भाकपा(माले) के वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय कमेटी सदस्य व राजस्थान राज्य सचिव काॅमरेड महेंद्र चौधरी का 11 अगस्त को जयपुर में निधन हो गया. दो वर्ष पहले मस्तिष्काघात (ब्रेन स्ट्रोक) के बाद से ही वे बिस्तर पर थे और छोटे भाई के परिवार के साथ उनके जयपुर स्थित घर में रह रहे थे. 12 अगस्त, सुबह 10.30 बजे 71 K5/C खातीपुरा (चांद बिहारी नगर) से खिरनी फाटक स्थित मोक्ष धाम तक उनकी अंतिम यात्रा हुई.
का. महेंद्र चौधरी झुंझुनू जिले के तोगडा कलां गांव के एक छोटे किसान परिवार में पले-बढ़े और काॅलेज में पढ़ाई के दौरान छात्रा राजनीति में जुड़े. उन्होंने 1970 के दशक में अपने छात्रा जीवन के दौरान ही नक्सलबाड़ी किसान विद्रोह से प्रेरित होकर कम्युनिस्ट आंदोलन में प्रवेश किया. तत्पश्चात उन्होंने सुदूर दक्षिण राजस्थान के गांवों की और रूख किया तथा आदिवासियों के पर सामंती-महाजनी शोषण के खिलाफ लड़ने के लिए ‘राजस्थान किसान संगठन’ बनाया. इस संगठन ने आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन के संघर्षों को धार दी और उनको हाली और सगड़ी जैसी सामन्ती बेड़ियों से मुक्त कराने संघर्ष छेड़ा. इस संघर्ष के दौरान सामन्ती ताकतों और प्रशासन ने उन पर लूटपाट करने झूठा मुकदमा दर्ज किया और उनको गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया. लेकिन, वे जल्द ही जेल से मुक्त होकर फिर से संघर्ष में जुट गए. हालांकि उन्होंने मुख्यतः दक्षिण राजस्थान को ही अपने काम का केन्द्र बनाया परन्तु राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के किसानों के बीच भी उन्होंने काम किया जहां काॅमरेड फूलचंद देवा और रणजीत वकील आदि उनके मुख्य साथी रहे.
काॅमरेड श्रीलता स्वामीनाथन और काॅमरेड महेंद्र चौधरी ने 1980 के दशक तक यूसीसीआरआइ(एमएल) के बैनर तले एक टीम के रूप में मिलकर काम किया. इसके बाद, 1989 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के सफल हस्तक्षेप और 8 अक्टूबर 1990 को दिल्ली में हुई विशाल ‘दाम बांधो, काम दो’ रैली के बाद वे भाकपा(माले) में शामिल हुए.
भाकपा(माले) में शामिल होने के बाद, जब तक स्वास्थ्य ने साथ दिया तब तक, काॅमरेड महेंद्र ने पार्टी द्वारा सौंपी गई सभी जिम्मेदारियों को पूरी प्रतिबद्धता और निष्ठा के साथ निभाया. वे दो दशकों से अधिक समय तक राजस्थान के राज्य सचिव रहे. उन्होंने प्रतापगढ़ और सलूंबर के क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों के बीच भी व्यापक और निरंतर काम किया.
भाकपा(माले) की राजस्थान राज्य कमेटी ने उनके निधन पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा – ‘हम उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं और कम्युनिस्ट आंदोलन के प्रति अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले इस जुझारू काॅमरेड को क्रांतिकारी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.’
काॅमरेड महेंद्र चौधरी के निधन की खबर पाते ही कई दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि खातीपुर स्थित उनके भाई के घर पहुंचे. सबने कहा कि काॅमरेड महेंद्र चौधरी और उसके पहले उनकी संगिनी साथी काॅमरेड श्रीलता स्वामीनाथन का हमारे बीच से चले जाना एक दौर की समाप्ति है. उन्होंने मजदूरों, किसानों व आदिवासियों के बीच जिस काम व संगठन की नींव रखी है, उसे इस नए दौर में पूरे राज्य व देश में आगे बढ़ाया जाएगा.
जयपुर में उनको श्रद्धांजलि देने आए लोगों में माकपा नेता काॅमरेड संजय माधव, सुमित्रा चोपड़ा, रितांश आजाद, भाकपा की निशा सिद्धू, पीयूसीएल की कविता श्रीवास्तव, समरीन, फिल्मकार बप्पादित्य, उर्दू प्रशिक्षक पलाश आदि प्रमुख थे.
काॅमरेड महेंद्र चौधरी को लाल सलाम !