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संघ-भाजपा के नफरती मंसूबे नाकाम: झारखंड छात्र आंदोलन को जीत हासिल

संघ-भाजपा के नफरती मंसूबे नाकाम: झारखंड छात्र आंदोलन को जीत हासिल

दिल्ली के जंतर-मंतर आन्दोलन से ऊर्जा और प्रेरणा लेकर झारखंड की राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम अभ्यर्थियों के उस एतिहासिक आंदोलन का गवाह बना जिसमें सरकार को सभी मांगें माननी पड़ीं.

झारखंड सरकार ने जेपीएसएसी सहित 2014 से अब तक टीडीपीएल द्वारा कराये गए कुल 44 बहालियों को रद्द कर जांच के आदेश दिए हैं. इसमें ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, डेंटल डाॅक्टर, असिस्टेंट इंजिनियर, सिविल जज, फारेस्ट रेंज ऑफिसर, एडिशनल पब्लिक प्रोसिक्यूटर की बहालियां भी शामिल हैं.

29 जुलाई को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अभ्यर्थी धरने पर बैठे और उन्होंने इसे मांग पूरी होने तक चलाने की घोषणा की. बड़ी संख्या में अभ्यर्थी व सामान्य छात्र-नौजवान इस आन्दोलन के समर्थन में स्टेडियम में जुटे. आइसा-आरवाईए ने इस आंदोलन के समर्थन में रांची और राज्य भर में मशाल-जुलूस, प्रतिवाद मार्च आदि संगठित कर नौजवानों से इस आन्दोलन को और मजबूत बनाने की अपील और हेमंत सरकार से जिनमें धांधली हुई उन परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की.

7 अगस्त को आइसा और आरवाईए ने बिरसा चैक से झारखंड विधानसभा तक मार्च निकाला. मार्च को एआईएसएफ, झारखंड जनाधिकार महासभा और एसएफआई ने भी समर्थन दिया. मार्च में आइसा राष्ट्रीय अध्यक्ष का. नेहा बोरा, आरवाइए महासचिव का. नीरज कुमार सहित विभिन्न छात्र-युवा संगठनों के नेता एवं हजारों की संख्या में आम छात्र-छात्राएं शामिल हुए.

विधानसभा की ओर बढ़ रहे मार्च के दौरान रास्ते में आरएसएस कार्यकर्त्ता अमरनाथ पांडेय अपने 3 अन्य साथियों के साथ ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते हुए का. नेहा बोरा एवं मार्च में शामिल कई छात्रओं हमला किया, हमले में सफल ना होने पर स्याही फेंकी. मार्च में शामिल छात्रों ने उसको पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया.

विधानसभा मार्च से पहले का. नेहा ने आइसा-आरवाईए नेताओं के साथ रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 29 जुलाई, 2026 से जेपीएससी-जेएसएससी सहित भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, धांधली एवं अनियमितता के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना एवं भूख हड़ताल पर बैठे छात्र/अभ्यर्थी नेता देवेन्द्र नाथ महतो, हबीबा, सबिता, रूपेश सहित अन्य छात्रों से मुलाकात की. उन्होंने छात्रों की समस्याओं को सुना और धरना-स्थल पर मौजूद छात्रों को संबोधित करते हुए उनके संघर्ष के प्रति एकजुटता जाहिर की.

मार्च को संबोधित करते हुए का. नेहा ने कहा कि झारखंड बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू, फूलो-झानो और जयपाल सिंह मुंडा के संघर्षों की धरती है. भाजपा-आरएसएस के लोग स्याही फेंककर छात्र आंदोलन को कमजोर करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि स्याही लिखने के लिए होती है, फेंकने के लिए नहीं. छात्रओं और आंदोलनकारियों को डराने की कोशिश उनकी सबसे बड़ी भूल है. तानाशाह सबसे अधिक डरपोक होता है, जबकि संघर्ष में विश्वास रखने वालों के हौसले की कोई सीमा नहीं होती. कहा – ‘तुम्हारी नफरती राजनीति का चूल ना हिला दी, तो धिक्कार है छात्र राजनीति पर’.

अभ्यर्थियों-छात्रों-नौजवानों की एकता-भाईचारा-सूझबूझ ने इस आन्दोलन में भाजपा-आरएसएस की साजिशपूर्ण भूमिका को किनारे रखा और आन्दोलन को जीत की मंजिल तक पहुंचाया. भाजपा-आरएसएस ने इस आन्दोलन को जंतर-मंतर आन्दोलन के खिलाफ खड़ा करने की पूरी कोशिश की, खूब प्रचार चलाया कि जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन भटके लोगों का, देशद्रोहियों का आन्दोलन था, वहां जुनैद की बिरयानी मिलती थी, यहां मंदिर का प्रसाद मिलता है आदि-आदि. यहां तक कि जंतर-मंतर आन्दोलन की नेता आइसा की अध्यक्ष नेहा के रांची आने की खबर पर सोशल मीडिया में काफी धमकियां – यहां तक कि जान से मारने की धमकी दी गई. इसके बावजूद भी आन्दोलन में शामिल छात्र-युवाओं ने भाजपा-आरएसएस के इस नफरती मंसूबों को किनारे करते हुए आन्दोलन की एकता-भाईचारा को कायम रखा और आन्दोलन को जीत तक पहुंचाया.


22 August, 2026