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‘जेन-जी स्पीक्स: प्रतिरोध का नया स्वर, लोकतंत्र की नई उम्मीद’ विषय पर परिचर्चा

‘जेन-जी स्पीक्स: प्रतिरोध का नया स्वर, लोकतंत्र की नई उम्मीद’ विषय पर परिचर्चा

8 अगस्त 2026 को ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम (एआइपीएफ) के बैनर तले पटना के आईएमए हाॅल में  ‘प्रतिरोध का नया स्वर, लोकतंत्र की नई उम्मीद’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई. परिचर्चा में जेन-जी आंदोलन के नेताओं एवं आंदोलन में शामिल कई छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए और आंदोलन के दौरान हुए पुलिसिया दमन, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल पर अपनी बात रखी.

कार्यक्रम को आइसा राज्य अध्यक्ष धनंजय, विधायक डाॅ. संदीप सौरभ, छात्रा दिशा कुमारी, खुशबू कुमारी, भाव्या कुमारी, आइसा उपाध्यक्ष सबा आफरीन, कालिदास (छपरा), नीतीश कुमार (जहानाबाद) व अधिवक्ता इमरान ने संबोधित किया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता ऐपवा राज्य सचिव अनीता सिन्हा, संचालन आइसा नेत्री सबा आफरीन तथा धन्यवाद ज्ञापन पुनीत पाठक ने किया.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सबा आफरीन ने कहा कि इस आंदोलन ने सरकार की बांटने की नीति का पर्दाफाश किया है. छात्रों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर संघर्ष किया. यह आंदोलन केवल तत्कालीन मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक शिक्षा सुधार का आंदोलन है और आने वाले दिनों में इसे और व्यापक बनाया जाएगा. सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए दमन का सहारा लिया, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी और अंततः सरकार को झुकना पड़ा. यह जेन-जी छात्रों की एक बड़ी जीत है. उन्होंने कहा कि आंदोलन को सांप्रदायिक आधार पर बांटने की सरकार की कोशिश भी पूरी तरह विफल रही.

पटना वीमेंस काॅलेज की काउंसिलर और जेन-जी आंदोलन में शामिल खुशबू कुमारी ने कहा कि कलम और शिक्षा की बात करने वाले छात्रों को आतंकवादी कहा जाता है. जो छात्र सरकार को कल तक आतंकवादी नजर आ रहे थे, आंदोलन के दबाव के बाद अगले ही दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वही छात्र ‘फ्रेंड्स’ नजर आने लगे. उन्होंने कहा कि छात्र सरकार के दमन से डरे नहीं, बल्कि उन्होंने उसका मुकाबला किया.

पटना वीमेंस काॅलेज की छात्रा दिशा कुमारी ने कहा कि आज सरकार के सामने देश का युवा खड़ा है. शिक्षा व्यवस्था में सुधार की लड़ाई आगे बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि छात्रों को गुंडा और आतंकवादी कहने के लिए सरकार को माफी मांगनी चाहिए.

जेन-जी आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल भाव्या कुमारी ने कहा कि आंदोलन में सोशल मीडिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. स्कूली बच्चों ने भी आंदोलन में अपनी भागीदारी दर्ज कराई. उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा में सुधर के लिए भी छात्र अपनी आवाज बुलंद करेंगे. सरकारी स्कूलों को लगातार कमजोर कर निजी स्कूलों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसका विरोध किया जाएगा.

जहानाबाद से आए नीतीश कुमार एवं छपरा से आए कालिदास  ने भी आंदोलन के दौरान के अपने अनुभव साझा किए और पुलिसिया दमन के बारे में बताया.

कालिदास ने कहा कि जेल से रिहा होने के बाद भी पुलिस उनका मोबाइल वापस नहीं कर रही है. अलग-अलग माध्यमों से उन्हें प्रताड़ित करने का प्रयास किया जा रहा है. नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में पुलिसिया फायरिंग की शुरुआत जहानाबाद से ही हुई थी.

परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि जेन-जी आंदोलन ने युवाओं के बीच नई राजनीतिक चेतना और लोकतांत्रिक उम्मीद पैदा की है. शिक्षा, रोजगार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल पर यह संघर्ष आने वाले दिनों में और व्यापक रूप लेगा. कार्यक्रम में दर्जनों की संख्या में नागरिक समाज के लोग भी मौजूद रहे.


बिहार में भी बहालियों में चल रही धांधली के खिलाफ होगा आंदोलन

विधायक डाॅ. संदीप सौरभ ने कहा कि युवाओं ने बदलाव की जो शुरुआत की है, वह काबिल-ए-तारीफ है. धर्मेंद्रप्रधान के इस्तीफे से शुरू हुआ यह बदलाव सत्ता परिवर्तन के बाद ही रुकेगा. उन्होंने कहा कि बिहार में पुलिस भर्ती, बीपीएससी सहित कई अन्य बहालियों में धांधली के सवाल हैं और इनके खिलाफ बिहार के युवा और छात्र आगे चलकर संघर्ष को तेज करेंगे. सरकार संगठित तरीके से शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने की दिशा में काम कर रही है.

आइसा राज्य अध्यक्ष धनंजय ने कहा कि आज उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा, दोनों बदहाल हैं. आइसा शिक्षा व्यवस्था के सवाल पर संघर्ष को तेज करेगा और व्यापक अभियान चलाएगा. उन्होंने घोषणा की कि आने वाले दिनों में बिहार भर में ‘छात्र संसद’ आयोजित की जाएगी, जिसके माध्यम से छात्रों की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा.

15 August, 2026