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विचार गोष्ठी: शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में मुस्लिम महिलाएं आगे आएं

विचार गोष्ठी: शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में मुस्लिम महिलाएं आगे आएं

13 सितंबर 2026 को फुलवारी शरीफ (पटना) में तहरीक-ए-निस्वां द्वारा एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया. इस गोष्ठी में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं.

‘शिक्षा व रोजगार का अधिकार और मुस्लिम महिलाएं’ विषय पर आयोजित इस विचार गोष्ठी को तहरीक-ए निस्वां की राष्ट्रीय संयोजक डाॅ. फरहत बानो ने संबोधित करते हुए कहा कि भारत का संविधान जाति, धर्म, लिंग या वर्ग के आधार पर किसी के साथ भेदभाव की इजाजत नहीं देता, लेकिन हाल के वर्षों में हमने हर जगह इस भेदभाव को बढ़ते देखा है. खासतौर पर अल्पसंख्यक व कमजोर समुदाय की लड़कियों को शिक्षा, रोजगार हासिल करने में कितनी ही परेशानियां झेलनी पड़ती हैं. सांप्रदायिक राजनीति मुस्लिमों को डरा रही है. इसका महिलाओं पर विशेष प्रभाव दिखता है और वे शिक्षा में पीछे रह जाती हैं, डर का माहौल महिलाओं को बाहर निकलने से रोकता है. सरकार कई स्कूलों को बंद कर रही है. जगह-जगह स्कूलों का मर्जर हो गया. इस वजह से भी लड़कियों का ड्राॅपआउट रेट बढ़ता ही जा रहा है.

ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी ने स्त्री शिक्षा व अधिकार के लिए फातिमा शेख और सावित्रीबाई फुले के ऐतिहासिक संघर्ष की चर्चा करते हुए कहा कि देश की इन पहली शिक्षिकाओं को कितनी ही परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन वे अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटीं. 20 वीं सदी में बिहार में रुकैया सखावत हुसैन समेत अनेक महिलाओं ने शिक्षा के लिए काम किया. पटना में लड़कियों का सबसे पहला स्कूल रशीदतुन्निश बेगम ने खोला, जिसमें सभी धर्मों की लड़कियां पढ़ती थीं.

गोष्ठी में दिल्ली की महिला पत्रकारों – शाहीन खान और नफीसा खान की पुलिस थाने में पिटाई, पटना छात्र आंदोलन के समय सबा आफरीन की गिरफ्तारी और सहारनपुर में पत्रकार हुदा जरीवाला की गिरफ्तारी का विरोध किया गया. इन सभी महिलाओं को मुस्लिम पहचान के कारण प्रताड़ित किया गया.

गोष्ठी को अफ्शां जबीं, नसरीन बानो, गुलशन खातून, आबिदा खातून, अनुशा मंसूर, अनीता सिन्हा, डा. मीरा दत्त, अनुराधा व प्रिया गुप्ता ने भी संबोधित किया. कार्यक्रम का संचालन अफ्शां जबीं और नसरीन बानो ने किया.



19 September, 2026