4 मई 2026 को पाकी प्रखंड अंतर्गत खाप गांव स्थित जगदेव शर्मा चैक पर शहीद कामरेड जगदेव शर्मा का 26 वां शहादत दिवस मनाया गया. इस मौके पर क्षेत्र के कोने-कोने से आए सैकड़ों लोगों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को एक जनांदोलन का स्वरूप प्रदान कर दिया.
भाकपा(माले) के पाकी प्रखंड सचिव का. महेंद्र राम की अध्यक्षता आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष का. बीएन सिंह ने कहा कि पलामू की धरती कभी सामंती जुल्म और अत्याचार का प्रतीक थी जहां शोषित और वंचित वर्ग के लोगों को इंसान तक नहीं समझा जाता था. ऐसे कठिन दौर में का. जगदेव शर्मा ने अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका और जीवनपर्यन्त शोषितों के अधिकारों के लिए लड़ते रहे.
उन्होंने कहा कि 4 मई 2001 का दिन इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज है, जब सामंती ताकतों ने मेदिनीनगर में कायराना तरीके से उनकी हत्या कर दी, लेकिन उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया. उनके विचार, संघर्ष और साहस आज भी लाखों लोगों को अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देते हैं.
कार्यक्रम की शुरुआत शहीद का. जगदेव शर्मा को एक मिनट की मौन श्रद्धांजलि देने और पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई. ‘शहीद जगदेव शर्मा अमर रहें’ के नारों की गूंज ने कार्यक्रम को और भी ऊर्जावान बना दिया.
इस मौके पर अखिल भारतीय किसान महासभा के पलामू जिलाध्यक्ष का. प्रदीप विश्वकर्मा, राज्य कार्यकारिणी सदस्य का. कविता सिंह, सुशीला देवी, क्यूम अंसारी, इदरीस अंसारी, शाहिद सहित अनेक नेता-कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे. सभी वक्ताओं ने एक स्वर में शहीद के अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया. कार्यक्रम ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष की मशाल कभी बुझने वाली नहीं है और उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा.
उसी दिन पाटन प्रखंड के गहर पथरा गांव में का. बलराम राम के नेतृत्व में शहीद का. जगदेव प्रसाद शर्मा की याद में कार्यक्रम आयोजित हुआ. एक मिनट का मौन श्रद्धांजलि देने और उनके चित्रा पर माल्यार्पण करने के साथ शुरू हुए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) पाटन प्रखंड सचिव पवन विश्वकर्मा ने कहा कि का. जगदेव प्रसाद शर्मा ने लाल झंडे के नेतृत्व में गरीबों, मजदूरों समेत शोषित और वंचित समाज को हक-अधिकार दिलाने की लड़ाई को आगे बढ़ाया. उन्होंने पलामू में जमींदारी प्रथा, शोषण, दमन, छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ सड़कों पर लगातार आवाज बुलंद की. सामंती ताकतें उनकी लड़ाई से बौखलाई हुई थीं. गरीबों के हक के लिए लड़ते हुए उन्होंने अपनी शहादत दी. उनके अधूरे सपनों को साकार करने के लिए उनके विचारों को आगे बढ़ाने की जरूरत है.
उन्होंने आगे कहा कि आज फिर से पलामू में नए जमींदार पनप रहे हैं. दबंगों द्वारा दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और गरीबों की जमीनें लूटी जा रही हैं और वे न्याय के लिए कोर्ट-कचहरी और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं. हक की बात करने वालों पर फर्जी मुकदमें दर्ज कर उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है, जेल में डाला जा रहा है. जिले में जमीन विवाद समेत अन्य मामलों में लगातार हत्याएं हो रही हैं. पुलिस-प्रशासन दबंगों के सामने मूकदर्शक बना हुआ है. ऐसे में लाल झंडे को मजबूत कर जनता के हक-अधिकार की लड़ाई को और तेज करने की जरूरत है.
मौके पर विकास कुमार रवि, उमेश कुमार रवि, सुखी सिंह, बिगन राम, तपेश्वर राम, सरस्वती देवी, लाखो देवी, आकाश कुमार सहित कई कार्यकर्ता व ग्रामीण मौजूद थे.