अखिल भारतीय खेत और ग्रामीण मजदूर सभा (All India Agrarian And Rural Labour Association) का आठवां राष्ट्रीय सम्मेलन 21-22 नवंबर 2026 को गिरिडीह जिले के महेन्द्र सिंह नगर (सरिया बाजार, हजारीबाग रोड स्टेशन) में आयोजित होने जा रहा है.
दमन, कार्पाेरेट लूट और संवैधानिक अधिकारों के हनन का विरोध करने, बुलडोजर राज के खिलाफ उठ खड़े होने तथा खेग्रामस (AIARLA) को सभी तरह के मजदूरों और वंचित समूहों के एकताबद्ध संघर्षशील मंच के रूप में विकसित करने के संकल्प तथा वोट बचाओ, देश बचाओ-भ्रष्ट ज्ञानेश कुमार को भगाओ के आह्वान के साथ आयोजित हो रहे इस सम्मेलन के पूर्व पूरे देश में लाखों खेत व ग्रामीण मजदूरों के बीच संगठन का सदस्यता अभियान चलाया गया है.
सम्मेलन के सभागार (मंडल धर्मशाला) को भाकपा(माले) लिबरेशन के संस्थापक नेता तथा वर्ष 2003 में संपन्न हुए इस संगठन के स्थापना सम्मेलन से ही आजीवन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे काॅमरेड स्वदेश भट्टाचार्य, जिनका विगत 30 अक्टूबर को निधन हो गया, के नाम समर्पित किया गया है. जबकि, सम्मेलन का मंच पिछले दिनों दिवंगत हुए रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी ऑफ पंजाब (आरएमपीआइ) के नेता काॅमरेड गुरनाम सिंह दाउद के नाम पर रखा गया है. भाकपा(माले) के महासचिव काॅमरेड दीपांकर भट्टाचार्य खेग्रामस के इस आठवें राष्ट्रीय सम्मेलन के मुख्य अतिथि बनाए गए हैं.
पूरे देश के गांव-कस्बों में सम्मेलन व्यापक प्रचार और तैयारी का अभियान चल रहा है. पर्चा व पोस्टर जारी हुआ है और सोशल मीडिया कैम्पेन भी चल रहा है. साथ ही, सदस्यता अभियान, ग्रामीण बैठकों और विभिन्न ढांचों के सम्मेलन भी आयोजित किए जा रहे हैं.
संगठन की ओर से जारी पर्चे में कहा गया हैं कि मोदी सरकार का 12 साल देश के आम अवाम के लिए और खासकर मेहनतकशों के लिए कई तरह की त्रासदियों से भरा रहा है. खेती-किसानी पर हमलों से लेकर रोजी-रोटी, रोजगार, शिक्षा और शिक्षण संस्थानों पर लगातार हमले हुए हैं. लाखों परिवारों को उजाड़ा गया है. वहीं न्यूनतम मजदूरी कम रखकर ठेका, नियोजन, संविदा और आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत लाखों कर्मियों की अरबों-खरबों की मजदूरी की लूट इतिहास में सबसे बड़ी लूट के रूप में दर्ज हो रही है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तबाही और बढ़ती हुई महंगाई तथा बेरोजगारी ने ग्रामीण गरीबों का जीना मुहाल कर दिया है. पिछड़े इलाके में पीड़ादायक पलायन जहां तेजी से बढ़ा है, वहीं जीने लायक मजदूरी नहीं मिलने से तमाम किस्म के असंगठित मजदूर और आउटसोर्सिंग कर्मी फटेहाली का जीवन जीने को अभिशप्त हैं. मजदूरों के आक्रोश और अधिकारों को दबाने के लिए भाजपा सरकार ने मजदूर-विरोधी चार लेबर कोड थोप दिए हैं.
भाजपा-आरएसएस की गरीब मजदूर विरोधी काॅर्पाेरेट्स परस्त नीतियों और नफरती राजनीतिक विमर्श ने दलितों, वंचितों और मेहनतकशों के एजेंडे को कमजोर किया है. काॅर्पाेरेट्स परस्त नई माइनिंग नीति ने आदिवासियों और किसानों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों पर बड़ा हमला किया है.
यह आरोप लगाया गया है कि मोदी सरकार का विकास का रोडमैप काॅर्पाेरेट्स पूंजीपतियों के इर्द-गिर्द घूमता है. देश के गांव, गरीब, मजदूर और किसान उनके नक्शे में नहीं हैं. उल्टे उनके आवास, राशन और रोजगार पर चौतरफा हमला बढ़ा है. गरीबों पर सामंती और जातीय/सांप्रदायिक हमले तेज हुए हैं और पुलिसिया हमलों की तो बाढ़-सी आ गई है. बिहार में पुलिस ने शराबबंदी के नाम पर दर्जनों लोगों की हत्या की है और महिलाओं समेत हजारों लोगों को जेल भेजा है. हाजत में हत्या का नया दौर शुरू हुआ है. दलित, महादलित और वंचित जमात के लोग इस हमले का सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं. एसआइआर के नाम पर दलितों, वंचितों और अल्पसंख्यकों की वोट चोरी कर उनका संवैधानिक अधिकार छीना जा रहा है. 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम काटे गए हैं और लाखों फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े गए हैं. संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग को भाजपा का आयोग बनाने में लगे मुख्य चुनाव आयुक्त की चोरी पकड़ी गई है.
खेग्रामस पर्चे में कहा गया है कि शिक्षा और परीक्षा की बदहाली के खिलाफ उठ खड़े हुए विराट ‘जेन जी’ आंदोलन की जीत ने देश में यह विश्वास पैदा किया है कि तानाशाह सरकार को पीछे धकेला जा सकता है और फासीवादी सत्ता के डर को समाप्त किया जा सकता है. खेेग्रामस युवाओं के इस आंदोलन की युवा चेहरा नेहा बोरा सहित अन्य साथियों और नागरिक समाज के वरिष्ठ नागरिकों को सलाम पेश करता है जिन्होंने संविधान, लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के ऐतिहासिक संघर्ष का शंखनाद किया है. तमाम तरह के दमन को झेलते हुए तानाशाही के खिलाफ लोकशाही के लिए चल रहे आंदोलन के प्रति खेग्रामस एकजुटता जाहिर करता है.
साथ ही, यह भी कहा गया है कि इस बीच सिकमीदारों और बंटाईदारों के कई उल्लेखनीय संघर्ष हुए हैं. दलित-वंचितों पर बढ़ते सामंती हमलों के खिलाफ प्रतिवाद हुए हैं और माॅब लिंचिंग के खिलाफ दर्जनों जगहों पर प्रतिवाद संगठित किए गए हैं. मनरेगा की हत्या का पुरजोर विरोध किया गया है और नए कानून ग्राम जी के तहत काम देने और मजदूरी बढ़ाने को लेकर खेग्रामस ने धारावाहिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया है.
खेग्रामस ने हाल के दिनों में नोएडा सहित देश के विभिन्न हिस्सों में मजदूरी बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े व जुझारू संघर्षों और गुजरात के सूरत शहर में साप्ताहिक छुट्टी और वेतन वृद्धि को लेकर अभी भी चल रहे संघर्ष का भी जिक्र किया है. बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ बिहार सहित कई जगहों पर जुझारू जन-प्रतिवाद हुए हैं. इस आंदोलन में उत्तर प्रदेश की जीरा भारती सहित कई नेता जेल गए हैं और अन्य जगहों पर सैकड़ो सथियों ने अनगिनत मुकदमों का सामना किया है. खेग्रामस ने अपने धारावाहिक आंदोलन से सैकड़ों बस्तियों को उजड़ने से बचाया है और हजारों परिवारों को बासगीत पर्चा लड़कर दिलाया है.
8वें राष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर निम्नलिखित सवालों पर संघर्ष तेज करने के प्रति बपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए निम्नलिखीत मांगों को उठाया गया है:
- ग्रामीण गरीबों और मजदूरों के वोटिंग राइट छीनने वाले एसआइआर पर रोक लगे.
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अविलंब हटाया जाए.
- दमन और विस्थापन का बुलडोजर राज नहीं चलेगा!
- लैंड राइट, हाउसिंग राइट और फूड राइट्स के लिए एक बार फिर जुझारू संघर्ष तेज करें.
- 4 लेबर कोड वापस हो. सम्मानजनक मजदूरी के लिए संघर्ष तेज हो.
- काॅर्पाेरेट्स-फ्रेेंडली राज्यों का अधिकार छीनने वाले आदिवासी-विरोधी, किसान-विरोधी माइनिंग कानून वापस हो.
- जी-राम-जी (ग्रामजी) में 200 दिन काम और 700 रुपये दैनिक मजदूरी की गारंटी हो.
- आउटसोर्सिंग/संविदा की गुलामी व्यवस्था को समाप्त किया जाए और तमाम सेवाओं का सरकारीकरण हो.
- सरकारी स्कूलों को ठीक किया जाए, सरकारी विद्यालयों को केंद्रीय विद्यालयों के समक्ष खड़ा किया जाए.
- प्रवासी श्रमिकों की सम्मानजनक मजदूरी, हाउसिंग और सुरक्षा-सम्मान के लिए राज्यों में प्रवासी श्रमिक कल्याण बोर्ड का गठन हो. सभी राज्यों में एससी-एसटी सब प्लान एक्ट बने.
- बटाईदारों और सिकमीदारों को उनके अधिकार मिलें.
इस सम्मेलन की मेजबानी झारखंड ग्रामीण मजदूर सभा (झामस) कर रहा है. सम्मेलन में देश भर से 1,000 से अधिक प्रतिनिधि और पर्यवेक्षक भाग लेंगे.
पर्चे के अंत में दलितों, वंचितों और ग्रामीण मजदूरों का जमीनी संघर्ष सामाजिक राजनीतिक बदलाव की राजनीति की मुख्य कड़ी बताते हुए लोगों से इस सम्मेलन में अपना सक्रिय योगदान देने की अपील की गई है.