वर्ष 35 / अंक - 20 / चंपावत: उफ्फ भाजपा, हाय-हाय भाजपा!

चंपावत: उफ्फ भाजपा, हाय-हाय भाजपा!

चंपावत: उफ्फ भाजपा, हाय-हाय भाजपा!

चंपावत में 6 मई 2026 को, एक नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म की सनसनीखेज खबर सामने आई. यह भी खबर आई कि उक्त जघन्य अपराध के आरोपियों में एक भाजपा का पूर्व मंडल उपाध्यक्ष भी है. पूरे उत्तराखंड में इस खबर को लेकर गहरी नाराजगी और आक्रोश उत्पन्न हुआ. प्रदेश भर में इस घटना को लेकर विरोध-प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया.

लेकिन चौबीस घंटा बीतते-न-बीतते 7 मई की शाम को चंपावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने खुलासा करते हुए कहा कि पीड़िता के साथ ऐसी कोई घटना नहीं हुई है और यह एक साजिश थी. हालांकि दिन भर से यह भी चर्चा चलती रही कि पीड़ित परिवार को मामला खत्म करने के लिए 50 लाख रूपए का प्रस्ताव आरोपियों की ओर से दिया गया. लेकिन शाम होते-होते चंपावत की  पुलिस अधीक्षक और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के सार्वजानिक वक्तव्य ने सारी बातों का पटाक्षेप कर दिया.

अभी चूंकि दूसरी कोई बात या तथ्य तात्कालिक तौर पर हमारे सामने नहीं है तो संदेह के भाव के बावजूद, मान लेते हैं कि पुलिस ही सही कह रही है.

लेकिन फिर भी भाजपा पर तो कुछ सवाल खड़े होते हैं, कुछ उंगलियां उठती हैं!

चंपावत की पुलिस अधीक्षक ने अपने वक्तव्य में कहा कि पीड़िता को मोहरा बना कर सामूहिक दुष्कर्म की कहानी गढ़ने वाला व्यक्ति कमल रावत है और इसमें उसकी महिला मित्र शामिल है. कमल रावत नाम का उक्त व्यक्ति, इस घटना के सामने आने के बाद से इस मामले में खासा सक्रिय दिखाई दे रहा था.

पर है कौन ये कमल रावत ? कमल रावत, भाजपा के चंपावत जिले के तल्लादेश मंडल का अध्यक्ष हुआ करता था. दिसंबर 2023 में कमल रावत पर एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा. पहले तो वह फरार हो गया. लेकिन तीन दिन बाद उसकी गिरफ्तारी हो गयी. उस मामले में भी आरोपी कमल रावत के राजनीतिक रसूख के चलते पुलिस ने एफआईआर लिखने में आठ घंटे से अधिक लगाए थे. उक्त मामले में मई 2024 में कमल रावत की उच्च न्यायालय से जमानत हुई. अप्रैल 2026 में कमल रावत उक्त मामले में उच्च न्यायालय से बरी हो गया. बरी होने के बाद, उसके द्वारा विधानसभा चुनाव में दावेदारी करने जैसी बातें ऐसे उछाली गयी, जैसे वो कोई रण जीत कर या किला फतह करके आया हो!

चंपावत की पुलिस अधीक्षक रेखा यादव कह रही हैं कि कमल रावत ने उक्त मामले का बदला लेने के लिए यह षड्यंत्र रचा. पुलिस पर तो यह सवाल है कि कमल रावत के प्रकरण में तो पुलिस नहीं मानती थी कि मामला फर्जी है तो फिर अदालत में वह अपने केस को क्यों नहीं साबित कर पाई? उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने केस खारिज कर दिया था तो डबल बेंच में जाती पुलिस. पर ऐसा पुलिस ने कुछ नहीं किया.

अगर पुलिस की इस बात को मान लें कि अपने को आरोपी बनाए जाने से खिन्न कमल रावत ने बदला लेने के लिए दूसरों को सामूहिक दुष्कर्म के मामले में फंसाना चाहा तो यह बेहद गंभीर मामला है.

पर इस घटनाक्रम में गौर करिए कि भाजपा के एक पूर्व मंडल अध्यक्ष – कमल रावत ने किसको सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में फंसाना चाहा – भाजपा के एक निवर्तमान मंडल उपाध्यक्ष पूरन सिंह रावत और दो अन्य को! यही है भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा? कमल रावत जब केस से छूट कर आया तब भी उसने भाजपा के ही लोगों पर अपने राजनीतिक करियर को खत्म करने का आरोप लगाया!

तो क्या मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विधानसभा  क्षेत्र चंपावत में भाजपा के भीतर कोई गैंगवार चल रही है, जहां एक-दूसरे को ठिकाने लगाने के लिए किसी भी हद तक जाया जा सकता है? और यह गैंगवार सिर्फ चंपावत तक ही सीमित है, या सारे प्रदेश में चरित्र और चेहरे वाले ऐसी ही चाल, एक-दूसरे के खिलाफ चल रहे हैं? अफसोस कि  नारी शक्ति के वंदन का शोर मचाने वाली और बेटी बचाओ का नारा उछालने वाली भाजपा के नेताओं के लिए मासूम, निर्दाेष बच्चियां, अपने इसे गैंगवार में सिर्फ इस्तेमाल करने का चीज भर हैं.

16 May, 2026