वर्ष 35 / अंक - 29 / महिला संगठनों ने छेड़ा देशव्यापी अभियान : महिला आर...

महिला संगठनों ने छेड़ा देशव्यापी अभियान : महिला आरक्षण कानून बिना शर्त लागू करने की मांग

महिला संगठनों ने छेड़ा देशव्यापी अभियान : महिला आरक्षण कानून बिना शर्त लागू करने की मांग

महिला आरक्षण कानून से परिसीमन की शर्त हटाकर इसे तत्काल लागू किया जाए – इस मांग को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर महिला संगठनों ने संयुक्त रूप से एक अभियान चलाने का निर्णय लिया है जिसमें ऐपवा भी शामिल है.  इसके तहत महिला संगठन संयुक्त रूप से 20-21 जुलाई को संसद के समक्ष धरना देंगे.

10 जुलाई 2026 को ऐपवा समेत तमाम महिला संगठनों और अन्य नागरिक संगठनों द्वारा प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस काॅनफ्रेंस का आयोजन किया गया.

‘नेशनल कोएलेशन फाॅर वूमेन रिजर्वेशन’ के बैनर के तले आयोजित प्रेस काॅनफ्रेेंस में ये मांग की गई कि महिला आरक्षण बिल को तत्काल प्रभाव में लागू किया जाये. महिला संगठनों की नताओं ने कहा कि भाजपा सरकार ‘नारी शक्ति वंदन’ बिल के साथ संविधान संशोधन बिल को जोड़कर लागू करना चाहती है और अपना सांप्रदायिक एजेंडा सिद्ध करना चाहती है. उन्होंने महिला आरक्षण बिल को बिना शर्त तत्काल प्रभाव से और वर्तमान लोकसभा और विधानसभा सीटों पर भी तुरंत लागू करने की मांग की है.

प्रेस काॅनफ्रेेंस को संबोधित करते हुए ऐपवा की राष्ट्रीय सचिव श्वेता राज ने कहा कि पिछले लोकसभा सत्र में तमाम महिला संगठनों और विपक्ष ने मिलकर भाजपा के साम्प्रदायिक एजेंडे को पीछे धकेला था. लेकिन, दुःखद है कि अभी भी महिला आरक्षण बिल जमीन पर लागू नहीं हो पाया है, जबकि 2023 में यह ‘नारी शक्ति वंदन बिल’ सदन में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है. भाजपा सरकार लगातार देश की महिलाओं से झूठ बोलती आ रही है. भाजपा सरकार की ये महिला विरोध साजिश नहीं चलेगी.

ऐपवा ने कहा है कि महिला आरक्षण कानून को लेकर भाजपा की मंशा अब स्पष्ट हो चुकी है. 2023 में भाजपा ने ही जो महिला आरक्षण कानून बनाया था और जो विपक्ष की पूर्ण सहमति से पास हुआ था, उसे वह 2026 में  संशोधित करना चाहती है. वह इसे अपने साम्प्रदायिक एजेंडे को पूरा करने के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है.

भाजपा जातीय जनगणना के पक्ष में नहीं है और वह परिसीमन भी अपनी मनमर्जी से करना चाहती है. जिन राज्यों में विपक्ष की सरकार है, वहां वह विपक्ष को दरकिनार कर वोटरों का विभाजन करना चाहती है. भाजपा ने अपने सांप्रदायिक मंसूबे को पूरा करने के लिए महिलाओं के आरक्षण को बलि का बकरा बना दिया है.

परिसीमन के पीछे भाजपा की मंशा है कि वह सांप्रदायिक आधार पर वोटरों का विभाजन करे. वह राज्यों की लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का बंटवारा इस तरह से करे कि  सामाजिक और धार्मिक विभाजन के आधार पर अपनी जीत की स्थाई व्यवस्था कर ले.

परिसीमन की प्रक्रिया में जरूरी है कि राज्यों और इस प्रक्रिया से प्रभावित होने वाले अन्य पक्षों के साथ विचार विमर्श कर सहमति से चुनाव क्षेत्र का निर्धारण हो, लेकिन भाजपा इस पर पूरी तरह से अपना नियंत्रण चाहती है.

ऐपवा का मानना है कि महिला आरक्षण के जरिए संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की जो उपस्थिति होनी है, उसमें पिछड़ी, अतिपिछड़ी जाति और वंचित समुदायों का उचित प्रतिनिधित्व होना चाहिए. इसलिए वह महिला आरक्षण के भीतर आरक्षण के पक्ष में हैं.

इसलिए, ऐपवा ने परिसीमन की शर्त हटाने के साथ ही पिछड़ा, अति पिछड़ा और अन्य वंचित हिस्से की महिलाओं के लिए विशेष आरक्षण की मांग की है. साथ ही, इसी बीच शुरू हो रहे राज्यों के विधानसभा सत्र के मद्देनजर राज्यों की विधानसभा से भी यह मांग करने का फैसला लिया है कि वह इस पक्ष में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजे.

दिल्ली में आयोजित हो रहे धरना कार्यक्रम में अलग-अलग राज्यों से ऐपवा नेत्रियां अपने-अपने राज्यों से अच्छी महिला भागीदारी के साथ अलग-अलग दिन शामिल रहेंगी. वहीं 21 जुलाई को इस मांग के साथ हर राज्य में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.


बिना देर किए शुरू हुई तैयारी

बिहार में 11 जुलाई को ऐपवा महासचिव मीना तिवारी व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज चौबे समेत अन्य महिला संगठनों के प्रतिनिधियों ने राजद के राज्य अध्यक्ष श्री मंगनीलाल मंडल, भाकपा(माले) के राज्य सचिव का. कुणाल समेत इंडिया गठबंधन दलों के नेताओं को अपनी मांग का ज्ञापन दिया.

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 11 जुलाई 2026 को ऐपवा द्वारा शहीद स्मारक स्थल पर संयुक्त सभा का आयोजन किया गया जिसमें ऐपवा समेत विभिन्न दलों एवं महिला संगठनों ने भागीदारी की. यह मांग उठाई गई कि महिला आरक्षण बिल को परिसीमन व जनगणना से जोड़कर पेश करने की कोशिश न की जाए. बल्कि, इसे बेशर्त लागू किया जाए. इस माॅनसून सत्र में केंद्र एवं राज्य स्तर पर वर्तमान लोकसभा एवं राज्य सभा सीटों पर 33% महिला आरक्षण लागू किया जाए. महिला आरक्षण बिल के तहत सभी एससी, एसटी, पिछड़ा वर्ग और ट्रांस महिला वर्ग से आने वाली महिलाओं को आरक्षण मिले.

ऐपवा राष्ट्रीय सचिव श्वेता राज ने प्रमुखता से बात उठाई कि एक तरफ तो एसआइआर में बड़ी संख्या में महिलाओं ने नाम कटे हैं और दूसरी तरफ भाजपा सरकार महिलाओं को 33% महिला आरक्षण देने में टाल-मटोल कर रही है. भाजपा सरकार महिला आरक्षण बिल को परिसीमन से जोड़कर पूरे देश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करना चाहती है. असम और जम्मू कश्मीर के चुनाव इसके हालिया उदाहरण है. पिछले संसद सत्रा में संसद में विपक्ष तथा सड़क पर महिला संगठनों ने इसका पुरजोर विरोध किया और भाजपा सरकार के साम्प्रदायिक एजेंडे को पीछे धकेला. वर्तमान समय में जरूरत है कि पूरे देश में एकजुट होकर महिला आरक्षण बिल को बेशर्त लागू करने की मांग उठाई जाए तथा इसी मानसून सत्र में इसे लागू किया जाए. उत्तराखंड की ऐपवा संयोजक शिवानी पांडे ने कहा कि उत्तराखंड में परिसीमन को जनसंख्या के आधार पर नहीं, बल्कि क्षेत्रफल की आधार पर किया जाना चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता है तो इस पहाड़ी राज्य में न तो पहाड़ के मुद्दों को महत्वपूर्ण जगह मिल पाएगी और न ही मजबूरी में शहरों की तरफ आए लोगों की समस्याओं को सुलझा पाएंगे.

अगले दिन 12 जुलाई को रुद्रपुर में आगामी माॅनसून सत्र में महिला आरक्षण बिल को बेशर्त लागू करने व अन्य मांगो को लेकर ऐपवा द्वारा एक गोष्ठी का आयोजन किया गया. गोष्ठी को ऐपवा राष्ट्रीय सचिव श्वेता राज, प्रदेश संयोजक शिवानी पांडे, बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड की सदस्य अमनदीप कौर, आम आदमी पार्टी की नेता किरण पांडे, उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की प्रदेश उपाध्यक्ष रीता कश्यप आदि ने प्रमुख रूप से संबोधित किया.

गोष्ठी में प्रस्ताव लिया गया कि 20 जुलाई को सभी जगह से महिला आरक्षण बिल 2023 को लागू करने की मांग को लेकर ज्ञापन दिया जाए.

गोष्ठी में प्रीति मौर्य, नमिता सरकार, माधवी देवी, पवनदीप कौर, अनिता अन्ना, पुष्पा देवी, ज्योति चंद, श्रीशा, पायल मौर्य, ऐक्टू प्रदेश महामंत्री केके बोरा, दिनेश तिवारी, रंजन विश्वास , ललित मटियाली, ज्ञानी सुरेन सिंह, धीरज कुमार, मनीष कुमार सहित कई लोग मौजूद थे.

यह सिलसिला अगले दिन 13 जुलाई को भी जारी रहा.संसद के आगामी माॅनसून सत्र में महिला आरक्षण बिल को बिना शर्त लागू करने की मांग के साथ कार रोड चौराहा, बिंदुखत्ता में ऐपवा द्वारा एक बैठक आयोजित हुई. इस बैठक को संबोधित करते हुए ऐपवा की नैनीताल जिला संयोजक विमला रौथाण और ऐपवा नेत्री निर्मला शाही ने राज्य में लगातार बढ़ रहे महिला उत्पीड़न के मामलों के खिलाफ महिलाओं को संगठित करने के कार्यभार पर भी चर्चा की.

यह निर्णय लिया गया कि 21 जुलाई को लालकुआं तहसील पर धरना-प्रदर्शन करते हुए महिला आरक्षण लागू करने की मांग पर केंद्रीय कानून मंत्री को ज्ञापन भेजा जायेगा.

बैठक में श्वेता राज, डाॅ. शिवानी पांडे, विमला रौथाण, निर्मला शाही, शशि गड़िया, अनीता अन्ना, मेहरुन्निशां, रुखसाना, आरती आदि महिला नेता शामिल रहीं.

16 जुलाई को उत्तरी दिल्ली के वजीरपुर औद्योगिक क्षेत्र में – जहां की बहादुर महिलाएं लंबे समय से बुलडोजर राज के हमले के खिलाफ लड़ रही हैं – संसद के समक्ष आयोजित होनेवाले धरना-प्रदर्शन को सफल करने की दिशा में  महिलाओं के साथ जन संवाद हुआ. अगले दिन भी दिल्ली-एनसीआर स्थित खोड़ा में महिलाओं की बैठक आयोंजित कर 20-21 को संसद के समक्ष (जंतर-मंतर पर) आयोजित कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की गई. अन्य राज्यों – उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड में भी कार्यक्रम को सफल बनाने की तैयारी चल रही है.


18 July, 2026