वर्ष 35 / अंक - 28 / क्रांतिकारी मजदूर आंदोलन के नेता का. आरएन ठाकुर को...

क्रांतिकारी मजदूर आंदोलन के नेता का. आरएन ठाकुर को लाल सलाम!

क्रांतिकारी मजदूर आंदोलन के नेता का. आरएन ठाकुर को लाल सलाम!

भाकपा(माले) की पहली पीढ़ी के अग्रणी नेताओं में से एक तथा बिहार में क्रांतिकारी मजदूर आंदोलन के प्रमुख संगठनकर्ता का. रामनारायण ठाकुर (आर. एन. ठाकुर) का 5 जुलाई 2026 को पटना स्थित पीएमसीएच में निधन हो गया. कुछ दिन पहले ब्रेन स्ट्रोक हुआ था. चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद उनका हालत लगातार बिगड़ती गई और 5 जुलाई की सुबह 9 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली.

कॉ. रामनारायण ठाकुर का जन्म 14 अगस्त 1943 को रोहतास जिले के दिनारा प्रखंड के बीसी-बसांव गांव में हुआ. उनके माता व पिता का नाम क्रमशः यशोदा देवी व शिवदयाल ठाकुर था. वे अपने तीन भाईयों व एक बहन समेत कुल दस भाई-बहनों के परिवार के एक ऐसे अनोखे सदस्य थे, जिनकी वजह से पूरा परिवार आज तक संयुक्त परिवार बना रहा है.

बचपन से ही अत्यंत मेधावी का. आरएन ठाकुर ने अपनी शुरूआती शिक्षा गांव के विद्यालय से पूरी की. उन्होंने आगे चलकर पटना विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित साइंस कॉलेज से रसायन शास्त्र (केमिस्ट्री ऑनर्स) की पढ़ाई की. वर्ष1969-70 में जब नक्सलबाड़ी आंदोलन  की गूंज देशभर के छात्र-युवाओं को आंदोलित कर रही थी, वेभी इससे गहरे प्रभावित हुए. उनके नेतृत्व में ही पटना के विभिन्न कॉलेजों के छात्रों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसे कॉ. सत्यनारायण सिंह समेत तत्कालीन क्रांतिकारी आंदोलन के अनेक प्रमुख पार्टी नेताओं ने संबोधित किया. इसके बाद ही चारु मजूमदार के आह्वान से प्रेरित होकर उन्होंने अपने साथियों कॉ. अशोक कुमार और कॉ. एसके शर्मा के साथ कॉलेज छोड़ दिया और पारिवारिक जिम्मेदारियों और अपने कैरियर का त्याग कर गांवों का रुख किया. उन्होंने अपने पार्टी जीवन की शुरूआत पटना जिले के पुनपुन क्षेत्र में भूमिहीन किसानों व गरीब किसानों के बीच भाकपा(माले) के निर्माण से की. शीघ्र ही जब पार्टी में बिखराव व वैचारिक विचलन का दौर शुरू हुआ तब भी वे अडिग रहे. इसी दौरान उनका संपर्क कॉ. जौहर  और  कॉ. रामनरेश राम से हुआ तथा वे उत्साह के साथ भाकपा(माले) के पुनर्गठन व किसानों के प्रतिरोध को संगठित करने में लग गए. आपातकाल के दौरान गिरफ्तार कर उन्हें बांकीपुर (पटना) जेल में डाल दिया गया. वहांभी उन्होंने कैदियों के सवाल पर चले धारावाहिक आंदोलनों का नेतृत्व किया. 4 नवंबर 1974 के ऐतिहासिक बांकीपुर (पटना) जेल ब्रेक का नेतृत्व करते हुए वे अपने 16 साथियों के साथ बाहर निकल आए. आपातकाल के बाद जब पार्टी के अंदर शुद्धीकरण आंदोलन चला और जनसंगठन के निर्माण, किसानों को एकताबद्ध कर उनके आंदोलन को नई ऊंचाई देने और भाकपा(माले) को व्यापक जनसमुदाय के बीच ले जाने की पहल शुरू हुई तो उन्होंनेे इसमें उत्साहपूर्वक हिस्सा लेना शुरू किया. एक बार फिर 1979 में दानापुर रेलवे स्टेशन से उनको गिरफ्तार कर लिया गया. तब बनी जनता पार्टी सरकार द्वारा राजनीतिक बंदियों को जमानत पर रिहा किए जाने की घोषणा की जा चुकी थी. इसके बावजूद उन्होंने जमानत लेने से इनकार कर दिया और बिना शर्त रिहाई का प्रावधान आने के बाद ही 1981 में जेल से बाहर आए. जेल की यातनाएं और दमन उनके संकल्प को कभी डिगा नहीं सके और वे हर बार पहले से अधिक दृढ़ता के साथ जनता के बीच लौटे.

जेल से निकलने के बाद उन्होंने बिहार व मौजूदा झारखंड के कई जिलों – जहानाबाद, गया, अरवल, हजारीबाग, पूर्णिया, रोहतास, सिवान, वैशाली, मुजफ्फरपुर, गिरिडीह, मुंगेर – आदि में पार्टी संगठन के निर्माण व किसान आंदोलन के विस्तार में अपना योगदान दिया. तत्कालीन मध्य बिहार के जिलों को लेकर जब विशेष कमेटी – मध्य बिहार आंचलिक कमेटी – गठित हुई, वे इसके सदस्य बनाए गए. वे 1983 से 1992 तक पार्टी की केंद्रीय कमेटी के भी सदस्य रहे. इस बीच उन्होंने अल्प अवधि के लिए बिहार के कार्यकारी राज्य सचिव की भी जिम्मेवारी निभाई. वे तब से लेकर जीवन के अंतिम समय तक पार्टी की बिहार राज्य कमेटी के सदस्य बने रहे. वे वर्ष 1990 के बिहार विधानसभा चुनाव में बगोदर क्षेत्र के प्रभारी थे, जहां पहली बार आईपीएफ के प्रत्याशी के बतौर शहीद कॉ. महेंद्र प्रसाद सिंह विजयी हुए थे.

1980 के दशक के अतरार्द्ध में जब भाकपा(माले) ने मजदूर आंदोलन में अपना हस्तक्षेप बढ़ाने और एक क्रांतिकारी मजदूर संगठन खड़ा करने की पहल शुरू की, वे बिहार में इसके प्रमुख संगठनकर्ता बने. बिहार में कर्मचारी आंदोलन के प्रमुख नेता का. योगेश्वर गोप के माकपा छोड़कर भाकपा(माले) में आने के बाद यह प्रक्रिया तेज हुई और 1989 में चेन्नई अधिवेशन के जरिए ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) का निर्माण हुआ. इसी दौर में जब पार्टी ने खुले कामकाज की शुरुआत की तो वे बिहार राज्य कमेटी के प्रवक्ता भी बने.

उनकी देखरेख में ही बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन, बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ, बिहार राज्य असंगठित कामगार यूनियान, ईस्ट सेंट्रल रेलवे इम्प्लाइज यूनियन, बिहार राज्य रिक्शा-ठेला-टमटम चालक संघ, निजी वाहन चालक एवं कर्मचारी संघ (पटना), पाटलिपुत्र दुग्ध उत्पादक कर्मचारी एवं पदाधिकारी संघ, बिहार राज्य जनवादी बीड़ी मजदूर यूनियन तथा झारखंड के कोल माइंस वर्कर्स यूनियन (धनबाद), मोटर कामगार यूनियन (गिरिडीह) का निर्माण व विस्तार हुआ. उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर ऑल इंडिया कंस्ट्रक्शन वर्कर्स फेडरेशन (AISWF) के गठन में भी महती भूमिका निभाई. उन्होंने इनमें से कई संगठनों में अध्यक्ष या अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया. वे वर्ष 2001 से ही लगातार ऐक्टू, बिहार राज्य के महासचिव रहे. का. आरएन ठाकुर ने बिहार में निर्माण श्रमिकों के लिए कल्याण बोर्ड के गठन की भी जोरदार पहल की, पहले इसके एक्सपर्ट कमेटी के और आगे चलकर कल्याण बोर्ड के भी सदस्य रहे. वे 2020-15 के बीच बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के भी सदस्य रहे. वे क्षेत्रीय भविष्य निधि (ईपीएफ) के भी सदस्य रहे.

पिछले लगभग तीन दशकों से केंद्रीय श्रमिक संगठनों की एकजुटता को मजबूत करने तथा बिहार श्रम संगठन के माध्यम से मजदूरों व कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई में भी उन्होंने नेतृत्वकारी भूमिका निभाई. छोटे-छोटे मतभेदों से ऊपर उठकर उन्होंने हमेशा श्रमिक एकता को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी.

उनका जीवन कम्युनिस्ट मूल्यों की सजीव मिसाल था. सादगी, अनुशासन, वैचारिक स्पष्टता, संगठन के प्रति अटूट निष्ठा और कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर काम करते रहने की उनकी क्षमता उन्हें अपने समकालीन नेताओं में विशिष्ट बनाती थी. जीवन के अंतिम समय तक वे पार्टी द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ निभाते रहे. उनका संपूर्ण जीवन शोषित, वंचित और मेहतकश वर्ग के अधिकारों के लिए समर्पित रहा.

उनके निधन से बिहार के श्रमिक आंदोलन ने अपना एक जुझारू, प्रतिबद्ध, दूरदर्शी व संघर्षशील नेता खो दिया है. यह केवल भाकपा(माले), ऐक्टू या किसी एक संगठन की नहीं बल्कि पूरे मजदूर आंदोलन और समूचे वाम-जनवादी आंदोलन की अपूरणीय क्षति है.

पार्टी उनके क्रांतिकारी जीवन, संघर्ष, त्याग और जनप्रतिबद्धता को लाल सलाम करती है तथा संकल्प लेती है कि उनके दिखाए रास्ते पर चलते हुए शोषणमुक्त, लोकतांत्रिक और समानतामूलक समाज के निर्माण का संघर्ष और तेज किया जाएगा.

कॉ. रामनारायण ठाकुर (आर. एन. ठाकुर) को लाल सलाम!

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पटना में अंतिम दर्शन, नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

कॉमरेड आरएन ठाकुर का पार्थिव शरीर पटना स्थित एमएलए फ्लैट 15/10 में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और विभिन्न  राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और परिजनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. स्थानीय बांसघाट स्थित विद्युत शवदाह गृह में उन्हें अंतिम विदाई दी गई.

श्रद्धांजलि देने वालों में पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वदेश भट्टाचार्य, राज्य सचिव कुणाल, पटना जिला सचिव अमर, ऐक्टू के राष्ट्रीय महासचिव राजीव डिमरी, अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के महासचिव धीरेन्द्र झा, ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, सांसद राजाराम सिंह व सुदामा प्रसाद, स्कीम वर्कर्स की राष्ट्रीय नेता व एमएलसी शशि यादव,  विधायक अरुण सिंह व संदीप सौरभ, केडी यादव, सरोज चौबे, संतोष सहर, रणविजय कुमार, उमेश सिंह, जीतेन्द्र कुमार, पूर्व विधायक रामबलि सिंह यादव व अजीत कुमार सिंह, रामबलि प्रसाद, प्रेमचंद सिन्हा समेत जिलों से आए सैकडों नेता-कार्यकर्ता शामिल रहे.

इसके अलावा इंटक, एनएपीएम, यूटीयूसी, स्कीम वर्कर्स फेडरेशन और अन्य जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी.

महागठबंधन और वाम दलों ने जताया शोक

महागठबंधन और वाम दलों के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी कॉमरेड आरएन ठाकुर के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.

श्रद्धांजलि देने वालों में राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी, सीपीआई के विश्वजीत कुमार, डीवाईएफआई के आसिफ अली तथा भाकपा(माले) के नंदकिशोर प्रसाद सहित अनेक नेता मौजूद रहे.

जिलों में आयोजित हुई श्रद्धांजलि सभाएं

भागलपुर, बेगूसराय, अरवल, जहानाबाद, पूर्वी चंपारण, सुपौल आदि समेत कई जिलों में श्रद्धांजलि सभाये आयोजित कर नेताओं-कार्यकर्ताओं ने का. आरएन ठाकुर और का. प्रेम सिंह गहलावत को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

11 July, 2026