वर्ष 35 / अंक - 19 / दिल्ली और प्रयागराज में बुलडोजर कार्रवाई: कब थमेगा...

दिल्ली और प्रयागराज में बुलडोजर कार्रवाई: कब थमेगा यह कहर

दिल्ली और प्रयागराज में बुलडोजर कार्रवाई: कब थमेगा यह कहर

2 मई 2026 को देश की राजधानी दिल्ली के वजीरपुर औद्योगिक क्षेत्र में अचानक हुई बुलडोजर की कार्रवाई में कई लोगों ने अपना घर और रोजगार खो दिया. इस बुलडोजर कार्रवाई ने लगभग 200 परिवारों को प्रभावित किया है.

अगले दिन भाकपा(माले) समेत ऐक्टू, ऐपवा तथा आइसा द्वारा वजीरपुर औद्योगिक क्षेत्र का दौरा किया गया. भाकपा(माले) के पोलित ब्यूरो सदस्य तथा दिल्ली राज्य सचिव कामरेड रवि राय ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और पीड़ित परिवारों के साथ अपनी एकजुटता जाहिर की.

बुलडोजर कार्रवाई प्रभावित रामेश्वरी देवी ने बताया कि ‘एक छोटी-सी दुकान चलाकर वह किसी तरह अपना गुजर बसर करती हैं. बुलडोजर की कार्रवाई में उनका सारा सामान दब गया. रोजगार का कोई साधन नहीं बचा.’

वजीरपुर औद्योगिक क्षेत्र निवासी पूजा ने बताया, ‘इस बुलडोजर कार्रवाई की कोई नोटिस नहीं चिपकायी गयी. हम अब अपने सारे सामान और बच्चों के साथ सड़क पर आ गए हैं. हम 26 साल से यहां रह रहे थे. हमारा सबकुछ उजड़ गया.’

कई परिवारों ने बताया कि बुलडोजर की कार्रवाई में उनका सारा सामान दब गया. उन्होंने कल से खाना भी नहीं खाया है और सामान सड़क पर छोड़कर वो काम पर भी नहीं जा सकते हैं. वजीरपुर निवासी एक अन्य महिला सुषमा देवी ने बताया, ‘बीती रात 1 बजे एमसीडी वाले मलबा उठाने के लिए आ गए और हमारा सामान भी उठाने लगे. बहुत विरोध करने के बाद हमारा सामान बच पाया. अभी न ही हमारे पास रोजगार, न छत है और न ही खाने के लिए खाना है.’

सरोज ने कहा ‘इस बुलडोजर की कार्रवाई में बच्चों की किताबें भी दब गई. बच्चे रो रहे हैं. हम गरीब आदमी लोग हैं, कहां से उनके लिए नई किताब काॅपी लाए.’

भाकपा(माले) की टीम ने वजीरपुर औद्योगिक क्षेत्र के निवासियों से बात की तो पता चला कि उन्हें किसी प्रकार का कोई पुनर्वास अभी तक नहीं मिला है.

बेहद शर्मनाक है कि मई दिवस की अगली सुबह मजदूरों के रिहायशी इलाके पर इस तरह की बुलडोजर कार्रवाई की गई है. इस इलाके में रहने वाले ज्यादातर मजदूर सफाई कर्मचारी, फैक्ट्री मजदूर, गिग वर्कर, घरेलू कामगार, ई-रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर और रेहड़ी खोखा व पटरी लगाकर अपना गुजर-बसर करने वाले लोग हैं.

यहां एमसीडी, रेलवे प्रशासन, दिल्ली पुलिस बल की बड़ी संख्या में तैयारी के साथ लोगों के घरों पर बुलडोजर चलाया गया. सरकार की तरफ से उनको पुनर्वास या अन्य किसी प्रकार की मदद नहीं की गई. भाजपा सरकार के राज में देश की राजधानी समेत विभिन्न राज्यों में बुलडोजर की कार्रवाई चल रही है. जिसमें बड़ी संख्या में गरीबों के घर तोड़े जा रहे हैं.

भाकपा(माले)ने सभी पीड़ित परिवारों के लिए पुनर्वास की व्यवस्था करने, अवैध बुलडोजर कार्रवाई को तुरंत रोकने, पीड़ित परिवारों को हुए नुकसान की तुरंत भरपाई करने और  उनको तुरंत मुआवजा देने की मांग की है.


इसी तर्ज पर प्रयागराज में रेलवे की जमीन पर सैकड़ो साल से बसी गरीब बस्ती पर बुलडोजर चला कर ध्वस्त कर दिया गया. देर रात में पुलिस बल के साथ बुलडोजर लेकर बस्ती में महिलाओं के ऊपर पुरुष पुलिस के द्वारा लाठियों से पीटते हुए बस्ती के लोगों को भगाकर बुलडोजर से सैकड़ों घरों को ध्वस्त कर दिया गया.

बिना घर और रोजगार की समुचित व्यवस्था किए गरीब लोगों को उजाड़ना सीधे-सीधे संविधान विरोधी और मानवता को कलंकित करने वाली है. भाकपा(माले) के एक प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित इलाके – ध्वस्त की गई बस्ती गऊघाट – का दौरा किया, सैकड़ों पीड़ित परिवारों से मिला और गरीबों को उजाड़े जाने के खिलाफ मजबूत आंदोलन खड़ा करने का आश्वासन दिया. प्रतिनिधि मंडल में राज्य कमेटी सदस्य सुनील मौर्या, आइसा के प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार और इंकलाब नौजवान सभा की प्रदेश उपाध्यक्ष राधा शामिल रहीं.

नेताओं ने कहा कि सिर्फ प्रयागराज में ही नहीं बल्कि पूरे देश और  प्रदेश में डबल इंजन सरकार का बुलडोजर गरीबों को उजाड़ रहा है. यह बुलडोजर इस देश के संविधान पर चल रहा है और मानवता को नष्ट कर रहा है. सैकड़ों पीड़ित परिवार सड़कों पर रहने को मजबूर है और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई सब चौपट हों गई है. भाजपा का विकास गरीबों को उजाड़ कर, उन्हें बेघर कर, सड़कों पर लाकर और शहरों से खदेड़ कर किया जा रहा है.

गऊघाट में उजाड़े जा रहे गरीब दलितों के आवास, जमीन, रोजगार और 2 लाख रूपये के मुआवजा की मांग को लेकर भाकपा(माले) की अगुआई में दर्जनों महिलाओं, बच्चों, अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करते हुए महामहिम राष्ट्रपति महोदया को ज्ञापन दिया. यह मांग की गई कि विकास के नाम पर सरकारी जमीन से उजाड़े जा रहे सैकड़ो साल से रह रहे लोगों को रहने के लिए समुचित आवास की व्यवस्था की जाए. पुलिसिया कार्यवाही के दौरान नष्ट हुए सामान और तोड़े गए घर के लिए 2 लाख रूपये तक का न्यूनतम मुआवजा देने की गारंटी की जाए और यह धनराशि पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाए, उजाड़े गए परिवार के एक व्यक्ति के लिए स्थाई सम्मानजनक रोजगार की गारंटी की जाए और उनके बच्चों की शिक्षा और बुजुर्गों की स्वास्थ्य-व्यवस्था की समुचित गारंटी की जाए. 




09 May, 2026