HPGCL (हरियाणा) एवं AMR इंडिया लिमिटेड (हैदराबाद) के खिलाफ आंदोलन
संताल परगना प्रमंडल (झारखंड) के अंतर्गत शिकारीपाड़ा प्रखंड (दुमका जिला) के 11 गांवों में कोल टेस्टिंग के खिलाफ ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और विस्थापित ग्रामीणों का आंदोलन चल रहा है.
6 सितंबर 2026 को भाकपा(माले) पोलित ब्यूरो सदस्य का. हलधर महतो, केंद्रीय कमेटी सदस्य का. गीता मंडल व आरडी मांझी, आदिवासी संघर्ष मोर्चा के नेता का. देवकीनंदन बेदिया, अखिल भारतीय किसान महासभा केंद्रीय कमेटी सदस्य का. पुरन महतो, ऐपवा नेत्री का. पूनम महतो व दुमका जिला सचिव का. भुंदा बास्के की अगुआई में भाकपा(माले) की एक उच्चस्तरीय टीम ने इन गांवों का सघन दौरा किया.
भाकपा(माले) की टीम सबसे पहले शिकारीपाड़ा के तेलंगापाड़ा गांव पहुंची जहां सैकड़ो ग्रामीण महिला-पुरुष गांव के एक वट वृक्ष के नीचे जमा हुए. लगभग 10 गांवों के ग्रामीण आदिवासियों की इस जुटान में चर्चा शुरू की गई.
विदित हो कि शिकारीपाड़ा प्रखंड के तेलंगापाडा, बादलपाडा, कल्याणपुर, खड़ीजोल, खड़ीपहाड, आमडाकुंडा, नीमटोला, मासतारा, सरायबिंधा, रसवाला, लुटिया पहाड़, फूलशहरी बांसपड़ी बांसपहाडी, हीरापुर, बांकीजोर आदि गांवों में हो रहे कोलटेस्टिंग ग्रामीणों द्वारा विरोध किया जा रहा है. कोल टेस्टिंग का यह काम शिकारीपाड़ा अंचलाधिकारी और स्थानीय पुलिस प्रशासन के द्वारा जबरन किया जा रहा है. जिन किसानों की जमीन पर टेस्टिंग हो रही है उन्हें कोई सरकारी नोटिस नहीं दिया गया है, उनकी जमीनों का अधिग्रहण भी नहीं हुआ है और ग्राम सभा को भी इसकी कोई सूचना नहीं दी गई है.
दुमका जिले के तीन प्रखंडों – शिकारीपाड़ा, रानेश्वर और टाटीकुंड, जिनको मिलाकर शिकारीपाड़ा विधान सभा बनता है, में हरियाणा स्थित कंपनी एचपीजीसीएल ने 2025 से ही कोल टेस्टिंग शुरू किया है.
इससे पहले 2015-16 में जब जिंदल ग्रुप यहां पहुंचा था और उसने एक समूचा पहाड़ ही, जिसमें 25 गांव पडता थे, ले लिया था तब उसे आंदोलन के जरिए यहां से भगा दिया गया था.
जांच दल के का. आरडी मांझी ने ग्रामीणों से संताली भाषा में बातचीत शुरू की तो ग्रामीणों ने बताया कि यहां पर पुलिस प्रशासन व अंचलाधिकारी खुलेआम धमकी देकर जबरन आदिवासियों की इन जमीनों पर हरियाणवी कंपनी निजी कंपनी को बसाने पर तुले हुए हैं. कोयला जांच (कोल टेस्टिंग) लुटिया पहाड़ के वन भूमि पर काम बोरिंग चालू किया गया. ग्रामीणों द्वारा विरोध करने पर स्थानीय पुलिस ने उन पर यहां के रंगदारी मांगने एवं सरकारी काम में बाधा डालने का झूठा मुकदमा दर्ज किया और एक आदिवासी महिला नेत्री रायमुनी देवी को जेल भेज दिया. अन्य दूसरे लोगों पर भी प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस उनको पकड़ने के लिए खोजबीन कर रही है. एक अन्य आदिवासी महिला पर पुरुष पुलिसकर्मियों ने जब लाठियों से प्रहार किया तो उसने डट कर मुकाबला किया. मीखू टुडू नाम की वह महिला भाकपा(माले) के जांच दल के समक्ष भी उपस्थित रही. यह क्षेत्र 5वीं अनुसूची के अंतर्गत अनुसूचित आदिवासी क्षेत्र है जहां आदिवासियों की सहमति के बिना कोई भी काम नहीं किया जा सकता है. फिर भी, केंद्र सरकार व राज्य सरकार की मिलीभगत से ‘आदिवासी उजाड़ो’ एवं ‘कारपोरेट जमीन लूट’ का यह अभियान चल रहा है. यहां ग्रामीणों की सभा करने के बाद पूरी टीम नौजवानों की टोली के साथ सुदूर पहाड़ी की तराई बसे गांव में पहुंची, जहां जाने के लिए रास्ता तक नहीं है. जंगल में ग्रामीणों ने एक बोर्ड लगा रखा था जिसमें लिखा था ‘कंपनी का प्रवेश वर्जित है’. नाला और नदी को फांदते हुए किसी तरह से चलकर शाम 4 बजे को जांच टीम लुटिया पहाड़ की तराई में बसे इस आमडाकुंडा गांव में पहुंची.
आमडा कुंडा गांव
इस गांव में संताल और पहाड़िया आदिवासियों के 55 परिवार बसे हुए हैं. यहां अबुआ आवास किसी को नहीं मिला है. बहुत पहले इंदिरा आवास मिला था. मइया योजना का लाभ 2-3 महिलाओं को मिल रहा है. वृद्ध लोगों को वृद्धावस्था पेंशन भी नहीं मिलता. यहां के लोग सुविधाओं से अभावग्रस्त जीवन जीने के लिए मजबूर हैं.
आमडा कुंड़ा में कोल टेस्टिंग का काम चालू है. इस गांव में हुई सभा के दौरान ग्रामीणों ने कंपनी के विरोध में लड़ने की हामी भरी. जांच दल ने दोनों गांवों की बैठक में कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर ग्रामीणों में जोश और उत्साह भर दिया. पूछताछ के दौरान में ग्रामीणों ने बताया कि कोल सर्वे में कुल 184 गांव आते हैं लेकिन अभी शुरुआत 11 गांवों में की गई है. यहां जेएमएम नेता पुलिस और कंपनी से मिलीभगत कर ग्रामीणों को बहलाने-फुसलाने और बरगलाने में लगे हुए हैं लेकिन उससे काम नहीं बनता तो दमन करवाने का काम करते हैं. एक एनजीओ आदिवासी संगठन के लोगों ने भी साल भर तक यहां आ-आकर ग्रामीण आदिवासियों को भरमाने की कोशिश की. उसके बाद भाकपा(माले) से संपर्क हुआ और स्थानीय भाकपा(माले) नेताओं ने गावों में बैठकें करनी शुरू कर दी. इस दौरान ही दो सभाएं भी आयोजित की गईं. इससे लोगों में साहस बढ़ा. 1 सितंबर को भाकपा(माले) के विधायक चन्द्रदेव महतो, पूर्व विधायक राजकुमार यादव और गीता मंडल के नेतृत्व में एक रैली व सभा का कार्यक्रम किया जा चुका था. इधर भाकपा(माले) के जांच दल के पहुंचने और बातचीत करने के साथ लोगों का साहस और बढ़ गया है.
निष्कर्षतः आने वाले दिनों में हजारों लोगों के विस्थापित होने की संभावना है. केंद्र और राज्य सरकार की मिलीभगत से आदिवासी संस्कृति व पहचान को मिटाने तथा आदिवासियों को जमीन से उजाड़ने के इस अभियान पर रोक लगाना अत्यंत ही जरूरी है.
जांच दल ने माननीय मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर आदिवासी महिला नेत्री पर हमला और मारपीट करनेवाले पुलिस अधिकारी एवं अंचलाधिकारी की बर्खास्त करने की मांग करने का निर्णय लिया है. दुमका में केंद्रित करते हुए पूरे संताल परगना में विस्थापितों की समस्याओं को लेकर बड़ा आंदोलन खड़ा करने से इस क्षेत्र में पार्टी का प्रभाव बढ़ने और उसका विकास-विस्तार करने का संभावना भी दीख रही है.