वर्ष 35 / अंक - 42 / कामरेड सिद्धनाथ राम अमर रहें!

कामरेड सिद्धनाथ राम अमर रहें!

कामरेड सिद्धनाथ राम अमर रहें!

भोजपुर जिले में पार्टी के शुरुआती नेताओं में से एक और जिले के वरिष्ठ पार्टी नेता कामरेड सिद्धनाथ राम का विगत 10 अक्टूबर, 2026 की सुबह हाई ब्लड प्रेशर से हुए ब्रेन हैमरेज की वजह से निधन हो गया. यह हमला इतना तेज था कि उनको उपचार का अवसर भी नहीं मिल सका.

कामरेड सिद्धनाथ राम का जन्म 1942 में भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के मथुरापुर गांव में एक भूमिहीन मजदूर परिवार में हुआ था. उन्होंने पांचवीं कक्षा तक ही औपचारिक शिक्षा हासिल की. मथुरापुर शुरुआती दिनों से ही पार्टी गतिविधि के कुछेक चुनिंदा गांवों में एक था. उनके चचेरे भाई का. नारद राम पार्टी के सक्रिय सदस्य थे. का. सिद्धनाथ राम 1971 के बाद पार्टी संपर्क में आए और जल्दी ही मथुरापुर में पार्टी संगठन निर्माण व विस्तार में जुट गए.

उन्होंने 1973-74 में मथुरापुर के निकटवर्ती गांव कोरन डिहरी में उचित मजदूरी की मांग पर हुए मजदूर आंदोलन व हड़ताल में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई और पार्टी के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में लगातार विकसित होते गए. का. रामनरेश राम (पारस जी) के भूमिगत हो जाने के बाद का. सिद्धनाथ राम एक प्रमुख जननेता के रूप में उभरे. उन्होंने शुरुआती दौर में बिहार प्रदेश किसान सभा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं.

उन्होंने पार्टी के शुरुआती चुनावी संघर्षों का भी नेतृत्व किया और 1985 और 1990 में आइपीएफ के उम्मीदवार के बतौर सहार विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा. 1990 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने लगभग 46 हजार वोट हासिल किए और महज पौने चार हजार वोट के अंतर से जीत न सके. सहार, अगिआंव, गड़हनी, चरपोखरी सहित भोजपुर के कई प्रखंडों में उन्होंने पार्टी व जनसंगठनों की जिम्मेदारियां संभाली. उनके संघर्षों ने खेत मजदूरों के बीच उन्हें एक लोकप्रिय और भरोसेमंद जननेता के रूप में स्थापित किया.

साल 2000 के बाद वे खेत मजदूर सभा के जिलाध्यक्ष बनाए गए. उनके नेतृत्व में खेत मजदूरों और ग्रामीण गरीबों की व्यापक गोलबंदी हुई. 2010 में पार्टी ने उन्हें अगिआंव विधानसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया जिसमें उन्होंने लगभग 24 हजार वोट हासिल कर प्रभावशाली प्रदर्शन किया.

सादगीपूर्ण जीवन, कठोर मेहनत व जनता के प्रति गहरी प्रतिबद्धता उनकी पहचान थी. ‘नेता जी’ के संबोधन से जनता का स्नेह व सम्मान पाने वाले का. सिद्धनाथ राम अत्यंत ईमानदार, वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध, उसूलों के पक्के और सच्चे कम्युनिस्ट नेता थे.  84 साल की उम्र में भी अपने आखिरी दिनों तक पार्टी कार्यक्रमों में शामिल होने की उनकी बेचैनी साफ दिखती थी. वे अक्सर सहार पार्टी कार्यालय पहुंचकर पार्टी कार्यक्रमों की जानकारी लेते थे और उनमें भाग लेने की कोशिश करते थे.

का. सिद्धनाथ राम का पूरा परिवार पार्टी के प्रति गहरी प्रतिबद्धता रखता है. उनके सबसे छोटे बेटे का. दिलीप राम ने शुरूआती दिनों में युवा संगठन इंकलाबी नौजवान सभा में कई जिम्मेदारियों को निभाया और अभी पार्टी के सहार प्रखंड सचिव की भूमिका निभाते हुए जिला स्थायी समिति के सदस्य हैं. पार्टी में उनकी इस बढ़ती पूर्णकालिक भूमिका को का. सिद्धनाथ राम ने हमेशा ही प्रोत्साहित किया.

का. सिद्धनाथ राम का जीवन मेहनतकश गरीब जनता के संघर्षों को समर्पित रहा. वे एक सच्चे जननेता व क्रांतिकारी कम्युनिस्ट के रूप में लम्बे समय तक याद किए जाएंगे और पार्टी की नयी पीढ़ी को प्रेरित करते रहेंगे. 

कामरेड सिद्धनाथ राम को लाल सलाम!

17 October, 2026