वर्ष 35 / अंक - 26 / महिला छात्रावास को खाली कराने के खिलाफ आइसा का विर...

महिला छात्रावास को खाली कराने के खिलाफ आइसा का विरोध प्रदर्शन

महिला छात्रावास को खाली कराने के खिलाफ आइसा का विरोध प्रदर्शन

रांची के नागड़ा टोली स्थित कामकाजी महिला छात्रावास को मरम्मत एवं अनुरक्षण कार्य के नाम पर तीन दिनों के भीतर खाली कराने के उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी के आदेश का आइसा ने कड़ा विरोध किया है. छात्रावास परिसर में रह रही छात्राओं, नौकरीपेशा महिलाओं तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही युवतियों से बातचीत के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि प्रशासन ने बिना किसी ठोस वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें बेघर करने का निर्णय लिया है.

यह छात्रावास विशेष रूप से आदिवासी, ग्रामीण पृष्ठभूमि की महिलाओं के लिए सुरक्षित आवास का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. छात्रावास खाली होने की स्थिति में छात्राओं की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, रोजगार और सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा. दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं को महंगे निजी आवासों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिससे अनेक छात्राएं अपनी पढ़ाई और काम बीच में छोड़ने को विवश हो सकती हैं.

छात्रावासों को एनजीओ के हवाले करने की नीति तथा सार्वजनिक सुविधओं के निजीकरण की कोशिशें की जा रही है. साथ ही कामकाजी महिलाएं हैं, जो आगे छात्रावास में रहेगी, उनको अपने वेतन का 5%, 7%, 10%, और 15% देना होगा. यह छात्राओं और काम करने वाली महिलाओं के लिए न्यायसंगत नहीं है और उनके हितों के भी खिलाफ हैं.

आइसा ने यह मांग की है कि जब तक सभी छात्राओं के लिए सम्मानजनक, सुरक्षित और स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक छात्रावास खाली कराने का आदेश वापस लिया जाए. अगर ऐसा नहीं किया गया तो आइसा छात्रावास से सड़क तक व्यापक आंदोलन चलाने के लिए बाध्य होगा.

निरसा से भाकपा(माले) विधयक अरूप चटर्जी भी 26 जून को रांची स्थित नागड़ा टोली वर्किंग विमेंस हाॅस्टल पहुंचे. उन्होंने हाॅस्टल में रहने वाली कामकाजी महिलाओं एवं छात्राओं से मुलाकात की.

हाॅस्टल में रहने वाली महिलाओं ने जिनमें कई विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं, जबकि कई प्रतियोगी एवं अन्य परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं, हाॅस्टल की मरम्मत को लेकर सामाजिक कल्याण विभाग द्वारा जारी नोटिस के बाद उपजी अपनी चिंताओं से उनको अवगत कराया.

उनका कहना है कि यदि हाॅस्टल का मरम्मत ही कराना है तो चरणबद्ध तरीके से – पहले एक हिस्से का और फिर दूसरे हिस्से का – मरम्मत किया जाए ताकि एक हिस्से में रह रही महिलाओं को दूसरे हिस्से में अस्थायी रूप से शिफ्ट किया जा सके. पूरे हाॅस्टल को खाली कराया जाना और बारिश के मौसम में उन्हें हाॅस्टल से हटाना, उनके सामने गंभीर आवासीय संकट खड़ा कर देगा.

विधायक अरूप चटर्जी ने हाॅस्टल की महिलाओं और छात्राओं की समस्याएं सुनीं तथा उन्हें साथ लेकर समाज कल्याण विभाग के सचिव से मुलाकात की. इस दौरान हाॅस्टल की ओर से मांग-पत्र भी सौंपा गया. सचिव ने आश्वासन दिया कि छात्राओं और महिलाओं की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा तथा ऐसा समाधान निकाला जाएगा जिससे किसी को अनावश्यक परेशानी न हो. उन्होंने कहा कि मरम्मत का कार्य चरणबद्ध तरीके से कराने और उपायुक्त से बातचीत कर उचित रास्ता निकालने का प्रयास किया जाएगा.

इस मौके पर आइसा के राज्य सचिव त्रिलोकी नाथ व ऐपवा की नेता नंदिता भट्टाचार्य भी मौजूद थीं. उन्होंने दुहराया  कि किसी भी कीमत पर महिलाओं और छात्राओं को बेघर नहीं होने दिया जाएगा. यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा. आइसा ने हाॅस्टल की महिलाओं और छात्राओं के संघर्ष के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन ने यदि संवेदनशील रवैया नहीं अपनाया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.

मौके पर ऐपवा की ओर से गीता तिर्की, सपना गाड़ी, हाॅस्टल से पिंकी, लखीमनि मुंडा, सीमांत देवी, सिमैला कुमारी, प्रभा तिर्की एवं उर्मिला भगत भी मौजूद थीं.


27 June, 2026