लखनऊ, 14 मई 2026: भाकपा(माले) ने रिहाई की चहुं ओर से उठ रही मांगों के बीच यूएनआई में वरिष्ठ पत्रकार रहे सत्यम वर्मा (लखनऊ) और छात्रा एक्टिविस्ट आकृति पर नोएडा मजदूर आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने की कड़ी निंदा की है. पार्टी ने इसे कठोर व दमनकारी कार्रवाई बताते हुए रासुका हटाने की मांग की है.
भाकपा(माले) की उप्र राज्य इकाई ने जारी बयान में कहा कि सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दमन बढ़ता ही जा रहा है. पहले से ही लगाई गई धाराएं जैसे कम थीं, तो अब रासुका जैसे काले कानून का इस्तेमाल किया गया है, ताकि लंबे समय तक रिहाई न हो. यह मजदूर आंदोलन से डरी सरकार की घबराहट को दर्शाता है. महाराष्ट्र में जैसे भीमा कोरेगांव प्रकरण में बुद्धिजीवियों को लंबे समय तक जेलों में रखा गया, वही प्रयोग अब उत्तर प्रदेश में दोहराया जा रहा है.
पार्टी ने कहा कि नोएडा के न्यायपूर्ण मजदूर आंदोलन को बदनाम करने के लिए उस पर ‘पाकिस्तान कनेक्शन’ का आरोप तक लगाया गया, जबकि मजदूर वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे थे, ताकि बढ़ती महंगाई व ईरान युद्ध के चलते खाना बनाने की गैस की बढ़ती कालाबाजारी के बीच वे अपने परिवार सहित गुजारा कर सकें. इस आंदोलन के नैतिक समर्थन में उतरे बुद्धिजीवियों व कार्यकर्ताओं ने ऐसा कौन-सा बड़ा अपराध कर दिया, जिससे राष्ट्र की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया – ऐसा कोई ठोस सबूत भी सरकार पेश नहीं कर सकी है.