14 जुलाई, 2026 को मोगरपाडा (साक्री तालुका, धुले जिला, महाराष्ट्र) में सत्यशोधक शेतकरी सभा (किसान महासभा का घटक) और सत्यशोधक ग्रामीण कष्टकारी सभा द्वारा आयोजित 19वां ‘संघर्ष दिवस’ बड़े उत्साह के साथ मनाया गया. हजारों सत्यशोधक, किसान, खेतिहर मजदूर, महिलाएं और आदिवासी समुदाय के लोग जल, जंगल, जमीन, रोजगार, शिक्षा और आदिवासी कल्याण से जुड़े अधिकारों की रक्षा की वकालत करने के लिए इस कार्यक्रम में एकजुट हुए.
कार्यक्रम की शुरुआत संघर्ष के ऐतिहासिक स्थल से हुई – वहीं जगह जहां सुजलान कंपनी ने टाॅवर लगाने के लिए गड्डा खोदने की कोशिश की थी और जहां आदिवासी लोगों को पहले लाठीचार्ज और फिर गोलीबारी का सामना करना पड़ा था. यहां लाल झंडे को ‘लाल सलाम’ दिया गया और उसके बाद महात्मा फुले द्वारा रचित ‘सत्याचा अखंड’ (सत्य का अटूट गीत) गाया गया. इसके बाद, एक विरोध रैली सभा स्थल पर पहुंची, जहां ‘सुजलान, वापस जाओ!’, ‘जमीन हमारा अधिकार है,’ ‘हम लड़ेंगे, हम जीतेंगे,’ और ‘जल, जंगल और जमीन हमारे हैं’ जैसे नारों से माहौल गूंज उठा.
सभा को कई गणमान्य व्यक्तियों ने संबोधित किया, जिनमें काॅमरेड किशोर धमाले (राज्य सचिव, सत्यशोधक कम्युनिस्ट पार्टी), काॅमरेड आर. टी. गावित (जिला अध्यक्ष), अनंत भावरे (संविधान विशेषज्ञ), काॅमरेड करनसिंह कोकणी, लीलाताई वालवी, शीतल गावित, लालाबाई भोये, यशवंत मालचे, मेरुलाल पवार और दिलीप गावित शामिल थे. केंद्र और राज्य सरकारों की आदिवासी-विरोधी, किसान-विरोधी और मजदूर-विरोधी नीतियों की आलोचना करते हुए, वक्ताओं ने वन अधिकार अधिनियम (2006) को प्रभावी ढंग से लागू करने, आदिवासियों को जमीन के अधिकार के दस्तावेज (7/12 अर्क और GPS आधारित सर्वेक्षण रिकाॅर्ड सहित) जारी करने, किसानों का कर्ज पूरी तरह माफ करने, आदिवासियों के खिलाफ अत्याचारों पर रोक लगाने और शिक्षा व रोजगार के अधिकार की मांग की. सभी के लिए सामाजिक सुरक्षा, आदिवासी किसानों तक ‘किसान सम्मान योजना’ का विस्तार, सूखे से प्रभावित किसानों को मुआवजा और सभी के लिए शिक्षा और रोजगार के अधिकार की गारंटी देने वाले कानून की मांग की.
‘संघर्ष दिवस’ के दौरान की गई मुख्य मांगों में आदिवासी-विरोधी वन अधिनियम (2023) को रद्द करना, वन अधिकारों के दावों का तुरंत निपटारा, आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, राष्ट्रीय शिक्षा नीति और सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम को खत्म करना, छात्रवृत्ति में बढ़ोतरी, आदिवासियों के बीच लैंगिक समानता सुनिश्चित करने वाला एक अलग कानून और कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी शामिल थी.
इस कार्यक्रम का संचालन अशफाक कुरैशी और जीतू पवार ने किया. समापन सत्र में सत्यशोधक आंदोलन के दिवंगत कार्यकर्ताओं जेंटा गावित और चंपा मास्टर को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई.
कार्यक्रम में शामिल लोगों ने कहा कि हजारों लोगों की मौजूदगी वाले इस ‘संघर्ष दिवस’ ने जल, जंगल, जमीन और लोकतांत्रिक अधिकारों के संघर्ष में नई ऊर्जा भर दी है. कार्यक्रम का समापन ‘सत्य की जय हो!’ और ‘लाल सलाम!’ के नारों के साथ हुआ.