वर्ष 35 / अंक - 30 / नया इतिहास रचता बिहार का जेन-जी

नया इतिहास रचता बिहार का जेन-जी

नया इतिहास रचता बिहार का जेन-जी

22 जुलाई 2026 को बिहार में आइसा का राजभवन मार्च नीट-यूजी पेपर लीक के सवाल पर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे और अन्य मांगों पर चल रहे जंतर-मंतर, दिल्ली आंदोलन को नयी उर्जा देनेवाला साबित हुआ है. पटना के गांधी मैदान से शुरू हुए राजभवन मार्च को, जिसमें 5 हजार से भी अधिक छात्रा-युवा आ जुटे थे. वे यह जान कर आये कि यह मार्च आइसा द्वारा आयोजित है जिसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा वोरा अपने साथियों मनीष कुमार, आमीन व अन्य के साथ जंतर-मंतर पर 23 दिनों तक अनशन पर बैठी रहीं.

यह राजभवन मार्च देश भर के सोशल मीडिया प्लेटफार्मों परं साहस, फन और इनोवेशन के तौर पर सुर्खिया बटोर रहा है जिसने मुख्य धारा के अखबारों व चैनलों में इसको लेकर छायी नकारात्मकता को भी एक हद तक ढंक दिया है.

गांधी मैदान के समीप तैनात भारी पुलिस बल ने जब गेट नंबर 10 को बंद कर इसे रोकने की कोशिश की, तो छात्रों ने अपने हस्त लाघव से ही उस गेट को गिरा दिया, जब उन पर वाटर कैनन का प्रयोग हुआ वे बारिश का आनंद लेते हुए नाचने-गाने लगे, अपनी राह में खड़े किए गए करीब दर्जन भर बेरीकेड्स को उन्होंने स्केलेटर की तरह आजमाया और स्केटिंग करने लगे, रस्से बांधकर रोकने की कोशिश को उन्होंने पुलिस के साथ ‘रस्साकशी’ एक मजेदार खेल में बदल दिया और पुलिस जब लाठियां चलाने आगे बढ़ीं तो समवेत स्वर में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाने लगे. ‘आग को खेल पतंगों ने समझ रखा है, सबको अंजाम का डर हो ये जरूरी तो नहीं’ – अपने बेखौफ तेवर से उन्होंने महान गायक मरहूम नुसरत फतेह अली खान को, गोया फिर से जिंदा कर दिया हो.

इस पूरे मामले में सम्राट चौधरी नीत भाजपा सरकार व उनकी पार्टी बिहार जेन-जी के नफरत व गुस्से के मुख्य निशाने पर रही. कोई अचरज नहीं कि उनपर हिंसा व उपद्रव का आरोप लगाने वाले ऐसा कोई उदाहरण नहीं ला पा रहे जहां उन्होंने आम नागरिकों के प्रति कुछ किया हो. भाजपा के तमाम होडिंग्स-बैनर और कुछेक नेता-विधायक जरूर उनका कोप भाजन बने. यहां तक कि पुलिस वालों के साथ भी वे तबतक ‘फनी’ बने रहे, जबतक उन पर बर्बरतापूर्ण लाठी चार्ज नहीं किया गया. आंसू गैस का तो उन्होंने नए रसास्वादन के बतौर लिया. इसतरह सालों बाद, कोई जुलूस हड़ताली चैक से पार तक पहुंचा और विधान सभा, राजभवन व मुख्यमंत्री निवास के नजदीक तक आ पहुंचा.

दमन का पहिया चला: आइसा व जेन जी नेताओं पर मुकदमें और गिरफ्तारियां 

सच पूछिए तो अहंकार में डूबी सम्राट सरकार को इस  बात का शायद अंदाजा नहीं था कि बिहार के छात्र-युवाओं के भीतर कैसी आग सुलग रही है. बिहार को एनकाउंटर, माॅब लिंचिंग व हाजत में हत्या की प्रयोगशाला बनाने का उसका अभियान काफी तेज हो चला है. शिक्षा के निजीकरण, कारपोरेट भूमि लूट और गरीबों के आशियाने पर बुलडोजर की योजनाएं तेजी से अमल में लाने का मंसूबा आसमान छू रहा है. वोट चोरी से मिले भारी बहुमत को उसने अपनी इन काली करतूतों के लिए वैधता का जामा पहना लिया था. लेकिन इस प्रतिरोध ने उसके होश ठिकाने लगा दिए हैं.

इस घटना को लेकर सरकार के सीधे निर्देश पर राजधानी पटना के विभिन्न थानों में भारी तादाद में फर्जी प्राथमिकियां दर्ज की गयी हैं जिनमें सैकड़ों छात्र-युवाओं पर नामजद व अनाम संगीन मामले दर्ज हैं. यह सिलसिला अगले दिन शाम तक चलता रहा और इसके लिए कुछ भाजपा नेताओं तक को भी आगे किया गया. अबतक चार थानों में पुलिस द्वारा दर्ज 21 एफआईआर का पता चला है. इसमें विधायक का. संदीप सौरभ, एमएलसी का. शशि यादव, राज्य मीडिया प्रभारी का. दिव्यम, आइसा नेता का. धनंजय, का. दीपंकर, का. सबा आफरीन सहित अन्य कई नेता नामजद किए गए हैं. 22 के मार्च के दौरान गिरफ्तार दर्जनों छात्र-युवा पहले से ही जेल में हैं. 24 की शाम 7 बजे बीरचंद पटेल पथ अवस्थित न्यू एमएलए फ्लैट से पालीगंज विधायक संदीप सौरभ, आइसा बिहार राज्य अध्यक्ष व जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष धनंजय, केन्द्रीय कमिटी सदस्य व गया-जहानाबाद-अरवल जोन के भाकपा(माले) प्रभारी कुमार परवेज, आइसा नेता नौशाद और एक परीक्षार्थी को (बाद में छोड़ दिया गया) पुलिस ने हिरासत में ले लिया.

इससे पहले दोपहर में ही, पुनाई चक अवस्थित आइसा-आरवाईए कार्यालय से विधायक आवास जाने के रास्ते में, आइसा राज्य सचिव दीपंकर मिश्रा, पटना विश्वविद्यालय आइसा सचिव सबा आफरीन, भाकपा(माले) के राज्य मीडिया प्रभारी का. कुमार दिव्यम को गिरफ्तार कर लिया गया था. का. परवेज और नौशाद का नाम नहीं होने पर भी गिरफ्तार कर लिया गया. 


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प्रधान मंत्री के नाम एक नागरिक का पत्र

माननीय प्रधानमंत्री जी,
अगर आप चाहते हैं कि युवा आपके पद को गंभीरता से लें, तो ये चार काम तुरंत करें – क्योंकि कथनी से ज्यादा करनी मायने रखती है:
1. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से शुरुआत करें.
2. दिल्ली पुलिस कमिश्नर को बर्खास्त करें, जिन्होंने हमारे युवा प्रदर्शनकारियों पर बर्बर हिंसा की.
3. अपने स्वयंभू चाणक्य गृह मंत्री से इस्तीफा मांगें, जो देश के भविष्य यानी युवाओं को आंतरिक शत्रु की तरह देखते हैं.
4. सरकार की अनगिनत असफलताओं और असीम अहंकार के लिए देश की जनता से तुरंत सार्वजनिक माफी मांगें.
5. यह मत भूलिए कि जुलाई के बाद अगस्त आता है – भारत की आजादी का ऐतिहासिक महीना. 1942 में जब देशवासियों ने अंग्रेजों से ‘भारत छोड़ो’ कहा था, तो पांच साल के भीतर उन्हें वाकई बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ा था.

एक नागरिक,

जो संविधान की प्रस्तावना में निहित भारत के संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य वाले स्वरूप में अटूट विश्वास रखता है.

25 July, 2026