27 अक्टूबर को दिल्ली के त्रिलोकपुरी में सैकड़ों लोग मतदाता सूची से गलत तरीके से नाम हटाए जाने के मामलों पर चर्चा के लिए आयोजित ‘जनसुनवाई’ में इकट्टा हुए. इस जनसुनवाई में भाकपा(माले) महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और आइसा नेता व जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनएसयू) की संयुक्त सचिव दानिश अली समेत कई अन्य लोग शामिल हुए और उन्होंने सभा को संबोधित किया.
मानवाधिकार कार्यकर्ता निखिल डे और एमकेएसएस के उनके साथियों ने नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वूमेंस (एनएफआइडब्ल्यू) और अन्य संगठनों द्वारा संचालित इस सुनवाई में मतदाता सूची से हटाए गए कई लोगों ने अपनी आपबीती सुनाई. योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और आइसा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एन. र्साइं बालाजी जैसे सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के शिकार लोगों से बातचीत की.
विदित हो कि त्रिलोकपुरी के चार बूथों (इंदिरा कैंप के बूथ नंबर 42 और 43, तथा ब्लाॅक 34 के बूथ 79 और 80) में की गई इस जांच से एसआइआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया की भयावह सच्चाई सामने आई है. एक मामले में, 15 लोगों के एक बड़े परिवार में से 12 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए थे, जबकि दूसरे मामले में 10 लोगों के परिवार में से 6 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए. लगभग 40 स्वयंसेवकों ने चार दिनों तक – 23 से 26 अक्टूबर 2026 के बीच – 5,173 मतदाताओं की सूची में से नाम हटाए जाने के कुल 2,097 मामलों की जांच की और इनमें से 1,236 मामलों का सत्यापन किया. इसमें 416 लोगों के नाम गलत तरीके से हटाए जाने की बात सामने आई. यानि, सत्यापित किए गए लोगों में से हर तीसरा व्यक्ति ऐसा था जिसका नाम गलत तरीके से हटाया गया था. इनमें से कई लोगों ने त्रिलोकपुरी सब्जी मंडी में आयोजित जनसुनवाई के दौरान अपनी बात रखी.
जिन लोगों के नाम हटाए गए थे, उनमें से कुछ से कभी किसी बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) ने संपर्क नहीं किया और उन्हें कोई फाॅर्म (एन्यूमरेशन फाॅर्म) भी नहीं मिला. उनमें से अधिकांश ने समय पर अपने फाॅर्म जमा कर दिए थे, लेकिन उन्हें कभी यह नहीं बताया गया कि उनका नाम सूची से हटा दिया गया है. सुनवाई के दौरान ऐसे कई लोगों ने भी गवाही दी, जिन्हें मतदाता सूची में ‘मृत’ घोषित कर दिया गया था. यहां कई युवा संभावित मतदाता भी थे, जिन्होंने शिकायत की कि पूरी एसआइआर (मतदाता सूची पुनरीक्षण) प्रक्रिया के दौरान उन्हें मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के उनके अधिकार से वंचित रखा गया.
इसके अलावा, कुछ लोगों ने अपने घर तोड़े जाने की शिकायत भी की. मोदी सरकार के ‘सभी को आवास’ – जहां झुग्गी, वहीं मकान – (यानी झुग्गियों की जगह पक्के घर देने) – के वादे के विपरीत बुलडोजर चलाकर लोगोें को उनकी मौजूदा झुग्गियों से बेदखल कर दिया गया है.
काॅमरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने सभा को संबोधित करते हुए कहा – ‘अगर हम इस चुनावी धांधली को पलटना चाहते हैं, तो हमें बस एक ही काम करना होगा – वे इस प्रक्रिया को जितना अधिक केंद्रीकृत (सेंट्रलाइज) करेंगे, हमें इसे उतना ही अधिक विकेंद्रीकृत (डिसेंट्रलाइज) करने की आवश्यकता है. हर पोलिंग बूथ पर लोगों को पता होना चाहिए कि मतदाता सूची में किनके नाम जोड़े जा रहे हैं, किनके नाम हटाए जा रहे हैं, और उन्हें क्यों हटाया जा रहा है. इसीलिए हमें हर पोलिंग बूथ पर ‘जन सुनवाई’ की जरूरत है, जहां मतदाता इकट्टा हो सकें और सच्चाई सबके सामने आ सके. इसका मतलब यह है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसे अपडेट करने की प्रक्रिया में मतदाताओं को खुद भी शामिल किया जाना चाहिए.’
त्रिलोकपुरी में हुई जन-सुनवाई में एसआइआर को रद्द करने, गलत तरीके से हटाए गए सभी मतदाताओं के वोटिंग अधिकार बहाल करने, ज्ञानेश कुमार को हटाने और चुनाव आयोग का पुनर्गठन करने की मांगें उठाई गईं.
इसके साथ ही, यह मांग भी की गई कि हर साल मतदाता सूची को अंतिम रूप देने से पहले, बूथ स्तर पर जन-सुनवाई के जरिए एक विश्वसनीय और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए. एसआइआर में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ियों और गलतियों की जड़ में ‘अत्यधिक केंद्रीकरण’ और डिजिटल तकनीक पर ‘अत्यधिक निर्भरता’ है. इससे निपटने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि बूथ स्तर पर विकेंद्रीकृत तरीके से मतदाता सूची को अंतिम रूप दिया जाए, जिसमें मतदाताओं की प्रभावी भागीदारी हो.
जनसुनवाई को संबोधित करते हुए का. दानिश अली ने कहा कि यह एक ऐसी सरकार है जो जनता के जनादेश से सत्ता में नहीं आई है, बल्कि लोगों के वोट चुराकर, उन्हें उनके वोटिंग अधिकारों से वंचित कर और उन्हें चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखकर सत्ता में आई है. साथ ही, यह सरकार यह भी उम्मीद करती है कि वह आने वाले सालों में भी इसी तरह की चुनावी धांधली करके चुनाव जीतती रहेगी और सत्ता में बनी रहेगी. हमें एकजुट होकर इन्हें दिखाना होगा कि हम इस देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए होने वाले संघर्ष में सबसे आगे खड़े रहेंगे. हम अपने वोट देने के अधिकार को किसी भी कीमत पर छिनने नहीं देंगे.