथ और भी कई तरह का भ्रष्टाचार वहां हो रहा था, मसलन जमीन का घोटाला. उदाहरण के लिए जो जमीन दो करोड़ में खरीदी गई, वह उसी दिन बीस करोड़ रुपए में ट्रस्ट को बेच दी गई! इसी तरह वहां हो रहे निर्माण कार्य पर 40% कमीशन वसूला जा रहा था. जाहिर है यह सब कुछ ट्रस्ट के ताकतवर पदाधिकारियों की जानकारी और मिलीभगत के बिना संभव नहीं था. इस घोटाले के पर्दाफाश ने आरएसएस और भाजपा के चाल चरित्र और चेहरे को बेनकाब कर दिया है.

अब एसआटी द्वारा दाखिल 74000 पेज की भारी-भरकम चार्जशीट 8 छोटे कर्मचारियों के खिलाफ दायर की गई है. इसमें चंपत राय और अनिल मिश्रा दोनों को 133 गवाहों में शामिल कर लिया गया है. यह साफ है कि बड़ी मछलियों को बचा लिया गया है और छोटी मछलियों की बलि चढ़ा दी गई है. लोगों का यह मानना है कि जिसे प्रधानमंत्री के खासम खास नौकरशाह नृपेंद्र मिश्र ने चोरी नहीं बल्कि डकैती की संज्ञा दी थी, वह ट्रस्ट के उच्च पदस्थ लोगों की जानकारी के बिना संभव नहीं थी. यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं है बल्कि सैकड़ों करोड़ रूपये की तथा चढ़ावे की बहुमूल्य वस्तुओं की महीनों से जारी चोरी का मामला है. ट्रस्ट के एक अन्य सदस्य कृष्ण मोहन को भी जिन्होंने चोरी को सबसे पहले उजागर किया था और शिकायत दर्ज कराई थी तथा विस्तारित बैठकों के कमोबेश स्थायी सदस्य गोपाल राव को भी गवाह बनाया गया है. चार्जशीट में कहा गया है कि चंपत राय जब अयोध्या से दिल्ली की यात्रा कर रहे थे तब यह मामला सबसे पहले उनके संज्ञान में लाया गया था. उस समय उन्हें वीडियो भेजा गया जिसमें चंदे की गिनती करने वाला स्टाफ चोरी कर रहा है. बाथरूम में भी चोरी का पैसा पाया गया. बहरहाल इस पूरे प्रकरण ने हिंदुओं की आस्था को जबरदस्त चोट पहुंचाई है.

मोदी समेत भाजपा का उच्च नेतृत्व इस मामले पर चुप है. आरएसएस के सर कार्यवाह ने कहा है कि इस दुर्भाग्यपूर्ण प्रकरण का इस्तेमाल हिंदू धर्म को बदनाम करने की साजिश के बतौर किया जा रहा है. उन्होंने ऐसे हिंदू विरोधी, राष्ट्र विरोधी तत्वों से सावधान रहने का आह्वान किया है.

प्रेक्षकों का मानना है कि आरएसएस के लिए गांधी की हत्या के बाद राम मंदिर में चढ़ावा चोरी दूसरा सर्वाधिक बदनामी वाला क्षण है जिसने सबसे ज्यादा उनके समर्थकों को निराश किया है. बताया जा रहा कि चंदा चोरी का प्रकरण उजागर होने के बाद से दर्शनार्थियों की संख्या और चढ़ावा की मात्रा काफी कम हो गई है. चुनावी वर्ष में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए राम जन्म भूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी और भ्रष्टाचार के दूसरे मामलों के पर्दाफाश के गम्भीर निहितार्थ हैं. उन्होंने मामले की जांच के लिए एक एसआइटी बनाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली. दरअसल आपराधिक मामले में पहले एफआइआर दर्ज होनी चाहिए थी. लेकिन इस मामले में पहले एसआइटी गठित हो गई, एफआइआर उसके बाद दर्ज हुई. यह जानना भी रोचक है कि चोरी मामले का सबसे पहले भंडाफोड़ ट्रस्ट के ही कर्मचारी महिपाल सिंह ने किया जिसे बाद में बर्खास्त कर दिया गया.

जाहिर है चढ़ावा चोरी से रामभक्तों की आस्था पर जो चोट पहुंची है उसकी भरपाई  होने वाली नहीं है. इनमें से अधिकांश भाजपा के समर्थक और मतदाता हैं. विपक्ष इसको बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने में सफल हुआ तो भाजपा को चुनाव में इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा.

03 October, 2026