भाकपा(माले) महारसचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य का बिहार दौरा
[ भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य पिछले दिनों – 2 से 7 अगस्त के बीच – बिहार में थे. इस दौरान उन्होंने राजधानी पटना, जहानाबाद, अरवल, सिवान और पटना जिले में विभिन्न तरह के कार्यक्रमों में शिरकत की. यहां प्रस्तुत है उनके इस बिहार दौरे और उस दौरान हुए विभिन्न कार्यक्रमों की एक संक्षिप्त रिपोर्ट ]
2 अगस्त 2026: पटना में जेन-जी आंदोलन के नेताओं के साथ संवाददाता सम्मेलन
भाकपा(माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने शिक्षा में व्याप्त भ्रष्टाचार, पेपर लीक, फीस वृद्धि, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमले तथा छात्र आंदोलनों पर दमन के खिलाफ बिहार एवं देशभर में चल रहे आंदोलन के सवालों पर राजधानी पटना के गांधी मैदान के समीप आइएमए सभागार में एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया.
भाकपा(माले) विधायक संदीप सौरभ, आइसा के राज्य अध्यक्ष धनंजय व उपाध्यक्ष सबा आफरीन व सचिव दीपांकर मिश्रा तथा आरवाइए के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा व सचिव शिवप्रकाश रंजन भी उनके साथ रहे.
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा के सवाल पर आंदोलन लगातार आगे बढ़ रहा है. यह केवल जेन-जेड का नहीं, बल्कि जेन-अल्फा तक – पूरी नई पीढ़ी का आंदोलन बन चुका है. जेन अल्फा भी अपने स्कूल के सवालों को लेकर आंदोलन कर रहा है.
भोजपुर में हमारी पार्टी के सड़क पर स्कूल चलाने जैसे प्रयोग और दिल्ली से लेकर बिहार तक छात्रों की सक्रिय भागीदारी इस संघर्ष की व्यापकता को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि मजदूर और मेहनतकश तबके भी उनके साथ खड़े हैं.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों वीडियो जारी कर कहा कि छात्रों को हम माफ कर रहे हैं. लेकिन वीडियो से ऐसा लग रहा था कि प्रधानमंत्री मोदी माफ करने के बहाने रूढ़िवादी एवं पितृसत्तात्मक ताकतों को उकसा रहे हैं. एक 15 वर्षीय छात्रा तक को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया. नई पीढ़ी के साथ खड़ा होना लोकतंत्र की रक्षा का प्रश्न है और शिक्षा व्यवस्था में कारगर सुधार के लिए भाकपा(माले) छात्र आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ी है.
दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री के बाद अब गृह मंत्री की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए. सरकार द्वारा मुकदमे वापस लेने की घोषणा के बावजूद आंदोलन से जुड़े सभी मामलों को वापस नहीं लिया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है.
भाकपा(माले) विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि देशभर के छात्र-युवाओं में मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ गहरा आक्रोश है और नौजवान अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं. छात्र आंदोलन, विशेषकर छात्राओं को निशाना बनाकर उसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है. दूसरी ओर बिहार के विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त की जा रही है और लगातार फीस वृद्धि के माध्यम से गरीब एवं वंचित तबकों के छात्रों को उच्च शिक्षा से बाहर धकेला जा रहा है.
आइसा बिहार राज्य अध्यक्ष धनंजय और सचिव दीपांकर मिश्रा ने कहा कि बिहार के छात्रों के सवालों को आइसा मुद्दा बनायेगा और बिहार के शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के दिशा आंदोलन तेज करेगा. बिहार में स्नातक को पढ़ाई में 7.5 सीजीपीए का बैरियर और पीएचडी में फीस वृद्धि को वापस लेने तथा नाॅन नेट फेलोशिप को लागू करने की मांग को लेकर आंदोलन आगे बढ़ेगा.
आइसा बिहार राज्य उपाध्यक्ष सबा आफरीन ने कहा कि जंतर-मंतर से पटना तक छात्रों का अभूतपूर्व उभार देखने को मिला है और इस आंदोलन को समाज के विभिन्न तबकों का व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ है. नफरत की राजनीति की आड़ में शिक्षा व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार को दिए जा रहे संरक्षण को इस बार देश के जेन-जेड ने चिन्हित कर लिया और निर्णायक लड़ाई लड़ी.
छात्र-युवा नेताओं ने कहा कि गांधी मैदान में शांतिपूर्ण आंदोलन पुलिसिया बर्बरता का शिकार हुआ. कई छात्रों और युवाओं को 24 घंटे से अधिक समय तक बिना किसी सूचना के हिरासत में रखा गया और जो लोग आंदोलन में शामिल भी नहीं थे, उन्हें भी प्रताड़ित किया गया. डराने-धमकाने और दमन की इस राजनीति का जवाब लोकतांत्रिक जनआंदोलन से दिया जाएगा.
मजदूरों व छात्र-युवा संगठनों की बैठकों में शरीक हुए
अगले दिन 3 अगस्त 2026 को का. दीपंकर भट्टाचार्य ने राजधानी पटना में पार्टी के राज्य मजदूर वर्ग विभाग और आइसा-आरवाइए नेताओं की दो अलग-अलग बैठकों को संबोधित किया.
4 अगस्त: जहानाबाद एवं अरवल का दौरा
जहानाबाद एवं अरवल जिले का दौरा किया जहां उन्होंने पुलिस दमन और हिंसा से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की. पखरपुर और हैबतपुर (अरवल) में क्रमशः रागिनी देवी और टुनटुन महतो के परिजनों से मुलाकात की.
रागिनी की अरवल के सदर अस्पताल में पहले प्रसव के दौरान ही चिकित्सक की लापरवाही से मृत्यु हो गई थी. जब पार्टी नेता व पूर्व विधायक महानंद सिंह की अगुआई में विक्षुब्ध परिजनों ने जब इसकी शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया तो उनके ऊपर एक फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया गया था.
का. दीपंकर भट्टाचार्य ने हैबतपुर में विगत 13 जुलाई को ताड़ी पीने के आरोप में स्थानीय पुलिस द्वारा पिटाई किए जाने से मृत अनिल ऊर्फ टुनटुन महतो की पत्नी मीना देवी, बेटों – अभिषेक और आदित्य मौर्य तथा बेटी लवली कुमारी से मुलाकात की, मृतक के प्रति संवेदना व्यक्त की और इस हाजत हत्याकांड के दोषियों को सजा दिलाने की मांग पर आंदोलन तेज करने को कहा. इस मौके पर उन्होंने कहा कि शराबबंदी के नाम पर पुलिस की गुंडागर्दी चरम पर है. शराब माफियाओं पर कार्रवाई करने के बजाय सरकार आम लोगों को जेल में ठूंस रही है.
भदासी: काॅमरेड चुरामन भगत की श्रद्धांजलि सभा
इसके बाद का. दीपंकर भट्टाचार्य भदासी गांव पहुंचे और 24 साल की लंबी कैद के बाद भी अवाम के हक की लड़ाई में चट्टान की तरह अडिग रहे का. चुरामन भगत को श्रद्धांजलि अर्पित की. का. चुरामन भगत को दमनकारी टाडा कानून के तहत 24 साल की लंबी और यातनापूर्ण कैद भुगतनी पड़ी थी. इसी साल मार्च में वे जेल से रिहा हुए थे.
सभा में का. चुरामन की की पत्नी लालपरी देवी, बेटे जयराम भगत और शहीद कामरेड शाह चांद के परिवार के सदस्यों समेत दर्जनों स्थानीय लोग मौजूद रहे.
चैती पीपर: जहानाबाद
भदासी से निकलकर का. दीपंकर भट्टाचार्य पिछले दिनों सामंती उत्पीड़न के शिकार चैती पीपर गांव पहुंचे. ठीक एक महीने पहले यहां के साहसी ग्रामीणों ने बालू माफियाओं के एक भीषण हमले को डटकर नाकाम किया था, जिसमें एक महिला समेत पांच ग्रामीण गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे. गांव की जमीनी हकीकत का जायजा लेने के बाद जहानाबाद में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज भले ही उस गांव में पुलिस कैंप बना हुआ है, लेकिन दहशत का माहौल बरकरार है. बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, घायलों को जरूरी और बेहतर इलाज नहीं मिल रहा है, और कई युवा ग्रामीणों को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. गंभीर रूप से घायल दिनेश राम की हालत बेहद खराब है, लेकिन प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है.
कहा कि यह इलाका लंबे समय तक हिंसा और दमन का दौर झेल चुका है. यहां के मेहनतकश अवाम ने भारी संघर्षों के बाद उस काले दौर को पीछे छोड़ा था, लेकिन आज एक बार फिर चैती पीपर में जनसंहार की साजिश रची जा रही है. गरीबों का जीना मुश्किल कर दिया गया है.
उन्होंने सरकार और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि बालू माफियाओं को संरक्षण देना बंद किया जाए. इस इलाके के विकास पर तत्काल ध्यान दिया जाए, स्कूलों की बेहतर व्यवस्था हो और आम जनता व बच्चों के लिए शौचालय सहित सभी जरूरी बुनियादी सुविधाएं युद्धस्तर पर उपलब्ध कराई जाएं. माफिया और पुलिस-प्रशासन की साठगांठ अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
5 अगस्त: छात्र नेताओं के साथ सीवान पहुंचे
अगले दिन सिवान पहुंचे काॅ. दीपंकर भट्टाचार्य ने सिवान के अंबेडकर पार्क में आयोजित प्रतिवाद सभा को संबोधित किया. यह सभा जेन-जेड आंदोलन पर एके 47 और पैलेट गन चलवाने वाले देश के गृहमंत्री अमित शाह से इस्तीफे और 25 जुलाई को आहूत बिहार बंद के दौरान पुलिस फायरिंग के जिम्मेवार सिवान एसपी और एसडीपीओ को बर्खास्त करने की मांग पर आयोजित की गईं थी.
सभा में उन्होंने कहा कि नीट-यूजीसी पेपर लीक के खिलाफ पिछले दिनों हुआ देशव्यापी जेन-जेड आंदोलन ने मोदी राज के अंत की शुरुआत कर दी है. आंदोलन के आगे मोदी सरकार का झुकना और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा तो महज झांकी है, देश के लोकतंत्र, संविधान, नागरिक अधिकार और शिक्षा तथा रोजगार पर हमला करनेवाली और साथ ही, माॅब लिंचिंग, बुलडोजर और एनकाउंटर राज चलानेवाली सरकार के सरगना नरेंद्र मोदी और अमित साह को गद्दी से उतार फेंकना बाकी है.
उनके साथ जंतर मंतर आंदोलन की नेत्री व जेएनएयू छात्र संघ की संयुक्त सचिव दानिश, जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष व आइसा के राज्य अध्यक्ष धनंजय, राज्य सचिव दीपांकर मिश्रा, राज्य उपाध्यक्ष सबा आफरीन ने भी प्रतिवाद सभा को संबोधित किया.
अपनी सीवान यात्रा के दौरान का. दीपंकर भट्टाचार्य व छात्रा नेताओं ने डुमरहर बुजुर्ग (दरौली) पहुंचकर 25 जुलाई के बिहार बंद के दौरान पुलिस की गोली से बुरी तरह से घायल बुलेट गोंड, पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर बुरी तरह से पिटाई के शिकार आरवाइए नेता विशाल यादव (ठेपहां, जरादेई) और पुलिस की गोलियों से घायल मो. आरिफ (शेख मुहल्ला, सिवान) से मुलाकात भी की.
प्रतिवाद सभा में बिहार बंद के दौरान 25 जुलाई को सिवान में पुलिस द्वारा गिरफ्तारी व बर्बर पिटाई के शिकार और आंदोलन के दबाव में रिहा व सजामुक्त हुए छात्र-युवा नेताओं – पवन कुशवाहा, अरुण कुमार राम, विश्वकर्मा कुशवाहा व विशाल यादव को सम्मानित किया गया.
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ की संयुक्त सचिव दानिश ने कहा कि पेपर लीक आंदोलन सरकार को देश कि जनता के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए था.
दानिश ने कहा कि आंदोलन करना गुनाह नहीं है. किसान आतंकवादी नहीं हैँ, न ही छात्र देशद्रोही. हमने तो देश की आजादी भी लड़कर ही हासिल की है. भगत सिंह, बाबा साहेब अम्बेडकर और शहीद चंद्रशेखर ने हमें यह सिखाया है. देश के प्रधानमंत्री जेन-जेड आंदोलनकारी छात्राओं पर गालियां देने का आरोप लगाकर उन्हें बदनाम कर रहे हैँ लेकिन हम सभी जानते हैं कि उनके नेता व मंत्री तथा वे खुद भी और महिलाओं के खिलाफ गंदी व भद्दी गालियों का किस कदर इस्तेमाल करते हैं. प्रधानमंत्री 15 साल की बच्चियों के खिलाफ जो अभियान चला रहे हैं वह अत्यंत निंदनीय है. 20 जुलाई के संसद मार्च पर जो बर्बरतापूर्ण दमन हुआ हम उसे हमेशा याद रखेंगे. इसके जिम्मेदार देश के प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को इसका जवाव देना ही होगा.
16 वर्ष की उम्र में मतधिकार की मांग
प्रतिवाद सभा को संबोधित करते हुए भाकपा(माले) महासचिव दीपंकर भट्टðाचार्य ने हालिया जेन-जी आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि देश में 16 वर्ष की उम्र पूरी करते ही सबको मतधिकार मिल जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख आज-जेन जी और जेन अल्फा को देशभक्ति व संस्कारों का पाठ पढ़ाने की बात करते हैं लेकिन संघ परिवार व उनकी भाजपा सरकार उनके सारे अधिकार छीनने पर अमादा क्यों है, क्या वे इसका जवाब देंगे?सभा को पूर्व विधायक अमरजीत कुशवाहा, आरवाइए नेता पवन कुशवाहा, सफाई मजदूरों के नेता अमित कुमार ने भी संबोधित किया. प्रतिवाद सभा का संचालन भाकपा(माले) के युवा नेता का. जयशंकर ने की.
आइसा के राज्य अध्यक्ष धनंजय ने पेपर लीक को छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए और इसके खिलाफ आंदोलन को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि आनेवाले दिनों में देश के साथ ही बिहार में भी शिक्षा, परीक्षा व रोजगार के सवाल पर जोरदार आंदोलन छेड़ा जायेगा. शिक्षा व सम्मानजनक रोजगार हमारा हक है और हम अपनी जन गंवाकर भी हासिल करेंगे.
सबा आफरीन ने कहा कि सिवान शहीद चंद्रशेखर की धरती है और यहां के छात्र-नौजवानों ने शिक्षा-परीक्षा में सुधार का जो संकल्प लिया है, उसे हर हाल में पूरा करके ही दम लेंगे और अपनी राह रोकने वाली दिल्ली-पटना की सरकारों को उखाड़ फेकेंगे. आइसा राज्य सचिव दीपांकर मिश्रा ने अगस्त माह में शिक्षा, परीक्षा व रोजगार के सवाल पर बिहार में छेड़े गए आंदोलन में छात्रा-युवाओं से भारी तादाद में शामिल होने की अपील की.
प्रतिवाद सभा से पूर्व भाकपा(माले) महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, राज्य सचिव कुणाल, पूर्व विधायक अमरनाथ यादव, सत्यदेव राम व अमरजीत कुशवाहा, छात्र नेताओं – दानिश, धनंजय, सबा आफरीन व दीपंकर मिश्रा ने वहां अवस्थित बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर व शहीद चंद्रशेखर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी.
6 अगस्त: पालीगंज में संकल्प सभा
6 अगस्त को का. दीपंकर भट्टाचार्य ने युवाओं पर पुलिसिया दमन के खिलाफ, बेहतर शिक्षा और सम्मानजनक रोजगार के लिए, नहरों में पानी तथा गरीबों के वास-आवास के लिए, एनकाउंटर, बुलडोजर और पुलिसिया दमन के राज के खिलाफ पालीगंज हाई स्कूल खेल मैदान में आयोजित संकल्प सभा को संबोधित किया.
सभा को संबोधित करते हुए दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि छात्र आंदोलनों से देश को नेता मिलते थे लेकिन आज की सरकार चाहती है कि छात्र नेता नेता नहीं बने ताकि गरीबों एवं आम लोगों की आवाज आगे न बढ़ सके. जेन-जी ने पेपर लीक का हिसाब लिया और अब स्कूली बच्चे भी अपने स्कूल में हो रहे भ्रष्टाचार का हिसाब मांग रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी को देश से माफी मांगनी चाहिए, लेकिन इसके उलट छात्रों को कह रहे हैं कि माफ कर दिया. शिक्षा और परिक्षा में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म करने का सवाल अभी हल नहीं हुआ है, इसलिए आंदोलन जारी है.
बिहार सरकार किसी की बात नहीं सुन रही है. सफाई कर्मचारी आज एक सप्ताह से हड़ताल पर हैं, उनकी बात नहीं सुनी जा रही है. शराबबंदी में किसी शराब माफिया की गिरफ्तारी नहीं होती, गरीबों को पकड़ के जबरन और कई बार फर्जी तरीके से फंसा के प्रताड़ित किया जा रहा है.
उन्होंने आगे कहा कि जेन-जी आंदोलन में जो लोग शामिल नहीं थे, उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया. अब सिर्फ पटना-दिल्ली ही नहीं, देश के कोने-कोने में लोग सरकार के भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार है. सरकार को जवाब देना पड़ेगा कि छात्रों पर एके 47 क्यों चलाई गई, पैलेट गन क्यों चलाया गया?
कहा कि बिहार में सरकारी स्कूलों को बर्बाद किया जा रहा है. हमें इसके खिलाफ भी लड़ना होगा. हम सरकार के दमन से न पीछे हटने वाले हैं, न ही डरने वाले हैं.
संकल्प सभा को पालीगंज विधायक संदीप सौरभ, ऐपवा नेत्री लीला वर्मा, पूर्व विधायक महानंद सिंह, गोपाल रविदास, मुखिया आनंद यादव, आइसा अध्यक्ष धनंजय, पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद और किसान नेता मंगल यादव ने भी संबोधित किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं संचालन भाकपा(माले) नेता अनवर हुसैन ने किया.
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22 जुलाई को पटना में बिहार के युवाओं का राजभवन मार्च उतना ही जोशपूर्ण और दमदार था, जितना दिल्ली में #JantarMantar पर प्रदर्शनकारियों का 20 जुलाई का #ChaloSansad मार्च. बिहार की भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने भी दिल्ली की ‘मो-शा’ (मोदी-शाह) सरकार जैसा ही दमनकारी और बदले की भावना वाला रवैया अपनाया. बिहार में अंधाधुंध गिरफ्तारियां, मारपीट, आंसू गैस के गोले दागना और यहां तक कि एके-47 असाॅल्ट राइफलों का इस्तेमाल भी देखा गया. लेकिन इस बार यह दमनकारी रणनीति काम नहीं आई और सरकारों को पीछे हटना पड़ा.
बिहार में, संसदीय लोकतंत्र के सभी नियमों और प्रोटोकाॅल का खुलेआम उल्लंघन करते हुए, जेएनएसयू के पूर्व महासचिव और अब पालीगंज से दूसरी बार भाकपा(माले)-लिबरेशन के विधायक बने काॅमरेड संदीप सौरव को उनके विधायक आवास से गिरफ्तार कर लिया गया. पटना में आइसा नेता धनंजय, सबा आफरीन, दीपांकर मिश्रा, भाकपा(माले) नेता कुमार परवेज और कुमार दिव्यम, और पालीगंज के लोकप्रिय भाकपा(माले) मुखिया आनंद को गिरफ्तार किया गया.
सिवान में पुलिस ने भाकपा(माले) के पूर्व विधायक अमरजीत कुशवाहा के घर पर छापा मारा और तोड़-फोड़ की, जबकि भाकपा(माले) सिवान जिला समिति के सदस्य विशाल यादव (आरवाइए के नेता) और कार्यकर्ताओं अरुण राम, पवन कुशवाहा और विश्वकर्मा कुशवाहा की पिटाई की गई और उन्हें कई दिनों तक हिरासत में रखा गया.
भारत की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने के साथ-साथ, संघ-भाजपा ब्रिगेड कैंपस में लोकतंत्र को खत्म करने, प्रगतिशील छात्र आंदोलन को रोकने और छात्र आंदोलन से राजनीतिक नेतृत्व के उभार में बाधा डालने की भी सुनियोजित कोशिश कर रही है. लंबे समय तक 1974 के ऐतिहासिक आंदोलन के नेताओं का बिहार की राजनीति पर दबदबा रहा, लेकिन आज भाजपा राजनीतिक मैदान को माफिया डाॅन, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं और बड़े व्यापारिक घरानों के लिए काम करने वाले सत्ता के दलालों से भरना चाहती है.
शिक्षा और नौकरियों पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करते हुए, ‘जेन जेड (Gen Z) की इस नई लहर को राजनीति के अपराधीकरण और काॅर्पाेरेटाइजेशन की इस फासीवादी साजिश को हराना होगा और छात्र आंदोलन से निकलने वाले राजनीतिक नेतृत्व के उभार की रक्षा करनी होगी. कल सिवान में हुई विरोध सभा के बाद, आज हमने पालीगंज में एक ‘संकल्प सभा’ आयोजित की. इन दोनों सभाओं में हमने महिलाओं, युवाओं और मजदूर-किसान कार्यकर्ताओं की उत्साहजनक भागीदारी देखी.
अगस्त का महीना भारत की आजादी का महीना है. ‘आजादी’ शब्द को ही बदनाम करने की बीजेपी की बुरी कोशिश को नाकाम करते हुए, आजादी और स्वतंत्रता की भावना को दूसरे आजादी के आंदोलन के इस दौर में भारत में एक बार फिर फैलने दें.
(का. दीपंकर भट्टाचार्य का एक फेसबुक पोस्ट)